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बांग्लादेश जैसा फायदा! टेक्सटाइल सेक्टर पर ज़ीरो ड्यूटी से निर्यात होगा दोगुना

टेक्सटाइल सेक्टर पर ज़ीरो ड्यूटी

टेक्सटाइल सेक्टर पर ज़ीरो ड्यूटी की सुविधा मिलने से भारतीय गारमेंट इंडस्ट्री के लिए वैश्विक बाजार के द्वार खुल गए हैं। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि भारत को टेक्सटाइल से जुड़े वे सभी व्यापारिक लाभ मिलने की संभावना है, जो वर्तमान में बांग्लादेश को अमेरिका के साथ उसके व्यापार समझौते के तहत प्राप्त हैं।

इसका सीधा अर्थ यह है कि आगामी डील साइन होने के बाद भारतीय गारमेंट ट्रेडर्स को भी अमेरिकन कॉटन से बने कपड़ों के लिए अमेरिकी बाजार में ज़ीरो-टैरिफ एक्सेस मिल सकेगा। गोयल ने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली और व्हाइट हाउस के बीच होने वाले इस ट्रेड डील में अमेरिका से कॉटन यार्न इंपोर्ट करने पर ड्यूटी बेनिफिट्स का एक विशेष क्लॉज शामिल किया जाएगा।

हालांकि, वर्तमान में जारी जॉइंट स्टेटमेंट या व्हाइट हाउस की फैक्टशीट में इस क्लॉज का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन मंत्री ने भरोसा दिलाया है कि फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के फाइनल होने के बाद इसके “फाइन प्रिंट” में सभी विवरण साफ हो जाएंगे।

राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार और बांग्लादेश मॉडल की सच्चाई

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्षी नेता राहुल गांधी द्वारा संसद में फैलाए गए उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया कि बांग्लादेश को भारत से बेहतर ट्रेड डील मिली है। गोयल ने तीखे लहजे में कहा, “राहुल गांधी ने पार्लियामेंट में एक और झूठ फैलाया कि बांग्लादेश को भारत से ज़्यादा व्यापार से फ़ायदा हुआ है।”

उन्होंने बताया कि जैसे बांग्लादेश के पास यह सुविधा है कि यदि वे अमेरिका से कच्चा माल (धागा और कॉटन) खरीदते हैं और उसे प्रोसेस करके कपड़ा बनाकर वापस एक्सपोर्ट करते हैं, तो उन्हें ज़ीरो रेसिप्रोकल टैरिफ मिलता है, ठीक वैसे ही भारत के पास भी यह सुविधा होगी।

भारत का फ्रेमवर्क एग्रीमेंट वर्तमान में तैयार हो रहा है और फाइनल एग्रीमेंट में भारत को भी वैसा ही ट्रीटमेंट मिलेगा। गोयल ने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश को जो मिला है, वह फाइनल एग्रीमेंट में भारत को भी मिलने वाला है।

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ट्रंप प्रशासन के साथ अंतरिम ट्रेड डील की बारीकियां और टैरिफ में कटौती

पिछले हफ्ते राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ जिस अंतरिम ट्रेड डील की घोषणा की है, उसके तहत भारतीय सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति बनी है। इसके साथ ही, रूसी तेल खरीदने पर भारत पर लगाई गई 25 प्रतिशत की प्यूनिटिव ड्यूटी को भी हटा दिया गया है। टेक्सटाइल सेक्टर पर ज़ीरो ड्यूटी का प्रावधान इसी व्यापक व्यापार वार्ता का हिस्सा है।

मंत्री ने बताया कि मार्च के अंत तक इस अंतरिम ट्रेड डील फ्रेमवर्क को फाइनल कर लिया जाएगा। मौजूदा व्यवस्थाओं के तहत, अमेरिका ने बांग्लादेशी सामानों पर आपसी टैरिफ घटाकर 19 प्रतिशत कर दिया है, जहाँ कपड़ों पर ज़ीरो ड्यूटी तभी लगती है जब वे अमेरिकी कॉटन और मैन-मेड फाइबर से बने हों; अन्यथा उन पर 31 प्रतिशत की लेवी लगती है। भारत को भी इसी तर्ज पर ड्यूटी-फ्री एक्सेस के लिए योग्य माना जाएगा।

भारतीय किसानों और कॉटन उत्पादकों के हितों की रक्षा का भरोसा

व्यापार समझौते को लेकर भारतीय किसानों में यह चिंता थी कि कम टैरिफ पाने के लिए कृषि क्षेत्र में अधिक रियायतें दी गई होंगी। इस पर पीयूष गोयल ने भरोसा दिलाया कि भारतीय किसानों को इससे कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि उन्हें बड़ा फायदा होगा। उन्होंने कहा कि लगभग 90-95 प्रतिशत भारतीय एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स को इस डील से बाहर रखा गया है ताकि घरेलू हितों की रक्षा की जा सके।

गोयल ने बताया कि अमेरिका का कॉटन एक्सपोर्ट लगभग 5 मिलियन डॉलर तक सीमित है, जबकि भारत का लक्ष्य 50 बिलियन डॉलर का है। इस अरेंजमेंट से भारतीय कॉटन किसानों को खतरा नहीं है। इसके बजाय, भारतीय उत्पाद अब अमेरिका, यूरोपीय संघ, यूके, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और ऑस्ट्रेलिया जैसे अमीर देशों के बाजारों में बड़ी मात्रा में एक्सपोर्ट किए जाएंगे।

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एक्सपोर्ट लक्ष्य: 5 लाख करोड़ से 10 लाख करोड़ तक का सफर

सरकार का अनुमान है कि इस ऐतिहासिक ट्रेड डील के बाद भारत का मौजूदा निर्यात जो 5 लाख करोड़ रुपये है, वह बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। गोयल ने कहा कि टेक्सटाइल सेक्टर पर ज़ीरो ड्यूटी मिलने से भारत की स्पिनिंग इंडस्ट्री, जो दुनिया की सबसे बड़ी इंडस्ट्री में से एक है, को जबरदस्त मजबूती मिलेगी।

उन्होंने राहुल गांधी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें किसानों, मछुआरों, MSMEs में काम करने वाले मज़दूरों और विश्वकर्माओं से माफ़ी मांगनी चाहिए क्योंकि उन्होंने ट्रेड डील के बारे में भ्रम फैलाया। मंत्री के अनुसार, भारत की स्पिनिंग क्षमता अमेरिका के कॉटन का अधिक इस्तेमाल करने और बड़ा कोटा पाने की अनुमति देती है, जिससे हमें बांग्लादेश के मुकाबले अधिक लाभ होने की उम्मीद है।

मेडटेक और स्टार्टअप्स के लिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के नए अवसर

एक मेडटेक और स्टार्टअप इवेंट में बोलते हुए पीयूष गोयल ने यह भी जानकारी दी कि भारत के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) घरेलू मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री को रियायती ड्यूटी पर वैश्विक बाजारों तक पहुंच प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा, “हम नौ FTA के ज़रिए डेवलप्ड मार्केट खोल रहे हैं, जिसमें उच्च प्रति व्यक्ति आय वाले 38 अमीर देश शामिल हैं।”

गोयल ने आंध्र प्रदेश मेडटेक ज़ोन की तर्ज पर राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी मेडटेक ज़ोन विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन मेडिकल डिवाइस यूनिट्स के लिए 50-100 एकड़ ज़मीन रिज़र्व करने पर विचार कर सकता है, जिससे नवाचार और विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

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मार्केट सेंटिमेंट: गारमेंट एक्सपोर्टर्स और शेयर बाजार में आई तेजी

टेक्सटाइल सेक्टर पर ज़ीरो ड्यूटी की संभावनाओं ने शेयर बाजार पर भी सकारात्मक असर डाला है। शुरुआती दौर में बांग्लादेश-US जॉइंट स्टेटमेंट के बाद गोकुलदास एक्सपोर्ट्स, KPR मिल्स और अरविंद लिमिटेड जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर 7% तक गिर गए थे, लेकिन गोयल के स्पष्टीकरण के बाद ये शेयर संभल गए और 4% तक की बढ़त के साथ बंद हुए।

भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल एक्सपोर्टर्स को अब उम्मीद है कि अमेरिकी कॉटन का इस्तेमाल करने पर उन्हें ज़ीरो-टैरिफ एक्सेस का सीधा फायदा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय गारमेंट इंडस्ट्री को बांग्लादेशी एक्सपोर्ट के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलेगी और अमेरिकी बाजार में भारत की हिस्सेदारी काफी बढ़ जाएगी।

वैश्विक व्यापार मंच पर भारत की बढ़ती धमक

अंततः, भारत और अमेरिका के बीच मार्च के अंत तक फाइनल होने वाली यह ट्रेड डील टेक्सटाइल और गारमेंट क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। पीयूष गोयल ने दोहराया कि भारत का फ्रेमवर्क एग्रीमेंट तैयार हो रहा है और यह बांग्लादेश मॉडल के समान होगा लेकिन भारतीय क्षमता के कारण हमें अधिक लाभ देगा। टेक्सटाइल सेक्टर पर ज़ीरो ड्यूटी के माध्यम से न केवल एक्सपोर्ट बढ़ेगा, बल्कि लाखों रोजगार भी सृजित होंगे।

मंत्री ने विश्वास जताया कि यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को मजबूत करेगा। अब सभी की निगाहें मार्च में होने वाले फाइनल एग्रीमेंट के “फाइन प्रिंट” पर टिकी हैं, जो आधिकारिक तौर पर भारत को वैश्विक गारमेंट सप्लाई चेन के केंद्र में स्थापित कर देगा।

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