“मुंबई PMO फर्जी अधिकारी ” रोहन पारेख 11 सितंबर तक पुलिस कस्टडी में
मुंबई PMO फर्जी अधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई दौरे और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्थित जियो वर्ल्ड सेंटर में आयोजित ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026’ के उद्घाटन कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले सुरक्षा में गंभीर चूक का मामला सामने आया है।
मुंबई पुलिस ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का अधिकारी बताने वाले 24 वर्षीय युवक रोहन पारेख और उसके हथियारबंद बॉडीगार्ड दिलीप कुंडे को गिरफ्तार कर लिया है।
अदालत ने आरोपी रोहन पारेख को 11 सितंबर 2026 तक पुलिस हिरासत (Police Custody) में भेज दिया है। मुंबई क्राइम ब्रांच और बीकेसी पुलिस स्टेशन की टीम इस पूरे हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़े की विस्तृत जांच कर रही है।
मेटल डिटेक्टर चेकिंग के दौरान पकड़ा गया हथियारबंद बॉडीगार्ड
पुलिस जांच के अनुसार, यह घटना सोमवार को घटी जब प्रधानमंत्री के दौरे से पूर्व जियो वर्ल्ड प्लाजा/एनएमएसीसी परिसर में तैयारियों का जायजा लिया जा रहा था। रोहन पारेख पहले ही परिसर में दाखिल हो चुका था।
कुछ देर बाद उसका लगभग 40 वर्षीय बॉडीगार्ड दिलीप कुंडे जब एंट्रेंस गेट पर लगे डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD) से गुजरा, तो उसके पास पिस्टल पाई गई।
सुरक्षाकर्मियों द्वारा रोके जाने पर बॉडीगार्ड ने रोहन पारेख को फोन कर बाहर बुलाया। पारेख ने गेट पर तैनात सुरक्षा अधिकारियों को खुद को PMO का ‘ग्रेड-सी’ अधिकारी बताते हुए एक डिजिटल पहचान पत्र (Screenshot ID) दिखाया।
हालांकि, कार्ड पर जारी करने की तिथि तो अंकित थी लेकिन उसकी वैधता (Validity Date) और जारीकर्ता का पदनाम (Designation) गायब था। संदेह होने पर सुरक्षाकर्मियों ने दोनों को हिरासत में लेकर मुंबई पुलिस को सौंप दिया।
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वकील का अनोखा दावा: ‘रोहन पारेख खुद ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हुआ’
मुंबई की एक स्थानीय अदालत में सुनवाई के दौरान रोहन पारेख के वकील ने चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि उनका मुवक्किल किसी फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड नहीं, बल्कि खुद एक बड़ी ऑनलाइन धोखाधड़ी (Cyber Fraud) का शिकार है।
बचाव पक्ष की मुख्य दलीलें:
नकली जॉइनिंग और लेटर: पारेख को ‘तरुण कपूर’ नामक व्यक्ति से PMO में नौकरी का ऑफर मिला था। उसे प्रधानमंत्री के कथित हस्ताक्षरों वाला एक लेटर, ‘प्राइम मिनिस्टर के एडिशनल सेक्रेटरी’ की ओर से ईमेल और ‘डिफेंस एक्विजिशन पॉलिसी’ से जुड़े दस्तावेज भेजे गए थे।
स्क्रीनशॉट आईडी: पारेख को कभी भी पीएमओ का ओरिजिनल कार्ड नहीं मिला, बल्कि व्हाट्सएप पर एक स्क्रीनशॉट भेजा गया था, जिसे उसने असली मान लिया था।
बॉडीगार्ड रखने का निर्देश: पारेख को फर्जी अधिकारियों द्वारा ही सुरक्षा के लिए 2024 के अंत तक एक पर्सनल बॉडीगार्ड रखने का निर्देश दिया गया था। बॉडीगार्ड दिलीप कुंडे के पास मौजूद बंदूक लाइसेंसी पाई गई है।
परफ्यूम खरीदने गया था आरोपी: वकील ने दावा किया कि बीएससी (गणित व विज्ञान) पास पारेख पीएम मोदी के दौरे से एक दिन पहले पर्सनल काम से जियो वर्ल्ड प्लाजा में अपनी मंगेतर के लिए परफ्यूम खरीदने गया था, न कि किसी साजिश के तहत।
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पुलिस का रुख और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत FIR
मुंबई पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह घटना पीएम मोदी के निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले घटी थी और इसका प्रधानमंत्री की वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था में कोई सीधा व्यवधान नहीं था।
BKC पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत सरकारी कर्मचारी का स्वांग रचने, धोखाधड़ी करने और बिना अनुमति हथियार के साथ प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने का मामला दर्ज किया गया है।
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पुलिस अब उस तीसरे संदिग्ध व्यक्ति (तरुण कपूर) की तलाश कर रही है जिसने रोहन पारेख को फर्जी ऑफर लेटर जारी किए थे। हाल ही में सामने आए मुंबई PMO फर्जी अधिकारी से जुड़े मामले ने प्रशासनिक सतर्कता और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मुस्तैद कर दिया है।
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