“बेंगलुरु गड्ढे विवाद: डीके शिवकुमार का पीएम आवास सड़क गड्ढे पर तंज”
बेंगलुरु में सड़कों की खराब हालत को लेकर कर्नाटक सरकार पर हो रही चौतरफा आलोचना के बीच, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि जब खराब सड़कें पूरे देश की समस्या हैं, तो मीडिया सिर्फ़ बेंगलुरु के मुद्दों को क्यों बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि मीडिया को दिल्ली जाकर यह भी देखना चाहिए कि पीएम आवास सड़क गड्ढे कितने हैं।
डीके शिवकुमार ने अपने सदाशिवनगर स्थित आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि नगर निगम के अधिकारी बारिश के बावजूद लगातार काम कर रहे हैं और हर दिन 1,000 गड्ढे भर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हम पाँचों निगमों में से प्रत्येक में लगभग 200 गड्ढे भर रहे हैं, यानी प्रतिदिन कुल 1,000 गड्ढे। अधिकारी और कर्मचारी बारिश के बीच भी काम कर रहे हैं।” उन्होंने देश भर में खराब सड़कों के लिए पिछली भाजपा सरकारों को जिम्मेदार ठहराया।
लॉजिस्टिक्स फर्म ब्लैकबक के आरोपों के बाद गरमाई राजनीति
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी फर्म ब्लैकबक के सह-संस्थापक ने सड़कों की खराब हालत का हवाला देते हुए बेलंदूर स्थित अपने कार्यालय को खाली करने की योजना की घोषणा की। ब्लैकबक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश याबाजी ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि आउटर रिंग रोड “गड्ढों और धूल से भरी सड़कों और उन्हें ठीक करने के प्रति कमजोर इरादे” के लिए कुख्यात है।
उन्होंने आगे कहा कि उन्हें अगले पाँच साल में भी स्थिति में सुधार की कोई उम्मीद नहीं है। इस घोषणा ने कर्नाटक सरकार के नागरिक मुद्दों से निपटने के तरीके पर व्यापक बहस और आलोचना छेड़ दी।
इस मामले में केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने भी प्रशासन पर अक्षमता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए बेंगलुरु को “गड्ढों का शहर” बताया। हालांकि, शिवकुमार ने कंपनियों द्वारा बेंगलुरु छोड़ने की धमकी की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा था कि सरकार “धमकियों या ब्लैकमेलिंग की जरा भी परवाह नहीं करती।”
उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के पास 25 लाख से ज़्यादा इंजीनियर और लगभग दो लाख विदेशी पेशेवर हैं, जो इसकी निरंतर वैश्विक अपील का प्रमाण हैं।
भाजपा पर पलटवार: पिछली सरकारों को ठहराया जिम्मेदार
उपमुख्यमंत्री ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर भाजपा के शासनकाल में सड़कों का रखरखाव ठीक से किया गया होता, तो आज ऐसी स्थिति नहीं होती। उन्होंने कहा, “उन्होंने गड्ढों को ठीक करने के लिए कुछ भी करने की जहमत नहीं उठाई, लेकिन अब चुनाव नजदीक आते ही वे इस मुद्दे को उठा रहे हैं।”
आगामी निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है।
उन्होंने जोर देकर कहा, “मैं बड़ी आईटी कंपनियों को बताना चाहता हूँ कि ये गड्ढे हर जगह हैं। लेकिन हमें इन्हें बंद करने का अपना कर्तव्य निभाना होगा। पूरे भारत में यही व्यवस्था है।
मीडिया इसे सिर्फ़ कर्नाटक के तौर पर दिखा रहा है। अगर भाजपा इसे बेहतर कर सकती थी, तो सड़कें ऐसी क्यों होतीं?” उन्होंने दोहराया कि यह समस्या पूरे देश में है, यहाँ तक कि दिल्ली में भी पीएम आवास सड़क गड्ढे मौजूद हैं।
सरकार के प्रयास और भविष्य की योजनाएँ
डीके शिवकुमार ने पहले ही ठेकेदारों को नवंबर तक गड्ढे भरने की अंतिम समय सीमा दी थी। उन्होंने शहर भर में सड़कों की मरम्मत और निर्माण के लिए 1,100 करोड़ रुपये की घोषणा भी की थी। उन्होंने कहा था, “चूंकि हमारा लक्ष्य स्वच्छ बेंगलुरु और सुचारु यातायात है, इसलिए जीबीए यह सुनिश्चित करेगा कि गड्ढों को जल्द से जल्द साफ किया जाए।”
उन्होंने कहा कि सरकार इस समस्या का समाधान करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है और प्रमुख आईटी कंपनियों तथा हितधारकों को आश्वस्त किया कि यह समस्या व्यापक है और इसे दूर करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। शिवकुमार, जो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ 24 सितंबर को पटना में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में शामिल होंगे।
उन्होंने पत्रकारों से एक बार फिर आग्रह किया कि वे दिल्ली में भी गड्ढों की स्थिति की जांच करें, जिसमें पीएम आवास सड़क गड्ढे भी शामिल हैं।



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