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GST में बड़ा बदलाव: 5% और 18% जीएसटी की नई दरें प्रस्तावित

5% और 18% जीएसटी

सरकार ने जीएसटी संरचना में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है, जिसमें 5% और 18% जीएसटी के दो मुख्य स्लैब शामिल हैं। इस कदम का उद्देश्य आवश्यक वस्तुओं पर करों में कटौती करना है, जिससे किसानों और आम नागरिकों को राहत मिल सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन बदलावों को दिवाली तक लागू करने की घोषणा की है, जिसे उन्होंने “अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार” बताया है।

  • प्रस्ताव के अनुसार, तंबाकू और पान मसाला जैसी हानिकारक वस्तुओं पर 40% जीएसटी लगेगा।
  • जीएसटी परिषद सितंबर में अपनी बैठक में इन बदलावों को अंतिम रूप देगी।
  • यह सुधार कृषि उत्पादों, स्वास्थ्य वस्तुओं और हस्तशिल्प को सस्ता बनाएगा।

इन सुधारों को आर्थिक विकास को गति देने और उपभोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पेश किया गया है। वर्तमान में जीएसटी में पाँच स्लैब हैं, जिन्हें अब सरल बनाने की योजना है।

मुख्य बिंदु :

  1. सरकार ने 5% और 18% जीएसटी के दो मुख्य स्लैब लागू करने का प्रस्ताव रखा।
  2. तंबाकू और पान मसाला जैसी हानिकारक वस्तुओं पर 40% जीएसटी लगाने की योजना।
  3. 12% और 28% स्लैब समाप्त कर अधिकांश वस्तुएँ 5% या 18% श्रेणी में शामिल होंगी।
  4. स्वास्थ्य, जीवन बीमा और कृषि उत्पाद जैसी आवश्यक वस्तुएँ सस्ती होंगी।
  5. उलटे शुल्क ढाँचे में सुधार और पंजीकरण प्रक्रिया को स्वचालित बनाने का प्रस्ताव।
  6. प्रधानमंत्री मोदी ने बदलावों को ‘दिवाली का तोहफा’ और आर्थिक प्रोत्साहन बताया।
  7. जीएसटी परिषद सितंबर बैठक में बदलावों को अंतिम रूप देकर दिवाली से पहले लागू करेगी।

दो स्लैब की नई संरचना

केंद्र सरकार का मानना है कि दो स्लैब वाली संरचना से कर प्रणाली सरल और पारदर्शी होगी। वर्तमान 12% और 28% के स्लैब को खत्म कर दिया जाएगा। 12% स्लैब की 99% वस्तुओं को 5% और 18% जीएसटी के तहत 5% स्लैब में स्थानांतरित किया जाएगा। इसी तरह, 28% स्लैब की लगभग 90% वस्तुओं को 18% स्लैब में शामिल किया जाएगा।

  • यह कदम मध्यम वर्ग द्वारा उपयोग की जाने वाली वस्तुओं को सस्ता कर देगा।
  • स्वास्थ्य और जीवन बीमा जैसी आवश्यक सेवाएं भी अधिक किफायती होंगी।
  • पेट्रोलियम उत्पादों को फिलहाल जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है।

सरकार ने इन बदलावों को स्थिरता प्रदान करने और बार-बार के परिवर्तनों से बचने का लक्ष्य रखा है। एक सरल कर ढाँचा विवादों को भी कम करने में मदद करेगा।

‘दिवाली का तोहफा’ और आर्थिक प्रभाव

प्रधानमंत्री मोदी ने इन बदलावों को ‘दिवाली का तोहफा’ बताया है, क्योंकि इससे लोगों के लिए जरूरी सेवाओं पर करों में कमी आएगी। सरकार को उम्मीद है कि 5% और 18% जीएसटी की नई दरें अल्पकालिक राजस्व नुकसान को भर देंगी। यह नुकसान बढ़ी हुई बिक्री और बेहतर कर अनुपालन से पूरा होने की उम्मीद है।

  • वर्तमान में 65% राजस्व 18% स्लैब से आता है।
  • सबसे कम 5% कर स्लैब कुल जीएसटी संग्रह में 7% का योगदान देता है।
  • नई व्यवस्था में भी शून्य और कुछ सीमांत दरें जारी रहेंगी।

इस सुधार से एमएसएमई और रोज़गार प्रधान क्षेत्रों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

संरचनात्मक सुधार और प्रक्रिया में सरलता

प्रस्तावित सुधारों में न केवल दरें बल्कि संरचनात्मक बदलाव भी शामिल हैं। इसमें उलटे शुल्क ढांचे में सुधार किया जाएगा, जिससे विशेष रूप से कपड़ा और उर्वरक जैसे क्षेत्रों को मदद मिलेगी। पंजीकरण प्रक्रिया को भी स्वचालित और सरल बनाने का प्रस्ताव है, जिससे छोटे व्यवसायों को केवल तीन दिनों में पंजीकरण मिल सके।

  • यह सुधार वर्गीकरण संबंधी विवादों को समाप्त करेगा।
  • एक्सपोर्टर्स के लिए रिफंड प्रक्रिया को भी तेज़ किया जाएगा।
  • पहले से भरे हुए रिटर्न से अनुपालन का बोझ कम होगा।

प्रस्तावित 5% और 18% जीएसटी स्लैब से अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

भविष्य की योजना और अंतिम निर्णय

केंद्र सरकार ने इन प्रस्तावों को जीएसटी परिषद द्वारा नियुक्त मंत्रियों के समूह को भेजा है। जीएसटी परिषद इन पर चर्चा करेगी और दिवाली से पहले इन्हें लागू करने की कोशिश करेगी। सरकार का मानना है कि इन बदलावों को लागू करने के लिए विधायी संशोधनों की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि इन्हें केवल अधिसूचनाओं के माध्यम से किया जा सकता है।

  • क्षतिपूर्ति उपकर को भी समाप्त करने पर विचार किया जा रहा है।
  • यह कदम भारत के मुक्त व्यापार समझौतों के अनुरूप है।
  • प्रस्तावों को लागू करने के लिए परिषद की कई बैठकें हो सकती हैं।

ये सुधार भारत को एक सरल, स्थिर और पारदर्शी कर प्रणाली की ओर ले जाने का एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

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