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कोटा में निर्माणाधीन इमारत गिरी: दो की मौत और 13 घायल, बचाव कार्य जारी

निर्माणाधीन इमारत गिरी

निर्माणाधीन इमारत गिरी और इसके साथ ही राजस्थान के शिक्षा नगरी कोटा में एक शांत दिन अचानक चीख-पुकार और मातम में बदल गया। कोटा के इंद्रविहार और तलवंडी इलाके के संगम पर शनिवार रात करीब 9 बजे एक तीन मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस हृदयविदारक घटना में अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 13 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

कोटा मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल संगीता सक्सेना ने बताया कि अस्पताल पहुंचने पर दो लोगों को मृत घोषित कर दिया गया था। मलबे से निकाले गए 10 लोगों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से तीन को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि दो का इलाज मामूली चोटों के साथ चल रहा है। इस हादसे ने निर्माण सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक चौकसी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

निर्माण में घोर लापरवाही और ड्रिलिंग की शिकायतों पर उठे सवाल

हादसे के बाद कोटा संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और बताया कि यह हादसा एक कंस्ट्रक्शन साइट पर हुआ जहां नई बिल्डिंग का काम चल रहा था। उन्होंने आशंका जताई कि यह निर्माण की गुणवत्ता में भारी लापरवाही का नतीजा हो सकता है। स्थानीय निवासियों ने अधिकारियों को बताया कि पिछले कुछ समय से वहां ड्रिलिंग का काम चल रहा था, जिसे लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं।

प्राथमिक जांच के अनुसार, निर्माणाधीन इमारत गिरी क्योंकि उसके बगल में एक पुरानी बिल्डिंग को तोड़ा जा रहा था, जिससे नई इमारत की फाउंडेशन (नींव) में समस्या आ गई थी। संभागीय आयुक्त ने स्पष्ट किया कि कारणों की आगे तकनीकी जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के परिणाम साझा किए जाएंगे।

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NDRF और SDRF की टीमों ने संभाला मोर्चा, रात भर चला रेस्क्यू

घटना की जानकारी मिलते ही नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), अग्निशमन विभाग और स्थानीय पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। भारी मशीनरी का इस्तेमाल करके मलबे को हटाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया गया। कोटा के जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया ने बताया कि बचाव दल बहुत सावधानी से काम कर रहे हैं ताकि मलबे में दबे संभावित जीवित लोगों को कोई नुकसान न पहुंचे।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बचाव दल के एक सदस्य को भी चोट आई, जिसकी दाहिनी अनामिका उंगली का ऊपरी हिस्सा कट गया; उसकी हालत अब स्थिर है और बाद में उसकी प्लास्टिक सर्जरी की जाएगी। अंधेरे और संकरी गलियों के बावजूद बचाव दल ने समय के खिलाफ दौड़ लगाते हुए कई जिंदगियां बचाईं।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहत कार्यों का लिया जायजा

कोटा के सांसद और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और इसे “बेहद दर्दनाक” बताया। उन्होंने तुरंत जिला प्रशासन, जिला कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क साधा और राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। बिरला ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि घायलों को बिना किसी देरी के उचित और उच्चतम श्रेणी का चिकित्सा उपचार प्रदान किया जाए।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति एकजुटता दिखाई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि वह इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों को शक्ति और साहस प्रदान करने की कामना करते हैं।

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रेस्टोरेंट और कोचिंग हब में मलबे के नीचे दबे छात्र और कर्मचारी

हादसा जिस इलाके में हुआ, वह कोटा का प्रमुख कोचिंग हब और जवाहर नगर का व्यस्त कमर्शियल सेंटर है। जिस समय यह निर्माणाधीन इमारत गिरी, उस वक्त इमारत के निचले हिस्से में चल रहे कैफे/रेस्टोरेंट में कुछ ग्राहक और स्टाफ मौजूद थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि गिरने से पहले उन्होंने एक जोरदार धमाके जैसी आवाज सुनी थी।

कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर ने अस्पताल का दौरा करने के बाद बताया कि मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए सभी संभव प्रयास किए जा रहे हैं। घायलों में पश्चिम बंगाल का एक 20 वर्षीय युवक भी शामिल था, जिसकी बाद में मौत हो गई। आशंका जताई जा रही है कि मलबे में अभी भी 2-3 लोग फंसे हो सकते हैं, जिन्हें खोजने के लिए रात भर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

अस्पतालों में इमरजेंसी अलर्ट और गंभीर घायलों की स्थिति

चीफ मेडिकल और हेल्थ ऑफिसर (CMHO) नरेंद्र नगर ने बताया कि मेडिकल कॉलेज और ट्रॉमा हॉस्पिटल में इमरजेंसी अलर्ट जारी किया गया है। मलबे से निकाले गए लोगों में से पांच की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है। मेडिकल टीमें हर मरीज के वाइटल्स की बारीकी से निगरानी कर रही हैं।

कुछ घायलों को उनके परिजनों की इच्छा पर निजी अस्पतालों में भी शिफ्ट किया गया है। प्रशासन ने पूरे इलाके को सील कर दिया है ताकि बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए। भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने घेराबंदी की है ताकि एम्बुलेंस का रास्ता साफ रहे और घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके।

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प्रशासनिक जांच और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर होगी FIR

डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट पीयूष सामरिया ने कहा कि हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक FIR दर्ज नहीं की गई है, लेकिन बचाव अभियान पूरा होने के बाद कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। शुरुआती जांच इशारा कर रही है कि बगल की बिल्डिंग को तोड़ने के दौरान नींव की सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया। यह निर्माणाधीन इमारत गिरी क्योंकि संरचनात्मक अखंडता की जांच नहीं की गई थी।

स्थानीय विधायक संदीप शर्मा भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने प्रशासन से इस हादसे के लिए जिम्मेदार बिल्डर्स और इंजीनियरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। शहर के बीचों-बीच इस तरह के असुरक्षित निर्माण ने पूरी नगर निगम और यूआईटी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है।

कोटा हॉरर: सुरक्षा जांच और भविष्य के लिए सबक

जवाहर नगर जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में जहां हजारों छात्र रहते हैं, वहां इस तरह का हादसा एक बड़ी चेतावनी है। अधिकारियों ने निर्णय लिया है कि वर्तमान में उनका पूरा ध्यान जान बचाने पर है, लेकिन साइट खाली होने के बाद विस्तृत तकनीकी ऑडिट किया जाएगा। मलबे को मैन्युअल रूप से और मशीनों के जरिए हटाया जा रहा है ताकि फंसे हुए लोगों को निकाला जा सके।

इस हादसे ने निर्माण क्षेत्र में सुरक्षा उल्लंघनों की कड़वी सच्चाई को एक बार फिर सामने ला दिया है। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही से किसी निर्दोष की जान न जाए और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और न्याय मिल सके।

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