पैंडोरा बॉक्स की चेतावनी: एयर प्यूरीफायर पर GST राहत याचिका टली
पैंडोरा बॉक्स की चेतावनी दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को शहर के बिगड़ते वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के बीच एयर प्यूरीफायर पर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) में कमी की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में फिलहाल कोई भी अंतरिम निर्देश देने से साफ इनकार कर दिया है और केंद्र सरकार को अपना विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय दिया है।
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एन. वेंकटरमन ने पैंडोरा बॉक्स की चेतावनी देते हुए तर्क दिया कि यदि इस तरह की याचिकाओं के माध्यम से टैक्स दरों में बदलाव किया गया, तो भविष्य में अन्य क्षेत्रों से भी इसी तरह की मांगें उठने लगेंगी, जिससे एक नई संवैधानिक और प्रशासनिक जटिलता पैदा हो जाएगी।
केंद्र ने PIL की वैधता पर उठाए गंभीर सवाल
जस्टिस विकास महाजन और विनोद कुमार की डिवीजन बेंच के समक्ष केंद्र सरकार ने इस याचिका की मंशा और वैधता पर कड़े सवाल खड़े किए। ASG एन. वेंकटरमन ने कोर्ट से स्पष्ट शब्दों में कहा कि “यह बिल्कुल भी PIL नहीं है।” उन्होंने आशंका जताई कि GST तो सिर्फ एक बहाना है और इस याचिका के पीछे कोई विशेष एजेंडा हो सकता है।
केंद्र ने अदालत को आगाह किया कि संवैधानिक दृष्टिकोण से शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धांत सर्वोपरि है। याचिका दायर करके GST काउंसिल को निर्देश जारी करवाना या परमादेश (Mandamus) की मांग करना न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाओं के बाहर है। सरकार का मानना है कि इस तरह के न्यायिक आदेशों से देश के वित्तीय ढांचे में पैंडोरा बॉक्स की चेतावनी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
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प्रदूषण संकट और आम आदमी की जेब पर कोर्ट की टिप्पणी
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में खतरनाक स्तर पर पहुंचे प्रदूषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की। बेंच ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया कि आज के समय में एक साधारण एयर प्यूरीफायर की कीमत ₹10,000 से ₹15,000 के बीच है, जो एक आम आदमी के लिए काफी अधिक है।
कोर्ट ने सवाल किया कि गंभीर प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए GST दरों को इतना कम क्यों नहीं किया जा सकता कि ये उपकरण आम जनता के लिए किफायती हो सकें। कोर्ट ने केंद्र से कहा, “आपको जो करना है करें,” लेकिन यह चिंता पूरी तरह से स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति के कारण है।
मेडिकल डिवाइस घोषित करने की मांग और तकनीकी पेंच
याचिकाकर्ता एडवोकेट कपिल मदान, जो स्वयं कोर्ट में पेश हुए, ने तर्क दिया कि यह कोई विरोधी याचिका नहीं है। उनकी मुख्य दलील यह है कि एयर प्यूरीफायर को गलत तरीके से क्लासिफाई किया गया है। उन्होंने GST नोटिफिकेशन के शेड्यूल I की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि सभी मेडिकल डिवाइस शेड्यूल I
के तहत आते हैं, जबकि एयर प्यूरीफायर को शेड्यूल II में रखा गया है, जिसके कारण इन पर 18 प्रतिशत की उच्च दर से टैक्स वसूला जा रहा है। याचिका में मांग की गई है कि एयर प्यूरीफायर को ‘लक्जरी’ के बजाय ‘मेडिकल डिवाइस’ की श्रेणी में शामिल किया जाए और टैक्स को घटाकर 5 प्रतिशत किया जाए।
हालांकि, सरकार ने इसे मेडिकल डिवाइस मानने से इनकार किया है और पैंडोरा बॉक्स की चेतावनी देते हुए कहा कि इससे लाइसेंसिंग और रेगुलेशन की प्रक्रिया बहुत जटिल हो जाएगी।
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GST काउंसिल के विशेषाधिकार और केंद्र का स्टैंड
केंद्र सरकार ने दलील दी कि सामान का वर्गीकरण (Classification) और टैक्स की दरें तय करना पूरी तरह से GST काउंसिल का संवैधानिक कार्य है। यह एक फेडरल बॉडी है जिसमें केंद्र और सभी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। ASG ने स्पष्ट किया कि काउंसिल की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नहीं बल्कि केवल भौतिक रूप (Physical Meeting) में ही संभव है।
सरकार ने कोर्ट को बताया कि इस मुद्दे पर पहले ही वित्त मंत्री के स्तर पर और पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी की सिफारिशों पर विचार-विमर्श चल रहा है। सरकार ने साफ किया कि वह किसी भी प्रक्रिया को दरकिनार नहीं कर सकती क्योंकि ऐसा करने से पैंडोरा बॉक्स की चेतावनी की वास्तविकता सामने आ सकती है, जहाँ हर सेक्टर इसी तरह की राहत मांगने लगेगा।
याचिका के पीछे ‘छिपे हुए एजेंडे’ की आशंका
सुनवाई के दौरान केंद्र ने याचिकाकर्ता के इरादों पर भी संदेह जताया। ASG ने बताया कि वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में एक अर्जेंट मीटिंग की थी। सरकार जानना चाहती है कि इस याचिका के पीछे वास्तव में कौन है, क्योंकि उन्हें संदेह है कि कोई एयर प्यूरीफायर मार्केट में मोनोपॉली (एकाधिकार) बनाना चाहता है।
उन्होंने यह भी बिंदु उठाया कि याचिकाकर्ता स्वास्थ्य मंत्रालय को पार्टी बनाए बिना ही उपकरणों को मेडिकल डिवाइस घोषित करने की मांग कर रहे हैं, जो कि कानूनी प्रक्रिया के विरुद्ध है। सरकार का तर्क है कि यह एक सोची-समझी याचिका है जिसका वास्तविक जनहित से कोई लेना-देना नहीं है।
कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से किया इनकार
तमाम दलीलों को सुनने के बाद, दिल्ली हाई कोर्ट की बेंच ने यह निष्कर्ष निकाला कि बिना केंद्र सरकार के काउंटर-एफिडेविट के इस स्तर पर कोई भी अंतरिम या अंतिम आदेश जारी नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने पिछले आदेश का संदर्भ देते हुए स्पष्ट किया कि क्योंकि यह मामला पूरे भारत को प्रभावित करता है, इसलिए GST काउंसिल को ही इस पर अंतिम फैसला लेना होगा। हालांकि, याचिकाकर्ता कपिल मदान ने चिंता जताई कि सरकार समय लेगी और तब तक पूरा शहर प्रदूषण से जूझता रहेगा, लेकिन कोर्ट ने उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य समझा।
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9 जनवरी को होगी अगली अहम सुनवाई
कोर्ट ने अब केंद्र सरकार को 10 दिनों के भीतर अपना विस्तृत जवाबी हलफनामा (Counter-Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता को अपना प्रत्युत्तर (Rejoinder) दाखिल करने की छूट दी गई है। जस्टिस महाजन और जस्टिस कुमार की बेंच ने अनुरोध किया है कि सर्दियों की छुट्टियों के बाद इस मामले पर तेजी से सुनवाई की जाएगी।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी 2026 को तय की गई है, जहाँ यह साफ होगा कि क्या सरकार जन स्वास्थ्य के हित में एयर प्यूरीफायर पर टैक्स दरों को युक्तिसंगत बनाने की दिशा में कोई कदम उठाती है या नहीं।
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