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‘आई लव मुहम्मद’ विवाद पर ओवैसी की तीखी प्रतिक्रिया और देशव्यापी प्रदर्शन:

आई लव मुहम्मद विवाद

‘आई लव मुहम्मद’ विवाद इस महीने की शुरुआत में उत्तर प्रदेश के कानपुर में ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के जुलूस के दौरान शुरू हुआ था। रावतपुर गाँव में 4 सितंबर को बारावफात के जुलूस के मार्ग पर एक तंबू पर ‘आई लव मुहम्मद’ लिखा एक लाइट बोर्ड लगाया गया था, जिसने पूरे देश में सांप्रदायिक तनाव और राजनीतिक बहस छेड़ दी।

AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के कानपुर में इन पोस्टरों को लेकर उठे विवाद की तीखी आलोचना करते हुए स्पष्ट रूप से पूछा, “समस्या क्या है? चुनावी राज्य बिहार के पूर्णिया में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

ओवैसी ने तर्क दिया, “प्यार में राष्ट्र-विरोधी क्या है? क्या हम प्यार के साथ हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं? समस्या क्या है? इसका मतलब है कि आप प्यार के खिलाफ हैं… एक मुसलमान तब तक सच्चा मुसलमान नहीं है जब तक वह मोहम्मद को अल्लाह का आखिरी रसूल मानता है… एशिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी भारत में रहती है।

आप अपनी इस प्रतिक्रिया से कैसा संदेश दे रहे हैं?” उन्होंने त्योहारों पर बधाई वाले पोस्टरों से इसकी तुलना करते हुए सवाल किया, “हैप्पी बर्थडे, प्राइम मिनिस्टर और हैप्पी बर्थडे, चीफ मिनिस्टर के पोस्टर लगाने की अनुमति है, लेकिन यह नहीं? वे नहीं चाहते कि कोई प्यार के बारे में बात करे… क्या होगा? हम कहाँ जाएँगे?”

ओवैसी ने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला दिया, जो धार्मिक स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार देता है, और कहा कि एक मुसलमान का धर्म तब तक पूरा नहीं होता जब तक वह दुनिया की हर चीज़ से ज़्यादा पैगंबर मुहम्मद से प्यार न करे।

कानपुर से बरेली तक फैला विवाद और विरोध प्रदर्शन

कानपुर में शुरू हुए इस विवाद पर स्थानीय हिंदू समूहों ने आपत्ति जताई थी। उनका आरोप था कि बारावफात के लिए इस क्षेत्र का उपयोग स्थापित नहीं है और यह एक “नई परंपरा” है, जिससे राम नवमी जैसे हिंदू त्योहारों के लिए उपयोग किए जाने वाले क्षेत्र के स्थापित उपयोग में बाधा आ रही है।

इस विवाद के बाद, 9 सितंबर को कानपुर पुलिस ने बारावफ़ात के जुलूस के दौरान सार्वजनिक सड़क पर ‘आई लव मुहम्मद’ के नारे वाले बोर्ड लगाने के आरोप में नौ नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।

यह विवाद जल्द ही उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में फैल गया। उन्नाव, बरेली, कौशांबी, लखनऊ, महाराजगंज, काशीपुर और हैदराबाद जैसे शहरों में रैलियाँ और प्रदर्शन हुए, जिनमें से कुछ पुलिस के साथ झड़पों में बदल गए।

बरेली में पथराव और पुलिस कार्रवाई

AIMIM प्रमुख की यह कड़ी आलोचना उत्तर प्रदेश के बरेली में जुमे की नमाज के बाद हुई पथराव की घटनाओं के बीच आई। 26 सितंबर को, बरेली में जुमे की नमाज के बाद, प्रदर्शनकारियों का एक विशाल जमावड़ा आला हज़रत दरगाह और आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रज़ा खान के घर के बाहर देखा गया, जिनके हाथ में ‘आई लव मोहम्मद’ के पोस्टर थे।

प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव करने के बाद, सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। महानिरीक्षक अजय साहनी ने बताया कि पुलिस बल के फ्लैग मार्च के दौरान, कुछ उपद्रवियों ने नारेबाजी करके कार्यवाही में बाधा डाली और उनकी गिरफ़्तारी सुनिश्चित की जाएगी। जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने बाद में संवाददाताओं को बताया कि स्थिति अब सामान्य और नियंत्रण में है। अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि दंगा मौलाना तौकीर रज़ा ख़ान ने भड़काया था।

सोशल मीडिया अभियान और जबलपुर की प्रतिक्रिया

‘आई लव मुहम्मद’ विवाद के बीच, सोशल मीडिया पर यह ऑनलाइन अभियान तेज़ी से गति पकड़ी। #ILoveMuhammad जैसे हैशटैग सभी प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड करने लगे। उपयोगकर्ताओं ने अपनी प्रोफ़ाइल तस्वीरें बदलीं और एकजुटता दिखाते हुए इस नारे वाली तस्वीरें खूब शेयर कीं।

इस बीच, मध्य प्रदेश के जबलपुर में सांप्रदायिक तनाव देखने को मिला, जहाँ शहर के मुस्लिम इलाकों में “आई लव मोहम्मद” के नारे वाले बड़े-बड़े बैनर दिखाई दिए। नया मोहल्ला इलाके के मोहम्मदी गेट और हनुमान ताल थाना क्षेत्र की एक मस्जिद पर ऐसे पोस्टर लगे थे।

जवाब में, हिंदू संगठनों ने शहर के विभिन्न स्थानों पर “आई लव श्री राम”, “आई लव महाकाल” जैसे नारों वाले पोस्टर और भगवा झंडे लगाकर प्रतिक्रिया व्यक्त की। हिंदू सेवा परिषद ने ओमती थाने में औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई।

गुजरात और कर्नाटक में भी विरोध प्रदर्शन हुए। गांधीनगर के एसपी रवि तेजा वासमसेट्टी ने बताया कि “‘आई लव मोहम्मद’ ट्रेंड पर एक हिंदू व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से अल्पसंख्यक समुदाय भड़क गया, जिसके कारण यह हमला हुआ,” जिसके बाद 60 लोगों को हिरासत में लिया गया।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और ‘प्यार’ पर बहस

इस पूरे ‘आई लव मुहम्मद’ विवाद ने एक राष्ट्रव्यापी बहस का रूप ले लिया। नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रियाएँ दीं:

यूपी मंत्री अनिल राजभर ने विरोध प्रदर्शन की निंदा करते हुए कहा कि ऐसी मानसिकता वाले लोग भारत और उत्तर प्रदेश के विकास को पचा नहीं सकते।

यूपी मंत्री असीम अरुण ने कहा कि शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जाने वाला कोई भी जुलूस देश के लिए हानिकारक है और विभाजनकारी तत्वों से निपटना सरकार जानती है।

यूपी मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि अभियान का मकसद सभी जानते हैं और यह शांति-व्यवस्था बिगाड़ने की जानबूझकर साजिश है।

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने सभी धर्मों के प्रति प्रेम व्यक्त करते हुए कहा, “मुझे मुहम्मद से प्रेम है। मुझे महादेव से प्रेम है…”

सपा नेता ने पुलिस लाठीचार्ज की निंदा की और कहा कि लोगों को अपनी बात कहने की स्वतंत्रता है।

राजद नेता तेजस्वी यादव ने भाजपा पर हिंसा भड़काने में आगे रहने का तंज कसा।

ओवैसी ने पत्रकार को कहा ‘आई लव यू’

ओवैसी ने ‘आई लव महादेव’ अभियान पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में अपनी बात को और ज़ोरदार तरीके से रखा। उन्होंने पत्रकार का नाम (इश्मित) पूछकर कहा: “मैं कहूँगा कि मैं इश्मित से प्यार करता हूँ। इसमें राष्ट्र-विरोधी क्या है? यह हिंसा को कैसे बढ़ावा देता है? अगर शब्द ‘प्यार’ है, तो किसी को इससे क्या समस्या होनी चाहिए?

इसका मतलब है कि आप प्यार के खिलाफ हैं। मुझे लगता है कि हमें इन लोगों के लिए मुगल-ए-आज़म का ‘मोहब्बत ज़िंदाबाद’ गाना बजाना चाहिए।”

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी पैगंबर मुहम्मद के प्रति प्रेम व्यक्त करने के अधिकार का बचाव किया और सवाल किया कि “आई लव मुहम्मद” लिखना कैसे गैरकानूनी हो सकता है।

उन्होंने कहा, “इन तीन शब्दों पर मुकदमा दर्ज करने का मतलब ज़रूर कोई मानसिक रूप से अस्वस्थ है।”

यह ‘आई लव मुहम्मद’ विवाद अब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक भावनाओं और सांप्रदायिक सद्भाव पर एक राष्ट्रव्यापी बहस का विषय बन चुका है, जिस पर अधिकारी सोशल मीडिया पर भी कड़ी नज़र रख रहे हैं।

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