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कर्नाटक एयरोस्पेस पार्क विवाद: मुख्यमंत्री ने भूमि अधिग्रहण वापस लिया

कर्नाटक एयरोस्पेस पार्क विवाद

कर्नाटक एयरोस्पेस पार्क विवाद में किसानों की ऐतिहासिक जीत बेंगलुरु केम्पेगौड़ा हवाई अड्डे के पास 1,777 एकड़ भूमि अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना वापस ले ली गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने किसानों के तीव्र विरोध के बाद मंगलवार को यह महत्वपूर्ण घोषणा की। यह निर्णय देवनहल्ली के आसपास के 13 गांवों के किसानों की साढ़े तीन साल की लड़ाई का परिणाम है। सिद्धारमैया ने कहा कि वे उन भूमि के टुकड़ों को स्वीकार करेंगे जो किसान औद्योगिक विकास के लिए स्वेच्छा से देने को तैयार हैं। इन किसानों को उचित मुआवज़ा दिया जाएगा या विकसित भूमि का बड़ा हिस्सा प्रदान किया जाएगा।

  • 1,777 एकड़ कृषि भूमि का अधिग्रहण पूरी तरह रद्द।
  • औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए अधिसूचनाएं पहले जारी हुई थीं।
  • किसान 1,200 दिनों से अधिक समय से लगातार विरोध कर रहे थे।

मुख्य बिंदु :

  1. देवनहल्ली में 1777 एकड़ भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना पूरी तरह से रद्द की गई।
  2. किसानों के 1200 दिनों के शांतिपूर्ण आंदोलन को मिली ऐतिहासिक और लोकतांत्रिक जीत।
  3. सिद्धारमैया सरकार ने कहा, केवल स्वेच्छा से भूमि देने वालों की ज़मीन ली जाएगी।
  4. सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को भूमि आवंटन पर उठे गंभीर राजनीतिक और नैतिक सवाल।
  5. भाजपा ने सीबीआई जांच की मांग की, खड़गे परिवार ने विवादास्पद भूमि लौटाई।
  6. प्रकाश राज, संयुक्त किसान सभा समेत कई जन संगठनों ने आंदोलन को समर्थन दिया।
  7. इस संघर्ष ने भूमि उपयोग नीति और जन-सहमति की सार्वजनिक बहस को नया आयाम दिया।

मुख्यमंत्री का निर्णायक फैसला और सरकार की प्राथमिकताएं

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने परियोजना के पक्ष-विपक्ष के विस्तृत मूल्यांकन के बाद यह निर्णय लिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन मामलों में भूमि अधिग्रहण नहीं रोका जाएगा जहाँ किसान स्वेच्छा से अपनी भूमि देने के लिए आगे आते हैं। उनका प्राथमिक उद्देश्य औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है, लेकिन किसानों की आजीविका की कीमत पर नहीं। सिद्धारमैया ने स्वीकार किया कि प्रगतिशील समूह, वामपंथी दल और किसान संगठन कई दिनों से आंदोलन कर रहे थे। उन्होंने किसानों को अवगत कराया कि यह फैसला केवल देवनहल्ली पर लागू होता है, राज्य के अन्य हिस्सों पर नहीं।

  • किसानों, जनप्रतिनिधियों और प्रदर्शनकारियों से कई दौर की बैठकें हुईं।
  • खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री के.एच. मुनियप्पा से भी सलाह ली गई।
  • मुख्यमंत्री ने आंदोलन को “अनोखा और कई मायनों में ऐतिहासिक संघर्ष” बताया।

बेंगलुरु एयरोस्पेस पार्क: महत्वाकांक्षी परियोजना और क्षेत्र का महत्व

उच्च तकनीक वाले एयरोस्पेस और रक्षा उद्योगों को स्थापित करने के उद्देश्य से महत्वाकांक्षी बेंगलुरु एयरोस्पेस पार्क परियोजना बनाई गई थी। कर्नाटक एयरोस्पेस पार्क विवाद के केंद्र में रही यह परियोजना राज्य की औद्योगिक आकांक्षाओं का प्रतीक थी। यह क्षेत्र विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर है। राज्य हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), सफ्रान, बोइंग, एयरबस, कॉलिन्स और लॉकहीड मार्टिन जैसी प्रमुख उद्योग कंपनियों का घर है। सरकार को इस क्षेत्र में एक अतिरिक्त एयरोस्पेस और रक्षा पार्क की आवश्यकता महसूस हुई थी।

  • यह परियोजना उच्च तकनीक वाले उद्योगों की स्थापना चाहती थी।
  • कर्नाटक एयरोस्पेस क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य है।
  • यह देश के एयरोस्पेस उत्पादन में लगभग 65 प्रतिशत योगदान देता है।

अधिग्रहण रद्द करने का कारण: उपजाऊ भूमि और हरित पट्टी

किसानों के सशक्त विरोध के कारण सरकार ने देवनहल्ली के आसपास के 13 गाँवों में 1777 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन का अधिग्रहण रद्द करने का फैसला किया। किसानों का तर्क था कि उपजाऊ ज़मीन पर खेती-बाड़ी से उनकी एकमात्र आजीविका बर्बाद हो जाएगी। उन्होंने सरकार से इसे अधिग्रहित न करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने किसानों और प्रदर्शनकारियों के साथ पाँच-छह दौर की बैठकें की थीं, जिसमें उनके दृष्टिकोण सुने गए।

  • भूमि केम्पेगौड़ा हवाई अड्डे के पास हरित पट्टी में स्थित थी।
  • किसानों ने अधिग्रहण योजना के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

विवाद और आरोप: सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट का भूमि आवंटन

एयरोस्पेस परियोजना की ज़मीन दो साल से ज़्यादा समय से विवादों में रही थी। अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही, उद्योग विभाग ने सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को पाँच एकड़ नागरिक सुविधा (सीए) स्थल आवंटित कर दिया था। इस ट्रस्ट के अध्यक्ष अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बड़े बेटे राहुल खड़गे हैं। कर्नाटक एयरोस्पेस पार्क विवाद में इस आवंटन ने नया मोड़ दिया।

  • उद्योग विभाग ने सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को सीए स्थल आवंटित किया।
  • आरटीआई कार्यकर्ता दिनेश कल्लाली ने आवंटन प्रक्रिया पर सवाल उठाया।
  • ट्रस्ट को ऑटोमोबाइल क्षेत्र का कोई पूर्व अनुभव नहीं था।

आरटीआई कार्यकर्ता दिनेश कल्लाली ने एयरोस्पेस पार्क जैसे उच्च सुरक्षा और संवेदनशील क्षेत्रों में नागरिक सुविधा (सीए) स्थल आवंटित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया। उद्योग विभाग यह बताने में विफल रहा कि बिना पूर्व अनुभव वाले ट्रस्ट को ज़मीन कैसे आवंटित की गई।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और आंदोलन को मिला समर्थन

विपक्षी भाजपा ने इस मामले को उठाया और राज्यपाल से शिकायत कर सीबीआई जाँच की माँग की। बाद में, खड़गे परिवार के स्वामित्व वाले ट्रस्ट ने विवाद के बाद ज़मीन वापस करने का फैसला किया। इस घटनाक्रम के बाद, किसानों ने यह कहते हुए आंदोलन तेज कर दिया कि सरकार उनकी कीमती ज़मीनें अमीर उद्योगपतियों को बेचने की योजना बना रही है, जिससे कर्नाटक एयरोस्पेस पार्क विवाद और मुखर हुआ।

  • विपक्षी भाजपा ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की।
  • खड़गे परिवार के स्वामित्व वाले ट्रस्ट ने बाद में जमीन वापस की।
  • दक्षिण भारतीय अभिनेता प्रकाश राज ने किसान आंदोलन का समर्थन किया।

दक्षिण भारतीय फ़िल्म अभिनेता प्रकाश राज समेत कई किसान संगठनों ने इस आंदोलन का समर्थन किया, जो कांग्रेस सरकार के लिए एक झटका था क्योंकि वह भाजपा के कट्टर विरोधी माने जाते हैं। यह आंदोलन कांग्रेस सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया।

जन आंदोलनों की सामूहिक विजय

संयुक्त होराता कर्नाटक और भूमि अधिग्रहण प्रतिरोध संघर्ष समिति ने इस जीत को जन आंदोलनों के एकजुट संघर्ष की सामूहिक जीत बताया है। उन्होंने “देवनहल्ली चलो” का आह्वान किया, “भूमि सत्याग्रह” जारी रखा और “ग्राम संकल्प समावेश” आयोजित किए। उन्होंने 14 जुलाई को “ग्राम संकल्प समावेश” में अपना एकजुट निर्णय सिद्ध किया: “चाहे हमारी जान चली जाए, हम अपनी ज़मीन नहीं देंगे।” इस दृढ़ता ने कर्नाटक एयरोस्पेस पार्क विवाद को निर्णायक मोड़ दिया।

  • संयुक्त होराता कर्नाटक ने इसे जन आंदोलनों की जीत बताया।
  • “देवनहल्ली चलो” और “भूमि सत्याग्रह” जैसे आयोजन हुए।
  • किसानों ने अपनी जमीन न देने का दृढ़ संकल्प दोहराया।

आज, 15 जुलाई को, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पूरी अधिसूचना को पूरी तरह से रद्द करने की घोषणा की। यह घोषणा “किसानों के खेती न छोड़ने के संकल्प और कर्नाटक के सभी जन संगठनों और नागरिकों द्वारा एकजुट होकर अपनी आवाज़ उठाने के ऐतिहासिक तरीके का सम्मान करते हुए” की गई।

किसान संघर्ष की प्रेरणा और व्यापक प्रभाव

अखिल भारतीय संयुक्त किसान सभा ने देवनहल्ली के चन्नारायपटना के वीर संघर्षशील किसानों को उनके 1200 दिनों के विजयी लोकतांत्रिक और न्यायपूर्ण संघर्ष के लिए तहे दिल से बधाई दी है। यह जीत भारत के किसानों को मोदी शासन द्वारा कृषि के निगमीकरण के खिलाफ उनके चल रहे संघर्षों में प्रेरणा देगी। कर्नाटक एयरोस्पेस पार्क विवाद का यह परिणाम एक नजीर बना है।

  • अखिल भारतीय संयुक्त किसान सभा ने किसानों को बधाई दी।
  • यह जीत भारत के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।
  • यह मजदूर वर्ग सहित अन्य वर्गों को भी प्रेरित करेगी।

यह जीत देश के अन्य वर्गों, विशेषकर मजदूर वर्ग को भी प्रेरित करेगी। यह जन आंदोलनों की शक्ति और जनता की आवाज़ के महत्व को दर्शाती है, जो सत्ताधारियों से सवाल पूछने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

औद्योगिक विकास बनाम किसानों के हित

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण वापस लेने का फ़ैसला केवल इसी क्षेत्र तक सीमित है, राज्य के उन हिस्सों तक नहीं जहाँ सरकार औद्योगिक उद्देश्यों के लिए ज़मीन अधिग्रहण करने की कोशिश कर रही है। कर्नाटक सरकार का मानना था कि राज्य इस उच्च-मूल्य वाले क्षेत्र में अपनी बढ़त खोने का जोखिम उठाएगा, खासकर आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे पड़ोसी राज्यों द्वारा रियायती दरों पर ज़मीन की पेशकश करने के कारण।

  • फैसला केवल देवनहल्ली क्षेत्र तक सीमित है, अन्य क्षेत्रों पर नहीं।
  • पड़ोसी राज्य रियायती दरों पर भूमि की पेशकश कर रहे हैं।
  • राज्य एयरोस्पेस और रक्षा उद्योगों में नेतृत्व बनाए रखना चाहता है।

इसलिए, सरकार ने बेंगलुरु के आसपास, विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया। इसका उद्देश्य राज्य का नेतृत्व बरकरार रखना और एयरोस्पेस तथा रक्षा उद्योगों में नवाचार, विनिर्माण और रोजगार को बढ़ावा देना था।

भूमि उपयोग नीति पर सार्वजनिक चर्चा की आवश्यकता

जन आंदोलनों ने सरकार से इस चर्चा में शामिल होने की अपील की है। यह घटना दर्शाती है कि विकास परियोजनाओं को स्थानीय समुदायों की सहमति और हितों को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ाना चाहिए। कर्नाटक एयरोस्पेस पार्क विवाद ने इस बहस को नया आयाम दिया है।

  • यह संघर्ष भूमि उपयोग नीति पर सार्वजनिक चर्चा का अवसर है।
  • कर्नाटक का विकास मॉडल क्या होना चाहिए?” पर चर्चा होनी चाहिए।
  • विकास परियोजनाओं में स्थानीय समुदायों की सहमति महत्वपूर्ण है।

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