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नवी मुंबई जमीन घोटाला: सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर पर ED की बड़ी कार्रवाई

सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर

सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई जोनल ऑफिस ने नवी मुंबई में सरकारी फॉरेस्ट लैंड के अवैध अधिग्रहण और उसके मोनेटाइजेशन से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में एक बड़ा कदम उठाया है।

सोमवार को मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, एजेंसी ने पनवेल और नवी मुंबई के इलाकों में लगभग ₹17.74 करोड़ की तीन अचल संपत्तियों को प्रोविजनल रूप से अटैच कर लिया है।

यह पूरी कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के सख्त प्रावधानों के तहत की गई है, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के जरिए अर्जित संपत्ति पर प्रहार करती है।

नवी मुंबई के उरण और उल्वे में ED का शिकंजा

यह अटैचमेंट 4 फरवरी को अमल में लाया गया, जिसमें उरण और उल्वे जैसे महंगे और रणनीतिक क्षेत्रों में स्थित जमीन के टुकड़े शामिल हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन जमीनों के मालिक कथित तौर पर जे. एम. म्हात्रे और उनकी पत्नी हैं।

ED का आरोप है कि यह मामला न केवल जंगल की जमीन के अवैध कब्जे से जुड़ा है, बल्कि इसे नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को ट्रांसफर करके सरकार से भारी-भरकम मुआवजा ऐंठने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।

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वहल गांव की 152 हेक्टेयर जमीन का पूरा विवाद

इस मनी लॉन्ड्रिंग केस की जड़ें रायगढ़ जिले के पनवेल तालुका के मौजे वहल गांव में छिपी हैं। विवाद का मुख्य केंद्र सर्वे नंबर 427/1 (41.70 हेक्टेयर) और 436/1 (110.60 हेक्टेयर) की जमीन है।

यह जमीन मूल रूप से ‘प्राइवेट फॉरेस्ट’ के रूप में वर्गीकृत थी, जिसे महाराष्ट्र सरकार ने 1975 में ‘महाराष्ट्र प्राइवेट फॉरेस्ट्स (एक्विजिशन) एक्ट’ के तहत अधिग्रहित किया था। अधिग्रहण के पश्चात, राजस्व विभाग के आधिकारिक 7/12 रिकॉर्ड में मालिकाना हक स्पष्ट रूप से फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के नाम दर्ज किया गया था।

म्यूटेशन एंट्री और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर का खुलासा

ED की जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि जमीन के इन आधिकारिक दस्तावेजों के साथ बाद के वर्षों में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गई। सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर के जरिए फॉरेस्ट डिपार्टमेंट का नाम हटाकर अवैध तरीके से आरोपियों के नाम दर्ज कर दिए गए।

इसी फर्जीवाड़े की नींव पर आरोपियों ने खुद को जमीन का असली मालिक घोषित किया और बाद में इसी जमीन के हिस्सों को एक नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट के लिए NHAI को ट्रांसफर कर दिया। सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर की इस प्रक्रिया ने ही अवैध मुआवजे के दावे का रास्ता साफ किया।

₹42.4 करोड़ का मुआवजा और मनी लॉन्ड्रिंग का जाल

एजेंसी का दावा है कि इन जाली मालिकाना हक के दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों ने कुल ₹52 करोड़ के अनुमानित मुआवजे में से ₹42.4 करोड़ की राशि प्राप्त की। म्हात्रे और उनके सहयोगियों पर आरोप है कि उन्होंने इस ‘क्राइम के पैसे’ को कई चैनलों के माध्यम से लॉन्डर किया।

जांच में पता चला कि इस धन का इस्तेमाल नई अचल संपत्तियां खरीदने, पुराने लोन चुकाने और म्हात्रे की रियल एस्टेट कंपनियों जैसे JMMIPL और JMM होम्स के व्यावसायिक खर्चों को पूरा करने के लिए किया गया। इसके अलावा, एक बड़ा हिस्सा परिवार के सदस्यों को भी ट्रांसफर किया गया।

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पूर्व नगर निगम प्रमुख जेएम म्हात्रे पर गंभीर आरोप

जेएम म्हात्रे, जो पनवेल म्युनिसिपल काउंसिल के पूर्व प्रेसिडेंट रह चुके हैं, इस पूरे मामले के केंद्र में हैं। म्हात्रे का राजनीतिक करियर काफी लंबा रहा है, वे लगभग चार दशकों तक पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी से जुड़े रहे और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए।

हालांकि, इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए म्हात्रे ने कहा कि उन्हें हालिया अटैचमेंट की जानकारी नहीं थी। यह मामला पनवेल पुलिस द्वारा दर्ज उस FIR से उपजा है, जो फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने म्हात्रे और एस. कादरी (अब मृत) के खिलाफ दर्ज कराई थी।

अब तक ₹69.47 करोड़ की संपत्ति हो चुकी है ज़ब्त

ED इस मामले में लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। इससे पहले 17 जून, 2025 को मुंबई और नवी मुंबई के कई ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया था, जिसमें ₹16.5 लाख कैश और ₹43.78 करोड़ के बैंक बैलेंस व फिक्स्ड डिपॉजिट को फ्रीज किया गया था।

इसके बाद 12 जनवरी, 2026 को ₹7.10 करोड़ की पांच अन्य संपत्तियां कुर्क की गई थीं। सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर से शुरू हुए इस घोटाले में अब तक कुल ₹69.47 करोड़ की संपत्ति की पहचान कर उसे अटैच, सीज या फ्रीज किया जा चुका है।

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भविष्य की जांच और अन्य लाभार्थियों की तलाश

प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों का कहना है कि यह अटैचमेंट अपराध की कमाई को और खपाने से रोकने के लिए किया गया है। एजेंसी अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या इस सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर के पीछे कुछ सरकारी अधिकारियों की भी मिलीभगत थी।

फंड ट्रेल की जांच जारी है ताकि इस घोटाले के अन्य लाभार्थियों और अवैध तरीके से खरीदी गई और अधिक संपत्तियों का पता लगाया जा सके। यह कार्रवाई भू-माफियाओं और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों के लिए एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखी जा रही है।

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