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“लड़की बहिन योजना वेरिफिकेशन” : e-KYC की गलतियां अब होंगी ठीक

लड़की बहिन योजना वेरिफिकेशन

महाराष्ट्र की महायुति सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना’ को लेकर एक बड़ी अपडेट सामने आई है। लड़की बहिन योजना वेरिफिकेशन अब उन लाभार्थियों के लिए अनिवार्य हो गया है जिनके e-KYC फॉर्म भरते समय तकनीकी गलतियां हुई थीं।

राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने स्पष्ट किया है कि जिन महिलाओं ने e-KYC प्रक्रिया के दौरान गलत विकल्प चुन लिए थे, उनकी पात्रता की जांच करने के लिए अब डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के निर्देशन में आंगनवाड़ी वर्कर्स जमीनी स्तर पर फिजिकल वेरिफिकेशन करेंगी।

इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र महिला तकनीकी खामियों की वजह से ₹1,500 की मासिक आर्थिक सहायता से वंचित न रह जाए।

31 दिसंबर 2025 की डेडलाइन और तकनीकी बाधाएं

योजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए सरकार ने पहले सभी लाभार्थियों को e-KYC पूरा करने के लिए 31 दिसंबर 2025 तक का समय दिया था। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान पोर्टल पर डेटा फीडिंग और विकल्पों के चयन में बड़े पैमाने पर त्रुटियां देखी गईं।

इन गलतियों के कारण कई महिलाओं के पेमेंट रुक गए हैं, जिससे राज्य के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन की स्थिति भी बनी। सरकार ने माना है कि e-KYC फाइलिंग में हुई इन्हीं गलतियों की वजह से लाभार्थियों के खातों में राशि जमा करने में देरी हो रही है। अब प्रशासन इन त्रुटियों को सुधारने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहा है।

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मंत्री अदिति तटकरे ने सोशल मीडिया पर दी महत्वपूर्ण जानकारी

महिला एवं बाल कल्याण मंत्री अदिति तटकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा करते हुए इस पूरी स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने लिखा कि महाराष्ट्र में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, उनके स्वास्थ्य और पोषण स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में पारदर्शिता लाने के लिए लड़की बहिन योजना वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि चूंकि e-KYC के समय कई लाभार्थियों ने गलत विकल्प चुन लिए थे, इसलिए अब रीजनल लेवल पर आंगनवाड़ी वर्कर्स के जरिए घर-घर जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन करने के निर्देश सभी डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर्स को जारी कर दिए गए हैं।

आंगनवाड़ी वर्कर्स करेंगी घर-घर जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन

पहले यह काम केवल डिजिटल माध्यमों तक सीमित था, लेकिन अब आंगनवाड़ी वर्कर्स की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि पूर्व में भी उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके कार्यान्वयन में चुनौतियां आ रही थीं।

अब राज्य सरकार ने अपने निर्देशों को दोहराते हुए स्पष्ट किया है कि आंगनवाड़ी वर्कर प्रत्येक उस लाभार्थी के घर जाएंगी जिसका पेमेंट तकनीकी कारणों से रुका हुआ है।

यह वेरिफिकेशन ड्राइव दिवाली के समय से ही चर्चा में थी, जिसे अब और गति दी जा रही है ताकि 31 दिसंबर तक की समयसीमा के भीतर डेटा को शुद्ध किया जा सके और फर्जी लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें लिस्ट से बाहर किया जा सके।

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पात्रता के कड़े मानदंड और ₹1500 की मासिक सहायता

मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए है जिनकी आयु 21 से 65 वर्ष के बीच है और जिनके परिवार की वार्षिक आय ₹2.5 लाख से कम है। योजना के नियमों के अनुसार, पात्र महिलाओं को किसी अन्य सरकारी योजना से दोहरा लाभ (Double Benefit) लेने की अनुमति नहीं है।

पात्र पाए जाने पर लाभार्थियों के आधार से जुड़े बैंक खातों में सीधे ₹1,500 जमा किए जाते हैं। सरकार के नए प्रस्ताव के अनुसार, लाभ जारी रखने के लिए दो महीने के भीतर वेरिफिकेशन और ऑथेंटिकेशन पूरा करना अनिवार्य है। यदि आधार ऑथेंटिकेशन सफल नहीं होता है, तो भविष्य के फायदे रोक दिए जाएंगे।

पेमेंट में देरी और लाभार्थियों का बढ़ता आक्रोश

हाल के समय में BMC चुनाव के कई दिनों बाद भी कई महिलाएं अपनी जनवरी की किस्त का इंतजार कर रही हैं। भुगतान में इस देरी ने लाभार्थियों के बीच काफी भ्रम और गुस्सा पैदा किया है। कई महिलाएं बैंकों के चक्कर लगा रही हैं और कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं।

सरकार ने स्वीकार किया है कि e-KYC नियमों की जटिलता और उसमें हुई गलतियों के कारण भुगतान प्रक्रिया में रुकावट आई है। लड़की बहिन योजना वेरिफिकेशन के जरिए अब उन महिलाओं का मार्ग प्रशस्त होगा जिनका भुगतान अधर में लटका हुआ था, जिससे लाखों महिलाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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आवेदन प्रक्रिया और ई-केवाईसी को आसान बनाने की पहल

योजना का लाभ लेने के लिए पात्र महिलाएं आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं या नजदीकी सरकारी मदद केंद्र और CSC सेंटर पर जा सकती हैं। फर्जी लाभार्थियों को रोकने के लिए e-KYC को अनिवार्य बनाया गया था, लेकिन अब सरकार ने इसे और अधिक लचीला और मानवीय बना दिया है।

डायरेक्ट वेरिफिकेशन के माध्यम से जो महिलाएं पात्रता मानदंडों को पूरा करती हैं, उन्हें फिर से नियमित रूप से भुगतान मिलना शुरू हो जाएगा। मंत्री तटकरे के अनुसार, इस कदम से न केवल लाभार्थी सूची अपडेट होगी, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं की संतुष्टि और योजना की प्रभावशीलता भी सुनिश्चित होगी।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम

महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला उन लाखों महिलाओं के लिए आशा की किरण लेकर आया है जो तकनीकी कारणों से सिस्टम से बाहर हो गई थीं। लड़की बहिन योजना वेरिफिकेशन की इस नई प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होगा कि 2.5 लाख से कम आय वाले परिवारों की महिलाओं को उनका हक समय पर मिले।

सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता को मजबूत करना है। फिजिकल वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद, अपडेटेड लिस्ट के आधार पर ₹1,500 का नियमित लाभ बिना किसी बाधा के सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचना शुरू हो जाएगा, जिससे राज्य भर की महिलाओं में खुशी का माहौल है।

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