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जीएसटी सुधार: उद्योग जगत से चर्चा के बाद लागू होंगे बदलाव

उद्योग जगत से चर्चा

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में हाल ही में हुए ऐतिहासिक सुधारों के बाद, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने इनके सुचारु कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है। सीबीआईसी प्रमुख संजय कुमार अग्रवाल बुधवार से उद्योग मंडलों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के साथ सिलसिलेवार उद्योग जगत से चर्चा कर रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य इन सुधारों को सुगमता से लागू करना, तकनीकी प्रश्नों को हल करना और सुधार उपायों के बारे में व्यापक जागरूकता फैलाना है।

जीएसटी परिषद का ऐतिहासिक निर्णय: दो-स्तरीय संरचना की ओर

जीएसटी परिषद ने अपनी 56वीं बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया, जिसके तहत जीएसटी को वर्तमान की चार-स्तरीय (5, 12, 18, और 28 प्रतिशत) व्यवस्था से हटाकर 5 और 18 प्रतिशत की दो-स्तरीय संरचना में बदला जाएगा। इस नए ढांचे में क्षतिपूर्ति उपकर भी शामिल होगा। ये नई दरें 22 सितंबर से प्रभावी होंगी। यह निर्णय एक बड़े प्रक्रियागत सुधार का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सिर्फ़ राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रणाली को सरल और कुशल बनाना है।

विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से बैठकें

सीबीआईसी प्रमुख ने इन सुधारों के कार्यान्वयन पर चर्चा करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत बैठकें निर्धारित की हैं। 10 सितंबर को उन्होंने एसोचैम, फिक्की, सीआईआई और पीएचडीसीसीआई जैसे प्रमुख व्यापार निकायों के साथ चर्चा की। इस दिन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, एफएमसीजी, आम आदमी की वस्तुओं, हस्तशिल्प, खेल के सामान, खिलौने, विविध और चिकित्सा/फार्मा क्षेत्रों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

इसके बाद, 11 सितंबर को, सीबीआईसी प्रमुख ने आतिथ्य, नवीकरणीय ऊर्जा, निर्माण और फाइबर एवं कपड़ा संघ के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। 12 सितंबर को, ऑटोमोबाइल और परिवहन क्षेत्र, चमड़ा, खाद्य, बीमा और कृषि क्षेत्र के विभिन्न संघों के साथ एक बैठक निर्धारित की गई है। इस तरह, सभी प्रमुख क्षेत्रों को शामिल करके उद्योग जगत से चर्चा के माध्यम से फीडबैक लिया जा रहा है ताकि कार्यान्वयन में आने वाली किसी भी संभावित बाधा को दूर किया जा सके।

18 महीने की तैयारी, अब कार्यान्वयन की बारी

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में बताया कि जीएसटी स्लैब में कमी और युक्तिसंगत बनाने पर पिछले 18 महीनों से विचार-विमर्श चल रहा था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सुधार अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित 50 प्रतिशत टैरिफ की प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि घरेलू मांग को बढ़ावा देने और आम लोगों को राहत देने के उद्देश्य से किया गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले केंद्रीय बजट से पहले ही इस पर ध्यान केंद्रित करने को कहा था। यह योजना आकार लेने में समय लगा, और मई में इसे औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री के सामने प्रस्तुत किया गया।

राज्यों को सहमत करना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन सीतारमण के अनुसार, जीएसटी परिषद की बैठक में एक ही दिन में सर्वसम्मति से निर्णय हो गया। उन्होंने कहा कि राज्यों के वित्त मंत्री दरों को युक्तिसंगत बनाने के समर्थक थे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर का उपयोग अब कोविड-19 के दौरान राज्यों द्वारा लिए गए ऋणों को चुकाने में किया जा रहा है, और सरकार का लक्ष्य कर संग्रह दक्षता में सुधार करना है ताकि भविष्य में केंद्र से मिलने वाले भुगतान पर निर्भरता कम हो सके।

इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा

इन सुधारों का उद्देश्य भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को मजबूत करना और ‘डिजिटल इंडिया‘ व ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहलों को समर्थन देना है। कई उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और आईसीटी हार्डवेयर पर जीएसटी दरें 28% से घटाकर 18% कर दी गई हैं, जिससे एयर कंडीशनर, डिशवॉशर, बड़े स्क्रीन वाले टीवी, मॉनिटर और प्रोजेक्टर जैसे उत्पाद अधिक किफायती हो गए हैं। इससे स्थानीय निर्माताओं और एमएसएमई को भी लाभ होगा।

इसके अलावा, ये सुधार नवीकरणीय ऊर्जा को भी बढ़ावा देते हैं। सौर फोटोवोल्टिक सेल और संबंधित उपकरणों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है, जिससे ऊर्जा को अपनाने की लागत कम हो गई है। कम्पोस्टिंग मशीनों पर भी अब 5% जीएसटी लगेगा, जो अपशिष्ट से ऊर्जा समाधानों को प्रोत्साहित करेगा। आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वॉकी-टॉकी पर भी जीएसटी 12% से घटाकर 5% किया गया है।

प्रक्रियागत सुधार और भविष्य की दिशा

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने कहा कि जीएसटी 2.0 का नया ढांचा मुख्य रूप से एक प्रक्रियागत सुधार है, जिसका लक्ष्य दक्षता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के बाद भारत की राजकोषीय प्रणाली के मजबूत होने तक इस तरह के सुधारों के लिए इंतजार करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि “जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया में इंस्पेक्टर राज वापस आ गया है,” लेकिन अब इस ढांचे को साफ कर दिया गया है। सान्याल ने कहा कि जीएसटी उद्योग जगत से चर्चा के बाद लागू होगा, यह दिखाता है कि सरकार सभी हितधारकों को साथ लेकर चल रही है। उन्होंने जोर दिया कि भारत को सुचारू शासन और व्यावसायिक सुगमता सुनिश्चित करने के लिए “एक हजार प्रक्रियागत सुधारों” की आवश्यकता है। इन सुधारों से रोज़मर्रा की ज़रूरतों की चीज़ों जैसे घी, मक्खन, रोटी, शैम्पू, हेयर ऑयल और टूथपेस्ट पर कर कम हो गया है।

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