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“कर्नाटक वंदे मातरम विवाद” सरकारी कार्यक्रमों में गाए जाएंगे ‘वंदे मातरम’

कर्नाटक वंदे मातरम विवाद

कर्नाटक वंदे मातरम विवाद कर्नाटक वंदे मातरम विवाद कर्नाटक सरकार ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक नया और महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग (DPAR) द्वारा 9 सितंबर को जारी इस आधिकारिक आदेश के अनुसार, राज्य सरकार के सामान्य सार्वजनिक और आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो पद (Stanzas) गाए जाएंगे।

हालाँकि, सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि यदि कार्यक्रम में भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्य के राज्यपाल मौजूद रहते हैं, तो ऐसी संवैधानिक हस्तियों की उपस्थिति वाले आयोजनों में पूरे छह पदों वाला संपूर्ण ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा।

नया प्रोटोकॉल लागू करने की वजह

राज्य सरकार के आदेश पत्र में कहा गया है कि यह फैसला कैबिनेट में हुई विस्तृत चर्चा के बाद लिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में होने वाले अलग-अलग सरकारी कार्यक्रमों के स्वरूप और संदर्भ के हिसाब से राष्ट्रीय गीत के गायन और वादन में एकरूपता, गरिमा और सही प्रोटोकॉल बनाए रखना है।

गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा राष्ट्रीय गीत के गायन और वादन के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग अवसरों की गंभीरता और संदर्भ के अनुसार इन नियमों का पालन केस-बाय-केस आधार पर किया जाएगा।

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‘वंदे मातरम’ को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस

कर्नाटक सरकार का यह आदेश ऐसे समय आया है जब पूरे देश में राष्ट्रीय गीत को लेकर कानूनी और राजनीतिक बहस जारी है:

संसद से नया संशोधन कानून: राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के पारित होने के बाद ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान ही कानूनी सुरक्षा प्राप्त हुई है। इसके तहत राष्ट्रीय गीत का अपमान करने या इसके गायन में बाधा डालने पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

केंद्र सरकार का रुख: केंद्र सरकार ने सार्वजनिक सभाओं और आधिकारिक कार्यक्रमों में पूरे राष्ट्रीय गीत के गायन को प्राथमिकता दी थी और इससे जुड़े नए मानक तय किए थे।

कांग्रेस पार्टी का ऐतिहासिक पक्ष: कांग्रेस का रुख हमेशा से 1937 के उस फैसले से प्रेरित रहा है, जिसमें महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस और सरदार पटेल की उपस्थिति में राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती पदों को गाने की बात कही गई थी।

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विपक्ष के निशाने पर आ सकती है राज्य सरकार

कर्नाटक सरकार द्वारा सामान्य राज्य स्तरीय कार्यक्रमों और देश के शीर्ष संवैधानिक पदों के कार्यक्रमों के बीच फर्क तय करने के इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज होने की संभावना है।

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भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी दल इसे राष्ट्रीय गीत का अनादर बताकर सरकार पर निशाना साध सकते हैं, जिससे राज्य में एक बार फिर राजनीतिक विवाद गहराने के आसार हैं।

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