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गुवाहाटी हाई कोर्ट स्थानांतरण विवाद: CJI ने रखी आधुनिक परिसर की नींव

गुवाहाटी हाई कोर्ट विवाद

गुवाहाटी हाई कोर्ट विवाद भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने रविवार, 11 जनवरी 2026 को असम के कामरूप जिले के उत्तरी गुवाहाटी स्थित रंगमहल में एक महत्वाकांक्षी ‘इंटीग्रेटेड ज्यूडिशियल कोर्ट कॉम्प्लेक्स’ की आधारशिला रखी। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि “निजी स्वार्थ” नए इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास का विरोध करने का वैध आधार नहीं होना चाहिए।

CJI ने उजान बाजार से कोर्ट को शिफ्ट करने का विरोध कर रहे वकीलों के रुख पर हैरानी जताते हुए स्पष्ट किया कि भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए यह कदम अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कानून कभी भी आम जनता के लिए दूर, डरावना या पहुंच से बाहर नहीं लगना चाहिए।

भविष्य की आकांक्षाओं के अनुरूप आधुनिक न्यायिक शहर की परिकल्पना

रंगमहल में बनने वाला यह नया एकीकृत न्यायिक परिसर केवल एक इमारत नहीं, बल्कि भविष्य की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। CJI ने शिलान्यास के बाद संबोधित करते हुए कहा कि यह कॉम्प्लेक्स संवैधानिक गारंटी की पुष्टि है कि न्याय सुलभ होना चाहिए।

गुवाहाटी हाई कोर्ट स्थानांतरण विवाद के बीच यह स्पष्ट किया गया कि नया परिसर 128 बीघा (42 एकड़ से अधिक) के विशाल क्षेत्र में फैला होगा। इसके पहले चरण के निर्माण पर ₹479 करोड़ की लागत आएगी, जिसमें 31 अत्याधुनिक कोर्टरूम बनाए जाएंगे। यह परिसर न केवल असम बल्कि अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिजोरम के न्यायिक मामलों के लिए भी एक केंद्रीय केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

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बार एसोसिएशन का विरोध और उजान बाजार की ऐतिहासिक विरासत

वर्तमान में गुवाहाटी हाई कोर्ट ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी किनारे पर उजान बाजार में स्थित है। यहाँ एक ऐतिहासिक इमारत के साथ-साथ करोड़ों की लागत वाली आधुनिक मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग भी है, जो एस्केलेटर वाली अंडरग्राउंड टनल से जुड़ी है। हालांकि, असम सरकार ब्रह्मपुत्र रिवरफ्रंट को विकसित करना चाहती है, जिसके लिए उसे हाई कोर्ट की जमीन की आवश्यकता है।

इसी को लेकर गुवाहाटी हाई कोर्ट स्थानांतरण विवाद गहरा गया है। गुवाहाटी हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (GHCBA) के लगभग 1,300 वकीलों ने इस स्थानांतरण का कड़ा विरोध किया है। उनका तर्क है कि शहर के बीचों-बीच से कोर्ट को 10-15 किलोमीटर दूर ले जाने से वादकारियों पर लॉजिस्टिक्स का बोझ बढ़ेगा और न्याय तक पहुंच प्रभावित होगी।

CJI की दोटूक: निजी स्वार्थ बनाम भविष्य का बुनियादी ढांचा

CJI सूर्यकांत ने बार एसोसिएशन के विरोध को लेकर अपनी नाराजगी साझा करते हुए कहा कि वे वकीलों की इस प्रतिक्रिया से हैरान हैं। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले या तो गलत जानकारी रखते हैं या वे नए सदस्यों की जरूरतों को नहीं समझ रहे हैं।

CJI के अनुसार, “सिर्फ इसलिए कि पुराने कॉम्प्लेक्स के पास आपका एक अच्छा ऑफिस है, आप एक आधुनिक और भविष्यवादी इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में बाधा नहीं डाल सकते।” उन्होंने राज्य सरकार और मुख्य न्यायाधीश से अपील की कि नए कॉम्प्लेक्स में हर युवा वकील को, चाहे उसकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो, अभ्यास के लिए पर्याप्त जगह मिलनी चाहिए।

भव्य ज्यूडिशियल टाउनशिप और करोड़ों का निवेश

सरकार की योजना रंगमहल में कुल 148 बीघा (लगभग 49 एकड़) जमीन पर एक संपूर्ण ‘ज्यूडिशियल टाउनशिप’ विकसित करने की है। पहले चरण में हाई कोर्ट के लिए ₹479 करोड़ मंजूर किए गए हैं, जबकि दूसरे चरण में ₹1,227 करोड़ की लागत से जिला न्यायालय परिसर बनाया जाएगा, जिसमें 65 कोर्टरूम होंगे।

अधिकारियों ने बताया कि यह टाउनशिप न्यायिक दक्षता में सुधार लाएगी। गुवाहाटी हाई कोर्ट स्थानांतरण विवाद के साये में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट में 900 कारों और 400 दोपहिया वाहनों की पार्किंग, उन्नत सुरक्षा व्यवस्था, अग्नि सुरक्षा और आपदा प्रतिरोधी डिजाइन जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल की गई हैं।

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बार एसोसिएशन की भूख हड़ताल और बहिष्कार का फैसला

GHCBA ने अपनी मांगों को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए शिलान्यास समारोह का बहिष्कार किया। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष शांतनु बोरठाकुर के नेतृत्व में वकीलों ने पुरानी कोर्ट बिल्डिंग के सामने चार घंटे की भूख हड़ताल की। बोरठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना हितधारकों से चर्चा किए एकतरफा फैसला लिया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि एसोसिएशन की कार्यकारी समिति जल्द ही बैठक करेगी और इस स्थानांतरण को कोर्ट में चुनौती देने पर विचार कर सकती है। वकीलों का मानना है कि दूर-दराज के जिलों से आने वाले मुवक्किलों के लिए रंगमहल तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती होगी।

सत्ता और न्यायपालिका का साझा मंच: विकास की प्रतिबद्धता

इस गरिमामय समारोह में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, और मणिपुर, मेघालय तथा त्रिपुरा के मुख्य न्यायाधीश भी उपस्थित थे। असम के एडवोकेट जनरल देवजीत सैकिया ने वकीलों के विरोध की आलोचना करते हुए इसमें राजनीतिक सांठगांठ होने का दावा किया।

मुख्यमंत्री सरमा ने इस परियोजना को राज्य के न्यायिक इतिहास का मील का पत्थर बताया। गुवाहाटी हाई कोर्ट स्थानांतरण विवाद के बावजूद, सरकार और न्यायपालिका के प्रमुखों ने साफ कर दिया है कि आधुनिक सुविधाएं और एक छत के नीचे सभी न्यायिक सेवाओं का एकीकरण ही समय की मांग है।

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कनेक्टिविटी और सुलभ न्याय का नया अध्याय

नए परिसर की सभी इमारतें आधुनिक पुलों से जुड़ी होंगी, जिससे न्यायाधीशों, वकीलों और आम जनता के लिए आवाजाही सुगम होगी। CJI ने दोहराया कि देश की न्यायपालिका के प्रमुख के तौर पर वह इस पेशे में आने वाले युवाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए बाध्य हैं।

उन्होंने उम्मीद जताई कि विरोध कर रहे सदस्य अंततः इस परियोजना के व्यापक लाभ को समझेंगे। यह ज्यूडिशियल टाउनशिप न केवल स्थापत्य का एक नमूना होगी, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण होगी कि न्याय प्रणाली समग्र रूप से कैसे सशक्त होती है, जिससे कानून की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित हो सके।

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