दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण: उम्र नहीं, फिटनेस बने वाहनों का आधार
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण बदलाव की वकालत करते हुए, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है। उन्होंने कहा है कि वाहनों की उम्र की परवाह किए बिना, अगर वे फिट और प्रदूषण रहित हैं, तो उन्हें राजधानी की सड़कों पर चलने की अनुमति मिलनी चाहिए। यह मांग उस समय आई है जब दिल्ली-एनसीआर में पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध लागू है, जिससे लाखों वाहन मालिकों पर असर पड़ रहा है।
- प्रदूषण रहित वाहनों को सड़कों से न हटाया जाए।
- फिटनेस प्रमाणपत्र होने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए।
- दिल्लीवासियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने शालीमार बाग में एक कार्यक्रम में यह बात दोहराई। यह नियम देश के बाकी हिस्सों में भी लागू होता है।
आयु सीमा पर पुनर्विचार की मांग
दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से 2018 के उस आदेश पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है, जिसने वाहनों की आयु सीमा निर्धारित की थी। सरकार चाहती है कि प्रदूषण से निपटने के लिए अधिक लक्षित और वैज्ञानिक उपायों पर ध्यान दिया जाए। यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के मौजूदा निर्देश के विरुद्ध है, जिसकी आलोचना सूक्ष्मता के अभाव और मध्यम वर्ग पर प्रतिकूल प्रभाव के लिए की गई है।
- आयु-आधारित प्रतिबंध पर पुनर्विचार आवश्यक है।
- वैज्ञानिक और न्यायसंगत उपायों पर ध्यान केंद्रित हो।
- मध्यम वर्ग के वाहन मालिक प्रभावित हो रहे हैं।
ईंधन प्रतिबंध: एक अधूरा समाधान
CAQM द्वारा 1 जुलाई 2025 से पुराने वाहनों (10 साल से ज़्यादा पुराने डीज़ल और 15 साल से ज़्यादा पुराने पेट्रोल वाहन) को ईंधन देने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस उपाय के तहत, वाहनों को ज़ब्त भी किया जाना था, चाहे वे कहीं भी पंजीकृत हों। हालांकि, व्यापक विरोध और दिल्ली सरकार के रुख बदलने के बाद, यह प्रतिबंध 1 नवंबर 2025 तक बढ़ा दिया गया है
- वाहन की आयु तार्किक मानदंड नहीं होनी चाहिए।
- नया वाहन भी अधिक प्रदूषण कर सकता है।
- पुराने वाहनों को अचानक हटाना अनुचित है।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण: मुख्य कारक और वास्तविक स्थिति
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण एक गंभीर चुनौती है, और इसके कई कारक हैं। औद्योगिक उत्सर्जन, वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, निर्माण और सड़क की धूल इसके प्रमुख स्रोत हैं। खाना पकाने और गर्म करने के लिए ठोस ईंधन का उपयोग, फसल अवशेष जलाना, और कचरा जलाना भी इसमें योगदान करते हैं।
- औद्योगिक इकाइयाँ प्रदूषण का बड़ा कारण हैं।
- निर्माण गतिविधियों से धूल और प्रदूषण फैलता है।
- कोयला आधारित बिजली संयंत्र प्रदूषक उत्सर्जित करते हैं।
सार्वजनिक परिवहन की कमी: एक बड़ी विफलता
भारत में मोटरीकरण शुरुआती चरणों में है, लेकिन यह तेजी से बढ़ रहा है। सरकारें निजी वाहनों की बढ़ती संख्या को रोकने में विफल रही हैं। पर्याप्त, सुरक्षित, आरामदायक और किफायती सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना उनकी बड़ी विफलता रही है। दिल्ली में बसों की संख्या लगातार घट रही है।
- दिल्ली में बसों की संख्या बहुत कम है।
- मेट्रो महंगी और कनेक्टिविटी में कमजोर है।
- नागरिक निजी वाहनों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।
आगे की राह: स्थायी समाधान की ओर
पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगाने से अच्छे दृष्टिकोण मिल सकते हैं, लेकिन यह एक खराब नीतिगत विकल्प है। विश्वसनीय सार्वजनिक परिवहन के अभाव में, निजी वाहन अधिकांश भारतीयों के लिए डिफ़ॉल्ट विकल्प बन जाते हैं। दिल्ली को एक हज़ार किलोमीटर मेट्रो नेटवर्क की आवश्यकता है।
- विश्वस्तरीय सार्वजनिक परिवहन अत्यंत आवश्यक है।
- किराये में कमी करके मेट्रो को सुलभ बनाएँ।
- एनएमटी अवसंरचना का विकास ज़रूरी है।



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