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BSNL अधिकारी रॉयल प्रोटोकॉल: एक गलती और रद्द हुआ ‘VIP स्नान’!

BSNL अधिकारी रॉयल प्रोटोकॉल

BSNL अधिकारी रॉयल प्रोटोकॉल की ये कहानी किसी फिल्म के सीन जैसी लग सकती है, लेकिन यह हकीकत है जिसने आज पूरे देश को शर्मसार कर दिया है। मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, BSNL के निदेशक विवेक बंजाल का प्रयागराज दौरा अचानक रद्द करना पड़ा क्योंकि उनके स्वागत के लिए बनाए गए ‘रॉयल प्रोटोकॉल’ की लिस्ट सोशल मीडिया पर लीक हो गई थी।

इस लिस्ट ने न केवल सरकारी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, बल्कि जनता के मन में एक गहरा आक्रोश पैदा कर दिया। जब BSNL जैसी संस्था घाटे और तकनीकी चुनौतियों से जूझ रही है, तब उसके एक निदेशक के लिए प्रधानमंत्री स्तर का प्रोटोकॉल तैयार करना किसी मजाक से कम नहीं लगता।

यह विवाद तब और बढ़ गया जब लोगों ने देखा कि कैसे एक सरकारी अधिकारी के निजी सुख-सुविधाओं के लिए पूरे विभाग को काम पर लगा दिया गया था।

अंडरवियर, चप्पल और ड्राई फ्रूट्स: प्रोटोकॉल की वो लिस्ट जिसने नैतिकता की धज्जियां उड़ाईं

इस BSNL अधिकारी रॉयल प्रोटोकॉल विवाद की सबसे चौंकाने वाली बात वह ‘इतिनेररी’ (कार्ययोजना) थी जो अधिकारियों के बीच सर्कुलेट की गई थी। वायरल लिस्ट के अनुसार, तैनात स्टाफ को न केवल निदेशक की सुरक्षा और रसद का ध्यान रखना था, बल्कि उनके लिए अंडरवियर, चप्पल, चॉकलेट और ड्राई फ्रूट्स तक लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

यह ‘बाबूगिरी’ की उस पराकाष्ठा को दर्शाता है जहाँ एक उच्च पदस्थ अधिकारी अपने मातहतों को घरेलू नौकर की तरह इस्तेमाल करने की योजना बना रहा था।

सोशल मीडिया पर इस लिस्ट के वायरल होने के बाद लोगों ने इसे ‘बेशर्म बाबूगिरी’ करार दिया है। स्टाफ को निर्देश दिया गया था कि निदेशक के संगम स्नान के दौरान उनके ‘बेयर एसेंशियल्स’ का खास ख्याल रखा जाए, जिसमें निजी जरूरतों के सामान की लंबी फेहरिस्त शामिल थी।

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कौन हैं विवेक बंजाल: जिनकी सुख-सुविधाओं के आगे फीकी पड़ गई पीएम मोदी की सुरक्षा

BSNL अधिकारी रॉयल प्रोटोकॉल के केंद्र में मौजूद BSNL विवेक बंजाल के निदेशक हैं, लेकिन उनके प्रयागराज दौरे के लिए जो व्यवस्थाएं की गई थीं, वे किसी बड़े राजनेता या राष्ट्राध्यक्ष से कम नहीं थीं। रिपोर्टों के अनुसार, उनके स्वागत के लिए तैनात सुरक्षाकर्मी और स्टाफ की संख्या इतनी अधिक थी कि इसकी तुलना प्रधानमंत्री मोदी के दौरों से की जाने लगी।

विवेक बंजाल का यह दौरा संगम स्नान के धार्मिक उद्देश्य से प्रेरित था, लेकिन इसके पीछे की जो प्रशासनिक तैयारी थी, उसने पूरे उत्तर प्रदेश के सरकारी हलकों में चर्चा छेड़ दी। सवाल यह उठाया जा रहा है कि एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) का अधिकारी क्या ऐसी ‘शाही’ सेवाओं का हकदार है, जबकि उसी विभाग के कर्मचारी अक्सर वेतन और संसाधनों की कमी का रोना रोते रहते हैं।

संगम स्नान और वायरल फोटो: जब धार्मिक आस्था के नाम पर हुआ प्रोटोकॉल का तमाशा

विवेक बंजाल के प्रयागराज दौरे का मुख्य आकर्षण संगम स्नान था, लेकिन इस BSNL अधिकारी रॉयल प्रोटोकॉल ने इस धार्मिक कृत्य को भी विवादों में घसीट लिया। वायरल हुई जानकारी के मुताबिक, निदेशक के नहाने से लेकर उनके कपड़े बदलने तक के लिए वीआईपी टेंट और विशेष स्टाफ तैनात किया गया था।

यहाँ तक कि उनके लिए खरीदे जाने वाले ड्राई फ्रूट्स और चॉकलेट की क्वालिटी तक को पहले से तय किया गया था। संगम की रेती पर जहाँ आम श्रद्धालु भक्ति भाव से आते हैं, वहां इस तरह का वीआईपी प्रोटोकॉल देखकर स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी गई। जैसे ही यह खबर और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई, वैसे ही विभाग की छवि को भारी नुकसान पहुँचा, जिससे ऊपर बैठे आला अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा।

दौरा रद्द और भारी आक्रोश: जनता के दबाव के आगे झुकी ‘बादशाहत’

सोशल मीडिया पर मचे भारी आउटरेज और मीडिया के कड़े सवालों के बाद, आखिरकार विवेक बंजाल का प्रयागराज दौरा रद्द करने का फैसला लिया गया। इस BSNL अधिकारी रॉयल प्रोटोकॉल विवाद ने बीएसएनएल प्रबंधन को इतनी मुश्किल स्थिति में डाल दिया था कि दौरा रद्द करना ही एकमात्र रास्ता बचा था।

प्रयागराज के स्थानीय बीएसएनएल कार्यालय में भी सन्नाटा पसर गया है, जहाँ के कर्मचारी पहले उत्साह में तैयारियों में जुटे थे लेकिन अब जांच के डर से कैमरे से बच रहे हैं।

जनता का सवाल सीधा है—जब एक आम आदमी को बेहतर नेटवर्क के लिए तरसना पड़ता है, तो अधिकारियों के अंडरवियर और ड्राई फ्रूट्स के लिए सरकारी खजाना क्यों खोला जा रहा है? इस रद्द दौरे को जनता की जीत के रूप में देखा जा रहा है जिसने ‘शाही’ मानसिकता को करारा जवाब दिया है।

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जेन-जी और मिलेनियल्स का गुस्सा: ‘टैक्सपेयर्स के पैसे का ये कैसा मजाक?’

आज की युवा पीढ़ी, जो डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप कल्चर में यकीन रखती है, इस तरह की सामंती मानसिकता को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। इंस्टाग्राम और ट्विटर (X) पर युवा टैक्सपेयर्स इस विवाद को लेकर मीम्स बना रहे हैं और सरकार से जवाब मांग रहे हैं।

उनका कहना है कि जहाँ एक तरफ निजी कंपनियां 5G और 6G की रेस में आगे बढ़ रही हैं, वहीं BSNL के अधिकारी ‘अंडरवियर प्रोटोकॉल’ में उलझे हुए हैं। यह विवाद दिखाता है कि सरकारी संस्थानों में जवाबदेही की कितनी कमी है।

युवाओं के बीच यह चर्चा का विषय है कि क्या इसी तरह की ‘शाही’ आदतों की वजह से बीएसएनएल आज प्रतिस्पर्धा में पीछे रह गया है। हैशटैग #BSNLScam और #RoyalBabu सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं।

प्रशासनिक जांच की मांग: क्या विवेक बंजाल और जिम्मेदार स्टाफ पर गिरेगी गाज?

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब उच्च स्तरीय जांच की मांग उठने लगी है। यह सवाल केवल एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि उस पूरी व्यवस्था का है जिसने इस BSNL अधिकारी रॉयल प्रोटोकॉल को मंजूरी दी थी। आखिर वो कौन से स्थानीय अधिकारी थे जिन्होंने निदेशक को खुश करने के लिए ऐसी शर्मनाक लिस्ट तैयार की? क्या विभाग के फंड का इस्तेमाल इन निजी सामानों की खरीद के लिए किया गया था?

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार सरकारी उपक्रमों को बचाना चाहती है, तो उसे ऐसी ‘बादशाही’ आदतों पर तुरंत लगाम लगानी होगी। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या केवल दौरा रद्द करना काफी है या विभाग के भीतर इस सामंती सोच को खत्म करने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।

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शाही प्रोटोकॉल से नहीं, सेवा से बढ़ेगी बीएसएनएल की साख

अंततः, BSNL अधिकारी रॉयल प्रोटोकॉल विवाद ने यह साफ कर दिया है कि जनता अब किसी भी प्रकार के ‘वीआईपी कल्चर’ को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। सरकारी अधिकारियों को यह समझना होगा कि वे जनता के सेवक हैं, न कि उनके मालिक।

BSNL को बचाने के लिए बेहतर नेटवर्क और ग्राहक सेवा की जरूरत है, न कि निदेशकों के लिए रेशमी टेंट और लग्जरी चॉकलेट्स की। यह घटना अन्य सरकारी विभागों के लिए भी एक चेतावनी है कि डिजिटल युग में कोई भी ‘डार्क सीक्रेट’ छिपा नहीं रह सकता।

यदि हम चाहते हैं कि हमारे सार्वजनिक उपक्रम फिर से अपने पैरों पर खड़े हों, तो हमें इस ‘बाबूगिरी’ की दीवार को गिराना होगा और जवाबदेही को अपनी प्राथमिकता बनाना होगा।

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