चीन-पाक की उड़ेगी नींद, 114 राफेल जेट डील को मिली हरी झंडी
114 राफेल जेट डील को रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने हरी झंडी दिखा दी है, जो हाल के वर्षों में भारतीय सेना की कॉम्बैट रेडीनेस को मजबूत करने के मकसद से सबसे बड़ी मंजूरियों में से एक है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में कुल 3.60 लाख करोड़ रुपये के कैपिटल एक्विजिशन प्रपोजल को मंजूरी दी गई।
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, इन मंजूरियों में इंडियन एयर फोर्स (IAF), थल सेना, नौसेना और कोस्ट गार्ड की अति आवश्यक जरूरतें शामिल हैं।
यह ऐतिहासिक फैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ महीने पहले ही भारत और पाकिस्तान के बीच ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद तनाव चरम पर था, जिसमें चार दिनों तक ड्रोन और मिसाइलों से जबरदस्त सैन्य कार्रवाई देखी गई थी।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों के दौरे से पहले रक्षा मंत्रालय का बड़ा मास्टरस्ट्रोक
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के अगले हफ्ते होने वाले भारत दौरे से ठीक पहले, रक्षा मंत्रालय ने वायुसेना के लिए 3.25 लाख करोड़ रुपये की लागत से 114 राफेल जेट डील के प्रस्ताव को मंजूरी देकर रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम दिया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस प्रपोज्ड डील को अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।
राफेल एक ‘ओमनीरोल’ फाइटर है, जो एक ही सॉर्टी में एयर सुपीरियरिटी, सटीक ग्राउंड स्ट्राइक, रेकी और एंटी-शिप मिशन करने में सक्षम है। पिछले साल मई में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान के सटीक ठिकानों को तबाह करने के लिए राफेल का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया था।
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मेक इन इंडिया के तहत भारत में बनेंगे 96 फाइटर जेट
इस मेगा 114 राफेल जेट डील की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘स्वदेशी’ हिस्सा है। समझौते के तहत, भारत फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन से फ्लाई-अवे कंडीशन में केवल 18 राफेल जेट खरीदेगा, जबकि बाकी 96 फाइटर जेट का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इसमें स्टेट-ऑफ-द-आर्ट फाइटर जेट टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए एक स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप शामिल है।
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड हैदराबाद में एक अत्याधुनिक प्रोडक्शन फैसिलिटी स्थापित करेगा, जहां राफेल के मुख्य स्ट्रक्चरल कंपोनेंट जैसे पिछले फ्यूजलेज के लैटरल शेल, सेंट्रल फ्यूजलेज और अगला हिस्सा तैयार किया जाएगा। उम्मीद है कि पहले फ्यूजलेज सेक्शन साल 2028 तक प्रोडक्शन लाइन से बाहर निकलेंगे।
वायुसेना के बेड़े में राफेल की बढ़ती ताकत और तकनीकी क्षमता
भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में 36 राफेल जेट हैं, जो दो स्क्वाड्रन में तैनात हैं। नई 114 राफेल जेट डील से वायुसेना की घटती फाइटर स्क्वाड्रन ताकत की चिंता दूर होगी। ये जेट मेटियोर लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलें, हैमर स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक हथियार और स्पेक्ट्रा एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट से लैस होंगे।
इसके अलावा, नेवी के लिए भी 63,000 करोड़ रुपये में 26 राफेल ‘M’ वेरिएंट का ऑर्डर दिया गया है, जो INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य से ऑपरेट होंगे। वायुसेना के लिए मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोग्राम के तहत राफेल का चयन लंबी दूरी के हमले और हवाई दबदबा बनाए रखने की भारत की क्षमता में भारी बढ़ोतरी करेगा।
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थल सेना के लिए विभव एंटी-टैंक माइंस और टैंक्स का ओवरहॉल
DAC ने केवल वायुसेना ही नहीं, बल्कि थल सेना के लिए भी बड़े फैसले लिए हैं। दुश्मन की मैकेनाइज्ड फोर्सेस को रोकने के लिए ‘विभव’ एंटी-टैंक माइंस की खरीद को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स (ARVs), T-72 टैंक्स और इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स (BMP-II) के प्लेटफॉर्म्स के ओवरहॉल के लिए AoN (Acceptance of Necessity) दिया गया है।
इससे इन उपकरणों की सर्विस लाइफ बढ़ेगी और सेना की ऑपरेशनल क्षमता सुनिश्चित होगी। विभव माइंस एक प्रभावी एंटी-टैंक ऑब्सटेकल सिस्टम के तौर पर काम करेंगी, जिससे सीमा पर रक्षा कवच और भी मजबूत हो जाएगा।
भारतीय नौसेना को मिले P8I मैरीटाइम एयरक्राफ्ट और गैस टर्बाइन जेनरेटर
नौसेना की सुरक्षा क्षमताओं को विस्तार देते हुए, रक्षा मंत्रालय ने बोइंग P8I लॉन्ग रेंज मैरीटाइम रिकॉनिसेंस एयरक्राफ्ट और 04 MW मरीन गैस टर्बाइन बेस्ड इलेक्ट्रिक पावर जेनरेटर को मंजूरी दी है। P8I एयरक्राफ्ट के आने से नेवी की लंबी दूरी की एंटी-सबमरीन वॉरफेयर और मैरीटाइम सर्विलांस क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
वहीं, इलेक्ट्रिक पावर जेनरेटर को ‘मेक-I’ कैटेगरी के तहत शामिल करने से विदेशी निर्माताओं पर निर्भरता कम होगी और भारतीय नौसेना आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाएगी।
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कोस्ट गार्ड की सर्विलांस क्षमता और AS-HAPS सैटेलाइट का उदय
इंडियन कोस्ट गार्ड (ICG) के लिए डोर्नियर एयरक्राफ्ट के इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इंफ्रा-रेड सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी गई है, जिससे समुद्री निगरानी और अधिक प्रभावी होगी। इसके अतिरिक्त, एक और क्रांतिकारी फैसला ‘एयर-शिप बेस्ड हाई एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट’ (AS-HAPS) की खरीद का है।
इसका उपयोग लगातार इंटेलिजेंस, सर्विलांस, टोही (ISR), इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस और टेलीकम्युनिकेशन के लिए किया जाएगा। यह सैटेलाइट मिलिट्री ऑपरेशन्स के लिए रिमोट सेंसिंग और लंबी अवधि की निगरानी में गेम-चेंजर साबित होगा।
आत्मनिर्भरता और वैश्विक रणनीतिक गहराई का नया अध्याय
यह 3.6 लाख करोड़ रुपये का निवेश केवल हथियारों की खरीद नहीं है, बल्कि भारत के घरेलू एयरोस्पेस इकोसिस्टम को एक बड़ा बूस्ट है। लगभग 50 परसेंट स्वदेशी कंटेंट के लक्ष्य के साथ यह प्रोग्राम डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता के लंबे प्रयास का हिस्सा है। फ्रांस के साथ यह पार्टनरशिप पिछले एक दशक में काफी गहरी हुई है। अब प्रपोजल प्रोक्योरमेंट प्रोसेस के अगले चरण में जाएगा, जहां CCS की अंतिम मुहर के बाद यह भारत के फाइटर मॉडर्नाइजेशन प्लान का सबसे बड़ा मील का पत्थर बन जाएगा।
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