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IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड: हरियाणा सरकार के 590 करोड़ के गबन से हड़कंप

IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड

IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड आज भारत के कॉर्पोरेट और बैंकिंग जगत की सबसे बड़ी सुर्खी बन गया है, जब बैंक ने आधिकारिक तौर पर अपनी चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ रुपये की बड़ी वित्तीय अनियमितता का खुलासा किया। रविवार, 22 फरवरी 2026 को सामने आई इस रिपोर्ट के अनुसार, यह गबन हरियाणा सरकार की विभिन्न संस्थाओं और विभागों के खातों से जुड़ा हुआ है।

बैंक के आंतरिक ऑडिट में यह पाया गया कि कुछ बैंक कर्मचारियों ने बाहरी संस्थाओं के साथ मिलीभगत कर सरकारी खातों से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की है।

इस घटना के उजागर होते ही हरियाणा सरकार ने अपने सभी विभागों को हाई अलर्ट पर डाल दिया है और बैंक से रिकवरी की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। यह बैंकिंग इतिहास के उन चुनिंदा मामलों में से एक है जहाँ अंदरूनी सूत्रों ने इतनी बड़ी रकम को इतनी सफाई से चूना लगाया।

कैसे हुआ 590 करोड़ का खेल? इंटरनल ऑडिट में खुली पोल

इस IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड की शुरुआत तब हुई जब बैंक के सॉफ्टवेयर और ऑडिटिंग टूल्स ने कुछ ‘संदिग्ध लेन-देन’ को फ्लैग किया। जाँच के दौरान पता चला कि चंडीगढ़ शाखा के कुछ अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी धन को निजी और फर्जी खातों में ट्रांसफर किया था।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 65 मिलियन डॉलर के बराबर की यह राशि कई चरणों में निकाली गई ताकि सिस्टम को शक न हो। बैंक ने तुरंत इस मामले की जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को दे दी है।

बैंक अब यह समझने की कोशिश कर रहा है कि सुरक्षा के इतने कड़े इंतजामों के बावजूद कर्मचारी कैसे इस फ्रॉड को अंजाम देने में सफल रहे और क्या इसमें कुछ बड़े बैंक अधिकारी भी शामिल हैं?

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हरियाणा सरकार के खातों पर गाज: रिकवरी की कोशिशें हुई तेज

हरियाणा सरकार के लिए यह IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड एक बड़े झटके के रूप में आया है क्योंकि यह पैसा विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों के लिए सुरक्षित रखा गया था। मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने के निर्देश दिए हैं।

बैंक ने भरोसा दिलाया है कि वह सरकारी संस्थाओं के खातों की रिकवरी सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाएगा। हालांकि, विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है और सवाल पूछा है कि सरकारी धन को निजी बैंकों में रखने के दौरान सुरक्षा ऑडिट की अनदेखी क्यों की गई? सरकार अब उन सभी विभागों की सूची तैयार कर रही है जिनके खाते चंडीगढ़ की इस शाखा में थे ताकि नुकसान का सटीक आकलन किया जा सके।

स्टॉक मार्केट पर असर: कल निवेशकों के रडार पर रहेगा IDFC फर्स्ट बैंक का शेयर

आने वाले ट्रेडिंग सत्र में IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड की खबर का गहरा असर शेयर बाजार पर दिखना तय है। अपस्टॉक्स (Upstox) और अन्य मार्केट विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि कल बाजार खुलते ही बैंक के शेयरों में भारी बिकवाली देखी जा सकती है।

590 करोड़ का यह गबन बैंक की बैलेंस शीट पर भी असर डाल सकता है और निवेशकों के भरोसे को कमजोर कर सकता है। बैंक प्रबंधन अब यह स्पष्ट करने की कोशिश कर रहा है कि इस फ्रॉड के लिए पर्याप्त ‘प्रोविजन्स’ (प्रावधान) किए गए हैं या नहीं, ताकि बैंक के संचालन पर कोई बड़ा असर न पड़े।

निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे बैंक के आधिकारिक बयानों और जांच की प्रगति पर पैनी नजर रखें क्योंकि यह मामला बैंक की रेटिंग को भी प्रभावित कर सकता है।

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कानूनी कार्रवाई की तैयारी: कर्मचारी और बाहरी संस्थाएं अब एजेंसियों के निशाने पर

पुलिस और अन्य एजेंसियां अब इस IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड में शामिल सभी चेहरों को बेनकाब करने में जुट गई हैं। चंडीगढ़ पुलिस ने बैंक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली है और कई संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। बैंक ने उन कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है जिन पर इस गबन में शामिल होने का संदेह है।

जांच एजेंसियां उन बाहरी कंपनियों और संस्थाओं के बैंक खातों को फ्रीज कर रही हैं जिनमें फ्रॉड का पैसा ट्रांसफर किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ का भी मामला हो सकता है, जिसकी जाँच में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाएगी ताकि यह पता चल सके कि क्या यह पैसा देश के बाहर तो नहीं भेजा गया?

जेन-जी और मिलेनियल्स की चिंता: डिजिटल बैंकिंग के दौर में कितना सुरक्षित है हमारा पैसा?

सोशल मीडिया पर इस IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड को लेकर युवाओं के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। जेन-जी और मिलेनियल्स, जो पूरी तरह से डिजिटल और मोबाइल बैंकिंग पर निर्भर हैं, वे इस बात से डरे हुए हैं कि अगर बैंक के अंदरूनी कर्मचारी ही धोखाधड़ी में शामिल होंगे, तो ग्राहकों की सुरक्षा का क्या होगा?

रेडिट और एक्स (X) पर युवा यूजर्स पूछ रहे हैं कि क्या एआई (AI) और आधुनिक टेक्नोलॉजी ऐसे फ्रॉड को पहले क्यों नहीं रोक पाई? इस घटना ने बैंकिंग सेक्टर में ‘जीरो ट्रस्ट’ मॉडल की जरूरत को फिर से रेखांकित किया है। युवाओं की मांग है कि बैंकों को अपने कर्मचारियों की मॉनिटरिंग के लिए और अधिक पारदर्शी और कड़े नियम बनाने चाहिए ताकि आम आदमी की गाढ़ी कमाई सुरक्षित रह सके।

बैंकिंग रेगुलेशन और भविष्य की चुनौतियां: क्या अब बदलेंगे नियम?

एक सीनियर जर्नलिस्ट के नाते मेरा मानना है कि यह IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड भारतीय बैंकिंग सिस्टम के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है। आरबीआई (RBI) अब निजी बैंकों में सरकारी फंड्स के प्रबंधन को लेकर नए और कड़े दिशानिर्देश जारी कर सकता है।

अक्सर देखा गया है कि शाखा स्तर पर होने वाले ये घोटाले केवल तभी संभव होते हैं जब ‘चेक्स एंड बैलेंसेज’ (Checks and Balances) का पालन नहीं किया जाता। आने वाले समय में बैंकों को अपने ‘इंसाइडर थ्रेट’ मैनेजमेंट सिस्टम को और अधिक मजबूत करना होगा। यह केवल 590 करोड़ रुपये के नुकसान की बात नहीं है, बल्कि यह उस साख और भरोसे की बात है जिस पर पूरा वित्तीय ढांचा खड़ा होता है।

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विश्वास बहाली की लंबी राह और बैंक की अगली चुनौती

अंततः, IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड ने बैंक की प्रतिष्ठा को दांव पर लगा दिया है। वी. वैद्यनाथन के नेतृत्व में बैंक ने अपनी रिटेल इमेज को बहुत मजबूती से बनाया था, लेकिन इस तरह के गबन उस इमेज को धूमिल कर देते हैं। बैंक के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती न केवल पैसों की रिकवरी करना है, बल्कि अपने ग्राहकों और निवेशकों को यह विश्वास दिलाना है कि उनके सिस्टम में अब कोई सेंध नहीं लगा सकता।

हरियाणा सरकार को भी अपने फंड मैनेजमेंट की समीक्षा करनी होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच एजेंसियां कितनी जल्दी दोषियों को सलाखों के पीछे पहुँचाती हैं और बैंक इस वित्तीय घाटे से कैसे उबरता है। बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता ही भविष्य का एकमात्र रास्ता है।

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