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दिल्ली: रील की सनक में मौत, स्कॉर्पियो स्टंट ने ली इकलौते बेटे की जान

रील की सनक में

रील की सनक में मौत का एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला दिल्ली के द्वारका इलाके से सामने आया है, जिसने पूरी राजधानी को झकझोर कर रख दिया है।

सोशल मीडिया पर लाइक्स और फॉलोअर्स बटोरने की भूख किस कदर इंसानी जान पर भारी पड़ सकती है, इसकी गवाह बनी वह सड़क जहां एक 23 साल के युवक का शव क्षत-विक्षत हालत में मिला। जानकारी के मुताबिक, एक तेज़ रफ़्तार स्कॉर्पियो ड्राइवर सड़क पर खतरनाक स्टंट कर रहा था ताकि ‘रील’ बनाई जा सके, लेकिन इस रफ़्तार के जुनून ने एक बाइक सवार युवक को कुचल दिया।

हादसे की भयावहता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृतक की जैकेट फटी हुई थी और उसका शरीर सड़क पर खून से लथपथ पड़ा था, जबकि आरोपी अपनी गाड़ी के साथ रील बनाने में मशगूल था।

मां की चीख और फटा हुआ कोट: ‘मेरा बेटा सड़क पर बेजान पड़ा था’

मृतक युवक की मां का दर्द देखकर पत्थर दिल भी पसीज जाए। उन्होंने मीडिया के सामने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि उनके बेटे का शव सड़क पर लावारिस की तरह पड़ा था। मां ने बताया कि जब उन्होंने अपने बेटे को देखा, तो उसकी जैकेट पूरी तरह फटी हुई थी और उसका शरीर रफ़्तार के उस तांडव का निशान चीख-चीख कर बता रहा था।

एक सिंगल मदर के लिए उसका जवान बेटा ही उसकी पूरी दुनिया था, जिसे दिल्ली की सड़कों पर रील बनाने के शौकीन नाबालिग ड्राइवर ने बेरहमी से छीन लिया।

पुलिस की शुरुआती जांच और चश्मदीदों के मुताबिक, स्कॉर्पियो सवार रील बनाने के लिए बार-बार ज़िग-ज़ैग तरीके से गाड़ी चला रहा था, जिसने मासूम बाइकर को संभलने का मौका तक नहीं दिया।

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बोर्ड परीक्षा के नाम पर जमानत: इंसाफ के तराजू पर सवाल

इस मामले में सबसे ज़्यादा विवाद आरोपी को मिली ‘जमानत’ को लेकर हो रहा है। रील की सनक में मौत का शिकार हुए युवक के परिवार में तब गुस्सा और बढ़ गया जब यह खबर आई कि आरोपी नाबालिग ड्राइवर को उसकी बोर्ड परीक्षाओं के आधार पर जमानत दे दी गई है।

दिल्ली की एक अदालत ने मानवीय आधार पर परीक्षा देने के लिए उसे रिहा कर दिया, लेकिन पीड़ित मां का सवाल है कि “मेरे बेटे की जान की कीमत क्या सिर्फ एक परीक्षा है?”

कानून के जानकारों और आम लोगों के बीच इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या ‘नाबालिग’ होने का फायदा उठाकर इस तरह के जघन्य अपराधों के आरोपी बच निकलेंगे?

रील या मौत का जाल? रफ़्तार के ‘किलर स्टंट’ की हकीकत

दिल्ली की सड़कों पर रील बनाने का यह कोई पहला मामला नहीं है, लेकिन इस बार इसने एक जान ले ली है। आरोपी ड्राइवर स्कॉर्पियो के साथ खतरनाक स्टंट कर रहा था और उसके दोस्त फोन पर इस रफ़्तार को कैद कर रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया ऐप्स का ‘एल्गोरिदम’ युवाओं को खतरनाक काम करने के लिए उकसाता है।

इस ‘डिजिटल सनक’ की वजह से रील की सनक में मौत की खबरें अब आम होती जा रही हैं। द्वारका की यह घटना साफ करती है कि जब तक सड़कों पर रील बनाने वालों के खिलाफ सख्त कानून और भारी जुर्माना नहीं लगाया जाएगा, तब तक बेकसूर लोग इन ‘रील हंटर्स’ का शिकार होते रहेंगे।

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दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और चश्मदीदों के रोंगटे खड़े कर देने वाले बयान

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन चश्मदीदों का कहना है कि हादसा इतना भयानक था कि बाइक के परखच्चे उड़ गए थे। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि स्कॉर्पियो की रफ़्तार 100 किमी प्रति घंटे से ऊपर लग रही थी।

ड्राइवर का ध्यान सड़क पर कम और मोबाइल कैमरे की तरफ ज़्यादा था। दिल्ली पुलिस अब इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि रील बनाने के दावों को और पुख्ता किया जा सके।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत में मामले को सामान्य एक्सीडेंट की तरह देखा, जबकि यह साफ तौर पर रील बनाने के चक्कर में किया गया ‘गैर इरादतन हत्या’ का मामला है।

इंसाफ की पुकार: सिंगल मदर की गुहार ने सोशल मीडिया पर मचाया हड़कंप

मृतक की मां जो एक अकेली अभिभावक (Single Mother) हैं, उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि उनका बेटा घर का इकलौता कमाने वाला था और उसका सपना अपने परिवार को एक बेहतर ज़िंदगी देना था।

रील की सनक में मौत ने न केवल एक नौजवान की जान ली, बल्कि एक मां के बुढ़ापे का सहारा भी हमेशा के लिए छीन लिया। सोशल मीडिया पर अब ‘Justice For Delhi Biker’ जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोग आरोपी के परिवार पर भी सवाल उठा रहे हैं कि उन्होंने एक नाबालिग को इतनी तेज़ रफ़्तार गाड़ी और स्टंट करने की छूट कैसे दी?

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क्या कानून बदलेगा? रील कल्चर पर लगाम लगाने की मांग तेज़

इस हादसे के बाद दिल्ली के निवासियों में भारी रोष है। लोग मांग कर रहे हैं कि सार्वजनिक सड़कों पर रील बनाने या स्टंट करने को ‘संगीन अपराध’ की श्रेणी में डाला जाए।

नाबालिगों के हाथों में स्टयरिंग थमाने वाले माता-पिता पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है। अगर रील कल्चर इसी तरह मासूमों की जान लेता रहा, तो आने वाले समय में सड़कें किसी युद्ध क्षेत्र से कम नहीं होंगी।

कोर्ट द्वारा बोर्ड परीक्षा के लिए दी गई जमानत को भी ऊपरी अदालत में चुनौती देने की तैयारी की जा रही है, ताकि यह एक मिसाल बन सके कि ‘रील’ के नाम पर ‘मर्डर’ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

रफ़्तार का शौक या जान की कीमत?

अंत में सवाल वही खड़ा होता है कि हमारे समाज में एक ‘लाइक’ की कीमत किसी की ज़िंदगी से बढ़कर कैसे हो गई? रील की सनक में मौत की यह घटना हम सबके लिए एक चेतावनी है।

रफ़्तार, कैमरा और स्टंट का यह कॉकटेल खूनी साबित हो रहा है। जब तक समाज और प्रशासन मिलकर इन रील हंटर्स पर नकेल नहीं कसेंगे, तब तक द्वारका जैसे हादसे होते रहेंगे और मांएं अपने बेटों के फटे हुए कोट और बेजान शरीर सड़क पर देखती रहेंगी।

अब समय आ गया है कि डिजिटल दुनिया की इस सनक को सड़कों से हटाकर जेल की सलाखों के पीछे पहुँचाया जाए, ताकि कोई और इकलौता बेटा रील की भेंट न चढ़े।

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