मनमानी फीस वृद्धि पर रोक, दिल्ली सरकार का नया विधेयक
दिल्ली सरकार ने मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लगाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार का स्कूलों के लिए संदेश बहुत स्पष्ट है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा एक सेवा है, व्यवसाय नहीं। अगर आप मुनाफ़ा कमाने की नियत से आते हैं, तो दिल्ली आपको वह अवसर नहीं देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दें और वैध खर्चों के लिए फीस लें।
- दिल्ली में शिक्षा एक सेवा है, व्यवसाय नहीं।
- सरकार मुनाफा कमाने वाले संस्थानों को अवसर नहीं देगी।
- विधेयक से फीस में पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी।
पिछली सरकार पर निशाना और नए विधेयक का परिचय
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पिछली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आप सरकार निजी स्कूलों से पीड़ित छात्रों और अभिभावकों के लिए कुछ नहीं कर पाई। यह विधेयक 2025 में विधानसभा में पेश किया गया है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह विधेयक एक व्यापक ढाँचा स्थापित करता है।
- भाजपा सरकार ने वह किया जो आप सरकार नहीं कर सकी।
- नया विधेयक फीस विनियमन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- यह पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए है।
विधेयक का उद्देश्य और त्रि-स्तरीय तंत्
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने विधेयक का उद्देश्य साफ किया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य निजी स्कूलों की फीस को नियंत्रित करना है। यह विधेयक अनियंत्रित बढ़ोतरी से निपटेगा और पारदर्शिता बढ़ाएगा। यह विधेयक अनियंत्रित बढ़ोतरी से निपटेगा और पारदर्शिता बढ़ाएगा।
- विधेयक निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर अंकुश लगाएगा।
- एक पारदर्शी और समावेशी त्रि-स्तरीय तंत्र का प्रस्ताव है।
- यह तंत्र फीस संबंधी मामलों का निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित करेगा।
जुर्माने और सख्त कार्रवाई का प्रावधान
विधेयक में फीस न देने पर दंडात्मक कार्रवाई पर रोक है। हालांकि, नियम उल्लंघन पर सख्त जुर्माने का प्रावधान है। यह विधेयक सुनिश्चित करेगा कि स्कूल नियमों का पालन करें। मंत्री ने कहा कि व्यापक उल्लंघन पर ₹10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। शिक्षा निदेशक को स्कूल का प्रबंधन संभालने का भी अधिकार है।
- उल्लंघन करने पर प्रति छात्र ₹50,000 का जुर्माना लगेगा।
- 20 दिनों बाद जुर्माना बढ़कर दोगुना और फिर तीन गुना हो जाएगा।
- गंभीर मामलों में मान्यता रद्द या प्रबंधन सरकार के हाथ में।
सभी निजी स्कूलों पर अब लागू होंगे फीस नियम
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब तक कुछ स्कूलों पर ही फीस नियम लागू थे। अब दिल्ली के सभी 1,443 निजी स्कूलों पर ये नियम लागू होंगे। उन्होंने कहा कि यह विधेयक एक निष्क्रिय ढांचे की जगह एक सक्रिय ढांचा लाता है। यह विधेयक अभिभावकों से एक वादा है।
- पहले सिर्फ 350 स्कूलों पर फीस नियम लागू थे।
- अब यह विनियमन सभी निजी स्कूलों पर लागू होगा।
- विधेयक अनियंत्रित मुनाफाखोरी पर अंत करेगा।
आप का आरोप और सरकार का जवाब
आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने विधेयक की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक 350 से ज़्यादा निजी स्कूलों को बचाना चाहता है। ये स्कूल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों से बचना चाहते हैं। मंत्री ने कहा कि नए विधेयक में अनिवार्य ऑडिट और सशक्त अभिभावक समितियां हैं। ये प्रावधान अब तक नियामक ढांचे का हिस्सा नहीं थे।
- आप ने आरोप लगाया कि विधेयक ध्यान भटकाने वाला है।
- सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह विधेयक अवैध फीस वृद्धि को वैध करेगा।
- उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून पहले से ही फीस पर निगरानी रखते हैं।
हितधारकों की प्रतिक्रिया और विधेयक का भविष्य
नेशनल प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस की अध्यक्ष आशा प्रभाकर ने कहा कि स्कूलों की परिचालन लागत बढ़ती है। करण अग्रवाल जैसे अभिभावकों को मनमानी फीस वृद्धि पर रोक से राहत की उम्मीद है। दिल्ली अभिभावक संघ की अध्यक्ष अपराजिता गौतम ने भी विधेयक पर अपनी राय दी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह विधेयक सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है। यह मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- स्कूलों की परिचालन लागत हर साल बढ़ रही है।
- अभिभावकों को उम्मीद है कि नया कानून लागू होगा।
- प्ले स्कूलों को भी विधेयक में शामिल करना चाहिए।



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