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ब्राज़ील प्रेसिडेंट का भारत दौरा: लूला और मोदी के बीच होंगे बड़े समझौते

ब्राज़ील प्रेसिडेंट का भारत दौरा

ब्राज़ील प्रेसिडेंट का भारत दौरा अगले हफ्ते 18 फरवरी से शुरू होने जा रहा है, जो दोनों देशों के बीच भविष्य के रिश्तों की नई इबारत लिखेगा। ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष निमंत्रण पर भारत आ रहे हैं। इस पांच दिवसीय राजकीय यात्रा का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल के बीच रक्षा और व्यापार सहयोग को बढ़ावा देना और दुनिया में मल्टीपोलैरिटी (बहुध्रुवीयता) को मज़बूत करना है।

लूला का यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दुनिया भर के देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद उन्होंने नई दिल्ली आने का प्लान बनाया था। गौरतलब है कि भारत और ब्राज़ील दोनों को ही पिछले साल 50% टैरिफ का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद लूला ने भारत जैसे विश्वसनीय आर्थिक साझेदारों के साथ रिश्ते और अधिक मज़बूत करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई थी।

AI इम्पैक्ट समिट और हाई-लेवल मीटिंग्स का पूरा शेड्यूल

विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति लूला 19 और 20 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ‘दूसरे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट’ में हिस्सा लेंगे। यह एक हाई-प्रोफाइल ग्लोबल समिट है जिसमें दुनिया भर के नौ प्रधानमंत्री, सात राष्ट्रपति और दो उपराष्ट्रपति शामिल हो रहे हैं। समिट के बाद, 21 फरवरी को लूला और प्रधानमंत्री मोदी के बीच द्विपक्षीय (बाइलेटरल) वार्ता होगी।

अपनी यात्रा के दौरान लूला भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति मुर्मू उनके सम्मान में एक राजकीय भोज (दावत) देंगी, जबकि प्रधानमंत्री मोदी उनके सम्मान में लंच की मेजबानी करेंगे। यह राष्ट्रपति लूला का भारत का छठा दौरा होगा, जो उनके और भारत के गहरे जुड़ाव को प्रदर्शित करता है।

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14 मंत्रियों और शीर्ष CEOs का भारी-भरकम डेलीगेशन

इस राजकीय यात्रा की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रपति लूला के साथ 14 कैबिनेट मंत्री और ब्राज़ील की शीर्ष कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) का एक विशाल प्रतिनिधिमंडल भी भारत आ रहा है। साथ आने वाले ब्राज़ीलियाई मंत्री अपने भारतीय समकक्षों के साथ अलग से बैठकें करेंगे ताकि विभागीय स्तर पर सहयोग को अंतिम रूप दिया जा सके। वहीं, ब्राज़ील के बिजनेस लीडर्स एक विशेष बिजनेस फोरम में हिस्सा लेंगे।

इस फोरम का मकसद दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार और वाणिज्यिक जुड़ाव को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। ब्राज़ील प्रेसिडेंट का भारत दौरा केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहद शक्तिशाली होने वाला है क्योंकि ब्राज़ीलियाई ट्रेड और इन्वेस्टमेंट प्रमोशन एजेंसी ‘एपेक्सब्रासिल’ (ApexBrasil) नई दिल्ली में अपना एक नया ऑफिस भी खोलने जा रही है।

डिफेंस, स्पेस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े समझौतों की उम्मीद

भारत और ब्राज़ील के बीच रणनीतिक साझेदारी का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इस दौरे के दौरान डिफेंस सेक्टर, ट्रेड, साइंस और टेक्नोलॉजी, बायोफ्यूल, रेयर अर्थ मटीरियल और एनर्जी जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। पिछले दिसंबर में ब्राज़ील की नेवी और भारत की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक्स लिमिटेड के बीच स्कॉर्पीन सबमरीन और अन्य मिलिट्री जहाजों के रखरखाव को लेकर एक समझौता पहले ही हो चुका है।

अब डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे उभरते हुए क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने पर जोर दिया जाएगा। दोनों नेता भारत-ब्राज़ील रणनीतिक साझेदारी के पूरे स्पेक्ट्रम की समीक्षा करेंगे और आपसी हितों के वैश्विक प्लेटफॉर्म पर सहयोग बढ़ाने के लिए एक ‘फ्यूचर एजेंडा’ तैयार करेंगे।

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ग्लोबल साउथ और मल्टीलेटरलिज़्म पर साझा दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लूला के बीच होने वाली बातचीत में क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों का खास महत्व होगा। दोनों देश ‘रिफ़ॉर्म्ड मल्टीलेटरलिज़्म’, ग्लोबल गवर्नेंस और ‘ग्लोबल साउथ’ से जुड़े मुद्दों पर एक जैसा दृष्टिकोण रखते हैं। वे संयुक्त राष्ट्र (UN) सुधार, जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे का सहयोग करते आए हैं।

मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने और आपसी हितों के मुद्दों पर वैश्विक प्लेटफॉर्म पर सहयोग को और गहरा करने का एक सुनहरा अवसर होगी। चीन के साथ भारत के रिश्तों और UNSC मेंबरशिप के लिए भारत की उम्मीदों जैसे संवेदनशील मुद्दों के बीच ब्राज़ील प्रेसिडेंट का भारत दौरा नई दिल्ली की कूटनीतिक ताकत को और बढ़ाएगा।

व्यापारिक आंकड़े: लैटिन अमेरिका में भारत का सबसे बड़ा पार्टनर

आर्थिक मोर्चे पर ब्राज़ील लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर बनकर उभरा है। साल 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 25% से ज़्यादा बढ़कर $15.21 बिलियन तक पहुंच गया, जबकि 2024 में यह $12.2 बिलियन था। भारत का निर्यात $8.35 बिलियन का रहा, जबकि ब्राज़ील से आयात $6.85 बिलियन का था।

दोनों देशों ने अब 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को $20 बिलियन तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही ‘इंडिया-मर्कोसुर प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट’ (PTA) के विस्तार पर भी चर्चा होने की संभावना है। ब्राज़ील प्रेसिडेंट का भारत दौरा इन आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

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लूला का भारत से पुराना नाता और भविष्य की राजनीतिक अहमियत

राष्ट्रपति लूला का भारत से जुड़ाव दशकों पुराना है। वे पहली बार 2004 में गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि (चीफ गेस्ट) के तौर पर भारत आए थे। आखिरी बार वे सितंबर 2023 में G20 समिट में शामिल होने नई दिल्ली आए थे। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री मोदी जुलाई 2025 में ब्रासीलिया गए थे, जो 57 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली राजकीय यात्रा थी। इस साल के दौरे की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि साल के आखिर में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) समिट के लिए लूला के भारत आने की संभावना कम है, क्योंकि उनका ध्यान ब्राज़ील के आगामी चुनावों पर होगा। ऐसे में यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों को एक लंबी अवधि के लिए स्थिर करने का काम करेगा।

रणनीतिक साझेदारी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का नया दौर

अंततः, इस यात्रा से उम्मीद है कि द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक प्लेटफॉर्म पर रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हेल्थ, फार्मास्यूटिकल्स और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे डोमेन में सहयोग को मज़बूत किया जाएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ किया है कि भारत और ब्राज़ील 2006 से ही रणनीतिक साझेदार हैं और उनके रिश्ते लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों के बीच मज़बूत संबंधों पर आधारित हैं।

ब्राज़ील प्रेसिडेंट का भारत दौरा न केवल द्विपक्षीय व्यापार के नए रास्ते खोलेगा, बल्कि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दुनिया में भी दोनों देशों को एक अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार करेगा।

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