भारत-EU व्यापार समझौता: ‘सभी डील्स की जननी’ पर मुहर
सभी डील्स की जननी दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के मंच से एक ऐसी घोषणा हुई है जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी है। यूरोपीय आयोग की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अपने आगामी नई दिल्ली दौरे से पहले स्पष्ट कर दिया है कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) एक ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के बिल्कुल कगार पर खड़े हैं।
इसे सभी डील्स की जननी के रूप में देखा जा रहा है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने जोर देकर कहा कि यह समझौता दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच न केवल व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि करीब 2 अरब लोगों का एक विशाल एकीकृत बाज़ार भी तैयार करेगा, जो वैश्विक जीडीपी के लगभग एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगा।
दावोस में गूंजा भारत-EU समझौते का शोर
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष ने अपनी रणनीतिक दूरदर्शिता साझा की। उन्होंने कहा कि यूरोप आज के समय में दुनिया के प्रमुख ग्रोथ सेंटर्स और इस सदी की उभरती आर्थिक महाशक्तियों के साथ अपने संबंधों को प्रगाढ़ करना चाहता है।
लैटिन अमेरिका से लेकर इंडो-पैसिफिक तक फैली इस रणनीति में भारत सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अपने संबोधन में विश्वास जताया कि दावोस की बैठकों के ठीक बाद जब वह भारत पहुंचेंगी, तो इस समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने माना कि हालांकि अभी भी कुछ तकनीकी काम बाकी है, लेकिन दोनों पक्ष इस महा-समझौते के बेहद करीब हैं।
77वें गणतंत्र दिवस पर भारत आएंगे यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता
कूटनीतिक और व्यापारिक दृष्टि से जनवरी 2026 का यह सप्ताह भारत के लिए ऐतिहासिक होने जा रहा है। यूरोपीय परिषद के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से 27 जनवरी तक भारत की राजकीय यात्रा पर रहेंगे।
विशेष बात यह है कि ये दोनों शीर्ष नेता भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इस यात्रा के दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक हाई-लेवल समिट में भी शामिल होंगे, जहां उम्मीद जताई जा रही है कि बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत के समापन की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।
इसे भी पढ़े :-77वां गणतंत्र दिवस: मुख्य अतिथि होंगे यूरोपीय संघ के नेता
आर्थिक महाशक्ति बनने की राह में भारत का सबसे बड़ा दांव
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित यह व्यापार समझौता कई मायनों में अनूठा है। वैश्विक आर्थिक विशेषज्ञ इसे सभी डील्स की जननी इसलिए कह रहे हैं क्योंकि यह भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा को एक नए स्तर पर ले जाएगा। EU वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, जिसका 2023-24 में माल व्यापार 135 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है।
भारत के लिए 27 देशों के इस ब्लॉक तक आसान पहुंच का मतलब है कि विनिर्माण मूल्य श्रृंखला (Manufacturing Value Chain) में भारत की स्थिति और अधिक मजबूत होगी। वहीं, EU के लिए भारत उसकी उस रणनीति का प्रमुख स्तंभ है, जिसके तहत वह चीन पर अपनी निर्भरता कम कर भरोसेमंद भागीदारों के साथ जुड़ना चाहता है।
वैश्विक व्यापारिक उथल-पुथल के बीच एक नया रोडमैप
यह प्रस्तावित FTA ऐसे समय में पक्का किया जा रहा है जब पूरी दुनिया में व्यापार और टैरिफ नीतियों को लेकर अनिश्चितता का माहौल है। विशेष रूप से ट्रंप प्रशासन की नीतियों को लेकर भारत और 27 देशों वाला यूरोपीय संघ दोनों ही सतर्क हैं। ऐसे में वाशिंगटन की टैरिफ नीतियों से उत्पन्न होने वाले संभावित व्यापार व्यवधानों के बीच, भारत-EU समझौता एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।
27 जनवरी 2026 को होने वाले भारत-EU शिखर सम्मेलन में न केवल इस व्यापारिक संधि पर मुहर लगेगी, बल्कि दोनों पक्ष एक डिफेंस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट और 2026-2030 की अवधि के लिए एक ‘जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक विजन’ भी पेश करेंगे।
दशकों पुराने इंतजार के खत्म होने की घड़ी
भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी का इतिहास 2004 से चला आ रहा है। हालांकि, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लिए बातचीत पहली बार 2007 में शुरू हुई थी। किन्हीं कारणों से 2013 में इन वार्ताओं को रोक दिया गया था, लेकिन जून 2022 में इन्हें नए उत्साह के साथ फिर से शुरू किया गया।
अब 16 दौर की गहन चर्चाओं के बाद, दोनों पक्ष “खुले मुद्दों” को न्यूनतम करने में सफल रहे हैं। यह सभी डील्स की जननी इसलिए भी है क्योंकि इसमें ऑटोमोबाइल, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), टेक्सटाइल और सर्विसेज जैसे 23 विभिन्न चैप्टर्स में मार्केट एक्सेस शामिल है, जो सालाना 136.5 बिलियन डॉलर के व्यापार को सीधा प्रभावित करेगा।
इसे भी पढ़े :-भारत-अमेरिका व्यापार समझौता करीब: पीयूष गोयल का बयान
भारतीय निर्यात और घरेलू उद्योगों के लिए नई संभावनाएं
वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों पर नज़र डालें तो भारत ने यूरोपीय संघ को 76 बिलियन डॉलर का सामान एक्सपोर्ट किया है, जबकि 61 बिलियन डॉलर का इंपोर्ट किया गया, जो भारत के पक्ष में व्यापार अधिशेष को दर्शाता है। पेट्रोलियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, फार्मा और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों में भारत की पकड़ पहले से ही मजबूत है।
वर्तमान में भारतीय कपड़ों और टेक्सटाइल पर करीब 10 प्रतिशत की ड्यूटी लगती है, जिसे इस समझौते के माध्यम से हटाए जाने की उम्मीद है। एक बार औपचारिक घोषणा होने के बाद, $20 ट्रिलियन से अधिक की कुल जीडीपी वाली इन अर्थव्यवस्थाओं के बीच यह व्यापार समझौता भारत का अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक मुक्त व्यापार समझौता बन जाएगा।
इसे भी पढ़े :-पाकिस्तानी पत्रकार का दावा: नरेंद्र मोदी धुरंधर स्क्रिप्ट को दी मंजूरी
सपनों का बाज़ार और 450 मिलियन उच्च आय वाले उपभोक्ता
उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने सही कहा है कि यह सभी डील्स की जननी है, क्योंकि यह भारत के लिए 450 मिलियन उच्च आय वाले उपभोक्ताओं तक सीधी पहुंच का रास्ता खोलेगी। भारत ने 2021 से अब तक मॉरीशस से लेकर विभिन्न देशों के साथ 7 मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन यूरोपीय संघ के साथ यह संधि भारत की विकास गाथा का सबसे स्वर्णिम अध्याय साबित होगी।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों की टीमें मतभेदों को कम करने के लिए लगातार काम कर रही हैं, ताकि जब 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के परेड में यूरोपीय नेता शामिल हों, तब तक भारत और यूरोप के आर्थिक रिश्तों का एक नया सूरज उदय हो चुका हो।
इसे भी पढ़े :-मोदी राज में श्रम कानूनों की स्थिति: श्रमिकों पर पड़ने वाले प्रभाव!



Post Comment