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गृह मंत्रालय का नया आदेश: 2025 से भारत में विदेशी नियम बदल गए,

भारत में विदेशी नियम

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारत में विदेशी नियम (आव्रजन और विदेशी (छूट) आदेश, 2025) को अधिसूचित किया है, जो देश के आव्रजन ढांचे में एक बड़ा बदलाव है। यह नया आदेश, जो 1 सितंबर को भारत के राजपत्र में प्रकाशित हुआ और तत्काल प्रभाव से लागू हो गया, कई महत्वपूर्ण प्रावधान लेकर आया है। इस आदेश के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भारत में प्रवेश से रोके गए विदेशियों को रखने के लिए निरोध केंद्र स्थापित करने होंगे। यह आदेश केंद्र सरकार के आव्रजन और विदेशी (छूट) आदेश, 2025 के अनुरूप है, जैसा कि मंगलवार को जारी राजपत्र अधिसूचना में कहा गया है।

अब निरोध केंद्र में रखे जाएंगे अवैध विदेशी

गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारियों को भारत में प्रवेश से वंचित किए गए इन विदेशियों को तब तक हिरासत में रखना होगा जब तक उन्हें निर्वासित नहीं कर दिया जाता। आव्रजन ब्यूरो उन विदेशियों की एक विशिष्ट सूची बनाए रखेगा जिन्हें भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं है।

नए नियमों के अनुसार, राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों, जासूसी, बलात्कार, हत्या, आतंकवादी गतिविधियों, बाल तस्करी या किसी प्रतिबंधित संगठन की सदस्यता जैसे गंभीर आरोपों में दोषी पाए गए विदेशियों पर भारत में प्रवेश करने पर प्रतिबंध होगा। मादक पदार्थों और मन:प्रभावी पदार्थों की तस्करी, बाल तस्करी सहित मानव तस्करी, नकली यात्रा दस्तावेजों और मुद्रा (क्रिप्टोकरेंसी सहित) के गोरखधंधे, साइबर अपराध या बाल शोषण में शामिल विदेशियों को भी भारत में प्रवेश करने से रोक दिया जाएगा। विदेशी नागरिकों को भारत में प्रवेश से वंचित किया जा सकता है, और वाहक इन व्यक्तियों को उनके मूल देश वापस भेजने के लिए बाध्य हैं।

विदेशी न्यायाधिकरणों को मिली न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्ति

एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विदेशी न्यायाधिकरणों (एफटी) को प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ प्रदान की हैं। यह नया आदेश विदेशी (न्यायाधिकरण) आदेश, 1964 का स्थान लेता है। अब एफटी को गिरफ्तारी वारंट जारी करने का अधिकार होगा यदि कोई व्यक्ति जिसकी राष्ट्रीयता को चुनौती दी गई है, व्यक्तिगत रूप से पेश होने में विफल रहता है। यदि कोई व्यक्ति यह साबित करने में विफल रहता है कि वह “विदेशी नहीं है”, तो उसे हिरासत या होल्डिंग सेंटर में भेजा जा सकता है। यह आदेश पूरे देश में लागू है, हालांकि वर्तमान में एफटी केवल असम में कार्यरत हैं। अन्य राज्यों में, किसी अवैध प्रवासी को स्थानीय अदालत में पेश किया जाता है। असम के गृह विभाग के अनुसार, राज्य में कुल 100 FT कार्यरत हैं।

रोज़गार और यात्रा पर भी नए नियम लागू

नए आदेश के अनुसार, विदेशी नागरिकों को बिजली, पानी और पेट्रोलियम क्षेत्रों में नियोजित नहीं किया जा सकता है, सिवाय केंद्र सरकार की अनुमति के। रक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा और मानवाधिकार के क्षेत्र में भी विदेशियों को नियुक्त करने पर रोक लगाई गई है। पर्वतारोहण अभियानों के लिए आने वालों को विशिष्ट अनुमति की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, विदेशी नागरिकों को वीज़ा के लिए आवेदन करते समय अपनी बायोमेट्रिक जानकारी देना अनिवार्य होगा।

किसे मिली है नए नियमों से छूट?

नए भारत में विदेशी नियम कुछ विशेष श्रेणियों के लोगों को छूट भी देते हैं। भारत की नौसेना, सेना या वायु सेना के सदस्यों को ड्यूटी पर भारत में प्रवेश करने या बाहर जाने, और उनके साथ सरकारी परिवहन से आने वाले परिवार के सदस्यों को पासपोर्ट और वीज़ा की आवश्यकताओं से छूट दी गई है।

नेपाली और भूटानी नागरिकों को भी बिना पासपोर्ट और वीज़ा के भारत में प्रवेश करने की अनुमति दी गई है, बशर्ते वे नेपाल या भूटान सीमा से प्रवेश करें और चीन, मकाऊ, हांगकांग या पाकिस्तान से न आ रहे हों। इसी प्रकार, भारतीय नागरिकों को भी नेपाल या भूटान की सीमा से प्रवेश करने पर छूट मिली है।

तिब्बतियों को भी छूट दी गई है, बशर्ते उन्होंने उपयुक्त पंजीकरण अधिकारियों के पास पंजीकरण कराया हो। अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यक समुदायों के व्यक्ति, जिन्होंने 31 दिसंबर, 2024 तक धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत में शरण ली है, उन्हें भी वैध पासपोर्ट और वीज़ा की आवश्यकता से छूट दी गई है। यह छूट उन श्रीलंकाई तमिल नागरिकों पर भी लागू होती है जिन्होंने 9 जनवरी, 2015 तक भारत में शरण ली थी।

इसके अलावा, राजनयिक और आधिकारिक पासपोर्ट धारकों, कुछ निर्दिष्ट देशों के आगमन पर वीज़ा प्राप्त करने वाले व्यक्तियों, और नौसेना के युद्धपोतों पर आने वाले विदेशी सैन्य कर्मियों को भी कुछ विशेष परिस्थितियों में वीज़ा आवश्यकताओं से छूट दी गई है।

वाहक दायित्व से राहत

नए आदेश ने वाहकों को भी कुछ जिम्मेदारियों से मुक्त किया है। भारत में या भारत से यात्रियों और चालक दल को ले जाने वाले रेल और सड़क वाहक अब वाहक दायित्व से संबंधित कानून की धाराओं से मुक्त हैं। इसके अलावा, यदि जाली दस्तावेजों का पता लगाने के लिए विशेषज्ञ जांच की आवश्यकता होती है, तो वाहक जिम्मेदार नहीं होंगे।

संक्षेप में, यह नया आदेश भारत में विदेशी नियम को और अधिक कठोर बनाता है, जिससे अवैध प्रवासियों पर लगाम लगाई जा सके और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह सभी जानकारी सटीक है और गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना पर आधारित है।

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