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सोने की कीमत गिरी: दिल्ली, मुंबई समेत जानें प्रमुख शहर का ताजा भाव

सोने की कीमत गिरी

सोने की कीमत गिरी है और यह खबर उन करोड़ों भारतीयों के लिए किसी राहत से कम नहीं है जो शादियों के सीजन के लिए आभूषण खरीदने की योजना बना रहे थे। गुरुवार, 26 फरवरी 2026 को घरेलू बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सक्रिय निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली को माना जा रहा है।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की कमजोरी के बावजूद भारतीय बाजारों में सोने के दाम गिरे हैं, जिससे यह साफ होता है कि स्थानीय मांग और घरेलू सट्टेबाजी का असर कीमतों पर ज्यादा गहरा रहा है।

पिछले कुछ हफ्तों से सोने की कीमतें अपने उच्चतम स्तर के करीब मंडरा रही थीं, लेकिन आज की गिरावट ने बाजार को थोड़ा ‘कूल डाउन’ किया है, जो मिडिल क्लास परिवारों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

एमसीएक्स (MCX) पर भारी गिरावट: वायदा बाजार में 60,600 रुपये के नीचे पहुंचा सोना

आज वायदा बाजार में सोने के कारोबार में काफी सुस्ती देखी गई और कीमतों में प्रति 10 ग्राम 60 रुपये से अधिक की गिरावट आई। मनी रेडिफ की रिपोर्ट के अनुसार, सोने का वायदा भाव लुढ़ककर 60,606 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। यह गिरावट दर्शाती है कि बड़े ट्रेडर्स अब मौजूदा भाव पर अपनी पोजीशन को हल्का कर रहे हैं और ऊंचे स्तरों पर मुनाफा वसूलने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

सोने की कीमत गिरी होने के बावजूद बाजार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट स्थाई नहीं है, क्योंकि ग्लोबल अनिश्चितताएं और केंद्रीय बैंकों की नीतियां अभी भी सोने को लंबी अवधि के लिए एक सुरक्षित निवेश का जरिया बनाए हुए हैं। जो लोग इंट्रा-डे ट्रेडिंग करते हैं, उनके लिए आज का दिन काफी अस्थिर रहा, क्योंकि भावों में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहा।

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शहरों का हाल: दिल्ली से लेकर चेन्नई तक कहां कितना सस्ता हुआ सोना?

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, देश के विभिन्न महानगरों में सोने की कीमतों में मामूली अंतर देखा गया है, जो स्थानीय करों और मेकिंग चार्जेस के कारण होता है। दिल्ली में आज 24 कैरेट सोने की कीमत में गिरावट के बाद ग्राहकों को थोड़ी राहत मिली है, वहीं मुंबई और बैंगलोर जैसे शहरों में भी कीमतें गिरी हैं।

चेन्नई और हैदराबाद जैसे दक्षिण भारतीय शहरों में, जहाँ सोने की खपत सबसे ज्यादा होती है, वहां भी रिटेल ज्वेलर्स ने अपने रेट्स में कटौती की है। कोलकाता और अहमदाबाद जैसे व्यापारिक केंद्रों में सोने के भावों में आई इस नरमी ने सर्राफा बाजारों में हलचल बढ़ा दी है। ग्राहक अब ज्वेलरी स्टोर्स पर पहुंच रहे हैं ताकि वे इस छोटी सी गिरावट का फायदा उठा सकें और आने वाले शुभ मुहूर्त के लिए अपने पसंदीदा आभूषण बुक कर सकें।

मुनाफावसूली का असर: आखिर क्यों लुढ़के सोने के दाम?

बाजार में इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण ‘प्रॉफिट बुकिंग’ है। जब सोने के भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुँच जाते हैं, तो निवेशक अपने निवेश को नकदी में बदलने लगते हैं ताकि वे अपने लाभ को सुरक्षित कर सकें।

एमएसएन की रिपोर्ट बताती है कि ग्लोबल मार्केट में कमजोर डॉलर ने नुकसान को थोड़ा सीमित जरूर किया, लेकिन घरेलू स्तर पर बिक्री का दबाव ज्यादा था। सोने की कीमत गिरी क्योंकि ट्रेडर्स को लग रहा है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में सोने में और बड़ी तेजी आने से पहले थोड़ा सुधार (Correction) होना जरूरी है। इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट में चल रही भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं भी निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर कर रही हैं, जिससे वे एक साथ बड़ी खरीदारी करने से बच रहे हैं।

चांदी की कीमतों में भी नरमी: इंडस्ट्रियल डिमांड पर क्या होगा असर?

सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखी गई है, जो औद्योगिक क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। चांदी का उपयोग केवल गहनों में ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर पैनल जैसे आधुनिक उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर होता है। एनडीटीवी के अनुसार, चांदी की कीमतों में आई कमी मुनाफावसूली का ही परिणाम है।

हालांकि, लंबे समय में चांदी की औद्योगिक मांग मजबूत बनी रहने की उम्मीद है, जिससे इसकी कीमतों को सहारा मिल सकता है। आज की गिरावट के बाद चांदी के भावों में जो सुधार दिखा है, वह उन छोटे निवेशकों के लिए फायदेमंद हो सकता है जो सोने के महंगे होने के कारण चांदी में निवेश करना पसंद करते हैं।

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जेन-जी और मिलेनियल्स के लिए निवेश का सबक: डिजिटल गोल्ड बनाम फिजिकल गोल्ड

आज की नई पीढ़ी यानी जेन-जी और मिलेनियल्स निवेश के मामले में काफी स्मार्ट हो गए हैं। उनके लिए सोने की कीमत गिरी होना केवल गहने खरीदने का मौका नहीं है, बल्कि डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ (ETF) में एंट्री करने का एक रणनीतिक समय है।

युवा अब भारी-भरकम गहने पहनने के बजाय सोने को एक डिजिटल एसेट के रूप में देखना पसंद करते हैं, जहाँ वे 100 रुपये जैसी छोटी राशि से भी शुरुआत कर सकते हैं।

सोशल मीडिया पर भी ‘गोल्ड इन्वेस्टिंग’ को लेकर मीम्स और इन्फोर्मेटिव रील्स की बाढ़ आ गई है, जहाँ एक्सपर्ट्स यह समझा रहे हैं कि पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन के लिए सोने की गिरावट का उपयोग कैसे किया जाए। युवाओं के लिए सोना अब एक ‘स्टेटस सिंबल’ से ज्यादा एक ‘इंफ्लेशन हेज’ (महंगाई से बचाव) का हथियार बन गया है।

बाजार विशेषज्ञों की राय: क्या आगे और गिरेंगे सोने के भाव?

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में यह गिरावट एक अस्थायी घटना हो सकती है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आने वाली ब्याज दर नीतियों और वैश्विक मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। यदि ब्याज दरें स्थिर रहती हैं या उनमें कटौती होती है, तो सोने की कीमतों में फिर से उछाल आ सकता है।

बाजार के विश्लेषक सलाह दे रहे हैं कि निवेशकों को ‘बाय ऑन डिप्स’ यानी गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए। वर्तमान में सोने के लिए 60,000 से 60,200 रुपये का स्तर एक मजबूत सपोर्ट जोन की तरह काम कर सकता है।

जब तक कोई बड़ा वैश्विक संकट नहीं आता, तब तक सोने की कीमतों में इसी तरह का छोटा-मोटा सुधार देखने को मिलता रहेगा, जो दीर्घकालिक निवेशकों के लिए फायदेमंद है।

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सोने की चमक बरकरार, बस खरीदारी की टाइमिंग है जरूरी

अंततः, सोने की कीमतों में आई यह गिरावट भारतीय बाजार की एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। सोने की कीमत गिरी है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि पीली धातु का आकर्षण कम हो गया है। भारतीय परिवारों के लिए सोना केवल धन का प्रतीक नहीं, बल्कि भावनात्मक सुरक्षा भी है।

एक वरिष्ठ संपादक के रूप में मेरा सुझाव है कि यदि आप शादी या निवेश के लिए सोना खरीदना चाहते हैं, तो इस तरह की छोटी गिरावटों का लाभ उठाएं और धीरे-धीरे खरीदारी करें।

बाजार की अनिश्चितताओं को देखते हुए, एक बार में सारा पैसा लगाने के बजाय टुकड़ों में निवेश करना हमेशा समझदारी भरा होता है। सोने की चमक हमेशा की तरह बरकरार रहने वाली है, बस आपको अपनी खरीदारी की टाइमिंग और बाजार के संकेतों को पहचानने की जरूरत है।

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