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ब्रिक्स करेंसी पर विवाद: क्या ट्रम्प की धमकियों के आगे झुके मोदी?

ब्रिक्स करेंसी पर विवाद

ब्रिक्स करेंसी पर विवाद नरेंद्र मोदी का ’56 इंच का सीना’ अब ‘6 इंच’ का साबित हो रहा है, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की एक घुड़की पर भारत की विदेश नीति घुटनों पर आ जाती है। ‘इंडिया फर्स्ट’ का नारा चुनावी जुमला बनकर रह गया है, जबकि मोदी ट्रम्प के ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ एजेंडे को बढ़ावा दे रहे हैं।

चाहे वह ब्रिक्स करेंसी पर विवाद के कारण अपना प्लान छोड़ना हो या चाबहार पोर्ट से हाथ खींचना, भारत की संप्रभुता पर सवाल उठ रहे हैं। X पर वायरल पोस्ट्स में लोग मोदी को ‘डरपोक’ और ‘सरेंडर मोदी’ कह रहे हैं, क्योंकि ट्रम्प की धमकियों पर भारत ने रूस और ईरान से तेल खरीद कम की और पाकिस्तान के साथ अमेरिका के युद्धाभ्यास पर चुप्पी साध ली।

2025 में ट्रम्प ने भारत को ‘टैरिफ टेररिस्ट’ कहा, लेकिन मोदी ने कोई जवाब नहीं दिया, जबकि 2026 में US-पाकिस्तान ‘इंस्पायर्ड गैंबिट’ एक्सरसाइज पर भारत BRICS नेवल ड्रिल से पीछे हट गया।

यह कमजोरी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों की बलि है, जहां मोदी का मेकअप और दिन में चार बार कपड़े बदलना उनकी असली प्राथमिकता लगती है, न कि देश की गरिमा। अंधभक्तों का ‘भगवान’ अब ट्रम्प का गुलाम बन चुका है, और जनता यह देखकर क्रोध से उबल रही है कि इनका कभी भी सड़कों पर विरोध फूट सकता है।

डोनाल्ड ट्रम्प की 100% टैरिफ की धमकी और भारत का सरेंडर

ब्रिक्स करेंसी पर विवाद मोदी सरकार की सबसे बड़ी हार के रूप में उभरा है, जहां ट्रम्प ने 100% टैरिफ की धमकी दी और मोदी ने तुरंत इसका नाम तक लेना छोड़ दिया। 2024 में BRICS ने डे-डॉलराइजेशन की बात की थी, लेकिन ट्रम्प के एक ट्वीट पर भारत ने वीटो कर दिया और अब BRICS+ देशों के साथ नेवल एक्सरसाइज से भी पीछे हट गया है।

ट्रम्प ने भारत को ‘टैरिफ टेररिस्ट नेशन’ कहा, लेकिन मोदी चुप रहे, और अब अमेरिका से महंगे लड़ाकू विमान और तेल मंगवा रहे हैं, जैसे कि ‘विश्वguru’ नहीं बल्कि ‘ट्रम्प का चेला’ बन गए हों।

यह सरेंडर भारत की बहुपक्षीय नीति को खत्म कर रहा है, जहां मोदी की कमजोरी BRICS को मजबूत करने के बजाय अमेरिका को फायदा पहुंचा रही है, और अंधभक्त इसे ‘स्ट्रैटेजिक’ कहकर ढक रहे हैं। 2025 में जब ट्रम्प ने BRICS को ‘होस्टाइल’ कहा और 100% टैरिफ की चेतावनी दी, तो भारत ने तुरंत रुख बदलते हुए डे-डॉलराइजेशन को ‘हमारा उद्देश्य नहीं’ बता दिया।

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इलेक्ट्रिक वाहनों पर ड्यूटी कटौती: भारतीय ऑटो इंडस्ट्री की टूटती कमर

ट्रम्प की धमकी पर मोदी ने अमेरिका से इलेक्ट्रिक वाहनों पर आयात शुल्क 110% से घटाकर 15% कर दिया, जबकि भारतीय ऑटो इंडस्ट्री की कमर टूट रही है। 2025 में ट्रम्प ट्रेड डील के तहत EV पर ड्यूटी घटाकर 15% से भी कम की गई, और अब अमेरिकी कंपनियां जैसे टेस्ला भारत में घुस रही हैं, लेकिन मोदी ने कोई रियायत नहीं मांगी। इसी तरह, अमेरिकी कॉटन पर 11% ड्यूटी हटाकर 0% कर दी गई, जिससे भारतीय कपास किसानों की बलि चढ़ गई और लाखों किसान बर्बाद हो रहे हैं।

यह ‘इंडिया फर्स्ट’ नहीं, बल्कि ‘ट्रम्प फर्स्ट’ है, जहां मोदी की डरपोक नीति से घरेलू इंडस्ट्री तबाह हो रही है, और ट्रम्प हंसते हुए भारत को लूट रहा है। अंधभक्तों को लगता है यह ‘डिप्लोमैसी’ है, लेकिन हकीकत में यह राष्ट्रीय अपमान है।

2025 के बजट में SKD किट्स पर ड्यूटी 25% से 20% कर दी गई, जो हार्ले और टेस्ला को फायदा पहुंचाती है, जबकि US ने भारत पर 50% टैरिफ लगाए रखे हैं।

ऑपरेशन सिंदूर और सैन्य स्वायत्तता पर गहराता संकट

ऑपरेशन सिंदूर में ट्रम्प ने ‘सीज फायर’ कहा और डरपोक मोदी ने तुरंत सरेंडर कर दिया, जैसे कि भारत की सेना ट्रम्प की मर्जी पर चलती हो। 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान ट्रम्प ने 50 से ज्यादा बार क्लेम किया कि उन्होंने मोदी को रोका, और मोदी ने कभी इस पर मुंह नहीं खोला।

यह कमजोरी भारत की सैन्य स्वतंत्रता पर सवाल उठाती है, जहां ’56 इंच’ का दावा हवा हो गया, और मोदी ट्रम्प की डांट से कांप गए। अंधभक्त इसे ‘शांति’ कहते हैं, लेकिन जनता समझ चुकी है कि यह सरेंडर है, जो देश की गरिमा को चोट पहुंचा रहा है। 2025 में ट्रम्प ने दावा किया कि उन्होंने 10 मिलियन लोगों की जान बचाई, और पाकिस्तान के PM ने उन्हें थैंक यू कहा, लेकिन मोदी ने कोई खंडन नहीं किया।

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रूसी और ईरानी तेल आयात में कटौती: ऊर्जा सुरक्षा को खतरा

ट्रम्प ने कहा ‘रूस से तेल मत खरीदो’ और मोदी ने सरेंडर कर दिया, जबकि भारत रूस से सस्ता तेल लेकर आर्थिक लाभ कमा रहा था। 2025 में ट्रम्प की धमकी पर भारत ने रूसी तेल आयात कम किया, और अब रिलायंस जैसी कंपनियां भी पीछे हट गई हैं।

इसी तरह, ईरान से तेल न खरीदने की हिदायत पर मोदी हाथ जोड़कर खड़े हो गए, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ गई। ब्रिक्स करेंसी पर विवाद के साये में यह डरपोक नीति भारत को महंगे अमेरिकी तेल पर निर्भर बना रही है, जहां मोदी की कमजोरी से अर्थव्यवस्था चरमरा रही है।

जनता अब समझ चुकी है कि यह राष्ट्रीय हितों की बलि है। 2025 में ट्रम्प ने मोदी से वादा लिया कि रूसी तेल न खरीदें, और भारत ने आयात 35% से घटाकर 20% कर दिया।

चाबहार पोर्ट से भारत का नियंत्रण खत्म: रणनीतिक हार

हाल ही में मोदी ने ट्रम्प की घुड़की पर ईरान के चाबहार पोर्ट से भारत का कंट्रोल छोड़ दिया, जहां “120 मिलियन डॉलर” देश के जनता की मेहनत की गाढ़ी कमाई डूब गई। 2026 में US प्रेशर से भारत ने पोर्ट से हाथ खींच लिया और आधिकारिक वेबसाइट तक बंद कर दी, जबकि यह पोर्ट पाकिस्तान को बायपास कर अफगानिस्तान तक पहुंच का रास्ता था।

यह सरेंडर चीन की BRI को मजबूत कर रहा है, जहां मोदी की डरपोक नीति से भारत की रणनीतिक स्थिति कमजोर हो रही है। अंधभक्त इसे ‘स्ट्रैटेजिक रिट्रीट’ कहते हैं, लेकिन हकीकत में यह अपमान है, जो देश को महंगा पड़ रहा है। 2025 में US ने सैंक्शंस वेवर दिया था, लेकिन 2026 में भारी दबाव के चलते भारत ने $120 मिलियन का पेमेंट पूरा कर प्रोजेक्ट छोड़ दिया।

US-पाकिस्तान युद्धाभ्यास और भारत की चुप्पी

अमेरिका पाकिस्तान के साथ युद्धाभ्यास कर सकता है, लेकिन ट्रम्प की इच्छा से भारत रूस या BRICS देशों के साथ युद्धाभ्यास नहीं कर सकता, यह मोदी की विदेश नीति की सबसे बड़ी विडंबना है। 2026 में ब्रिक्स करेंसी पर विवाद और अमेरिकी दबाव के कारण भारत नेवल ड्रिल से पीछे हट गया, जबकि US-पाकिस्तान ‘इंस्पायर्ड गैंबिट’ कर रहे हैं।

यह दोहरा मापदंड भारत की स्वतंत्रता को कुचल रहा है, जहां मोदी ट्रम्प की जी हुजूरी में देश को गुलाम बना रहे हैं। दरअसल अंधभक्तों का ‘विश्वगुरु’ अब ‘ट्रम्प का चेला’ बन चुका है, और इन सब के मद्देनजर जनता का गुस्सा कभी भी सड़कों पर फूट सकता है।

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विश्वगुरु से सरेंडर मोड तक का सफर

2026 में ‘विल फॉर पीस’ एक्सरसाइज से भारत की अनुपस्थिति ने BRICS को कमजोर किया है, जबकि US ने पाकिस्तान के साथ 13वीं ‘इंस्पायर्ड गैंबिट’ पूरी की। भारत की जनता के सामने दहाड़ मारने वाले मोदी ट्रम्प के सामने क्यों भींगी बिल्ली बन जाते हैं, यह शोध का विषय है।

2025-26 में ट्रम्प की तरफ से लगातार धमकियां, जैसे 50% टैरिफ, ने मोदी को मजबूर किया कि वह ‘विश्वगुरु’ का दावा छोड़कर सरेंडर मोड में आ गए, जिससे भारत की बहुपक्षीय विदेश नीति कमजोर हो रही है। यह लगातार होता सरेंडर भारत की गरिमा को वैश्विक मंच पर धूमिल कर रहा है।

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