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 “लोढ़ा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट” महाराष्ट्र में ₹1.3 लाख करोड़ का निवेश

लोढ़ा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट

लोढ़ा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट मुंबई स्थित दिग्गज रियल एस्टेट डेवलपर, लोढ़ा डेवलपर्स (मैक्रोटेक डेवलपर्स लिमिटेड) ने भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा दांव खेला है। स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 के वैश्विक मंच पर लोढ़ा ग्रुप ने महाराष्ट्र सरकार के साथ एक महत्वपूर्ण मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस समझौते के तहत कंपनी ने राज्य में एक मेगा डेटा सेंटर पार्क विकसित करने के लिए ₹1 लाख करोड़ के अतिरिक्त निवेश का वादा किया है। इस नए निवेश के साथ ही इस प्रोजेक्ट में कुल निवेश की राशि बढ़कर अब ₹1.3 लाख करोड़ हो गई है, जो महाराष्ट्र के औद्योगिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है।

अभिषेक लोढ़ा और सीएम फडणवीस के विजन से मिली प्रोजेक्ट को नई रफ्तार

इस ऐतिहासिक समझौते पर लोढ़ा डेवलपर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ अभिषेक लोढ़ा ने हस्ताक्षर किए। 19 जनवरी को दावोस में हुई इस डील ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान भारत की ओर खींचा है। अभिषेक लोढ़ा ने इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व की जमकर सराहना की।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के विजन और ‘विकसित महाराष्ट्र’ की दिशा में किए जा रहे कार्यों ने कंपनी को इतने बड़े निवेश के लिए अटूट भरोसा दिया है। उनके अनुसार, राज्य पहले ही विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है और यह लोढ़ा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट उसी प्रगतिशील विजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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2.5 गीगावाट क्षमता के साथ बनेगा भारत का सबसे बड़ा डेटा सेंटर हब

तकनीकी विशिष्टताओं की बात करें तो यह प्रस्तावित डेटा सेंटर पार्क लगभग 2.5 गीगावाट (GW) की विशाल क्षमता वाला होगा। पूर्ण होने के बाद, यह न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे भारत का सबसे बड़ा डेटा सेंटर परिसर बन जाएगा।

कंपनी की योजना के अनुसार, यह प्रोजेक्ट कई चरणों में विकसित किया जाएगा और इसमें कई बड़े अंतरराष्ट्रीय और घरेलू डिजिटल प्लेयर्स शामिल होंगे। यह निवेश अगले कुछ वर्षों में लोढ़ा ग्रुप और उसके विभिन्न क्लाइंट्स के माध्यम से संयुक्त रूप से किया जाएगा, जिससे भारत को एक वैश्विक डेटा हब के रूप में पहचान मिलेगी।

ग्रीन इंटीग्रेटेड डेटा सेंटर पार्क पॉलिसी के तहत पर्यावरण अनुकूल विकास

यह पूरा प्रोजेक्ट महाराष्ट्र सरकार की ‘ग्रीन इंटीग्रेटेड डेटा सेंटर पार्क पॉलिसी 2024’ के दायरे में आता है। पिछले साल सितंबर में, लोढ़ा ने इसी नीति के तहत ₹30,000 करोड़ का प्रारंभिक समझौता किया था, जिसे अब बढ़ाकर ₹1.3 लाख करोड़ कर दिया गया है।

चूंकि डेटा सेंटर बिजली के बहुत बड़े उपभोक्ता होते हैं, इसलिए इस नीति का मुख्य उद्देश्य इन्हें पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। इस प्रोग्राम के तहत, डेटा सेंटर्स को ग्रीन और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से बिजली प्रदान की जाएगी। शुरुआती योजना के अनुसार, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में ऐसे तीन पार्क बनाए जाने हैं, जिनमें लोढ़ा का यह प्रोजेक्ट सबसे प्रमुख है।

पालावा में 350 एकड़ की जमीन पर तैयार होगा भविष्य का डिजिटल शहर

लोढ़ा ग्रुप के पास ठाणे के पास पालावा में 5,000 एकड़ से अधिक का विशाल लैंड बैंक है, जिसमें से लगभग 350 एकड़ भूमि विशेष रूप से इस लोढ़ा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए आवंटित की गई है।

लोढ़ा के इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन के मुताबिक, इस क्षेत्र की मांग इतनी अधिक है कि 2024 और 2025 में दो बड़े वैश्विक डेटा सेंटर दिग्गजों ने यहां अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। यहां जमीन के सौदों की कीमतें ₹21 करोड़ प्रति एकड़ तक पहुंच चुकी हैं, जो इस क्षेत्र की बढ़ती आर्थिक महत्ता को दर्शाता है।

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अमेज़न और STT ग्लोबल जैसे वैश्विक दिग्गजों की पहले ही एंट्री

इस मेगा प्रोजेक्ट की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स और क्लाउड कंपनी अमेज़न (Amazon) ने पहले ही इस पार्क के भीतर अपने डेटा सेंटर संचालन के लिए जमीन का एक बड़ा हिस्सा खरीद लिया है। अमेज़न ने अगले 15 वर्षों के लिए अपनी बिजली की जरूरतों का इंतजाम भी सुनिश्चित कर लिया है।

उनके साथ ही, सिंगापुर की मशहूर कंपनी STT ग्लोबल डेटा सेंटर्स ने भी इस पार्क में भूमि का अधिग्रहण किया है। लोढ़ा ग्रुप यहां न केवल जमीन उपलब्ध करा रहा है, बल्कि उन कंपनियों के लिए डेवलपर की भूमिका भी निभाएगा जो अपना सेटअप स्थापित करना चाहती हैं।

16,000 नई नौकरियां और आर्थिक विकास को मिलेगा जबरदस्त बूस्ट

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ₹1.3 लाख करोड़ के इस कुल निवेश से राज्य में रोजगार के विशाल अवसर पैदा होंगे। इस लोढ़ा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के पूरी तरह चालू होने के बाद लगभग 16,000 से अधिक प्रत्यक्ष (Direct) और अप्रत्यक्ष (Indirect) नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

लोढ़ा ग्रीन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के डायरेक्टर शैशव धारिया के अनुसार, कंपनी का लक्ष्य केवल जमीन बेचना नहीं है, बल्कि पावर शेल बिल्डिंग बनाना और उन्हें क्लाइंट्स को लीज पर देकर रेंटल इनकम जेनरेट करना है। कंपनी अब ‘बिल्ट-टू-सूट’ मॉडल पर भी काम कर रही है, जिससे निवेशकों को तैयार बुनियादी ढांचा मिल सके।

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AI और डेटा सेंटर: मॉडर्न इकॉनमी के लिए रेलवे और स्टीम इंजन जैसा बदलाव

दावोस में ज़ी बिजनेस से बात करते हुए अभिषेक लोढ़ा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर को भविष्य का गेम चेंजर बताया। उन्होंने इसकी तुलना 150 साल पहले के स्टीम इंजन और रेलवे से की, जिसने तब की वैश्विक अर्थव्यवस्था को बदल दिया था।

उनके अनुसार, जिस तरह विकास के लिए सड़कों और एयरपोर्ट्स की जरूरत होती है, वैसे ही आधुनिक डिजिटल युग में लोढ़ा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर ही अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित होंगे। अगले 5 से 20 वर्षों में AI जो बदलाव लाएगा, उसके लिए यह प्रोजेक्ट भारत को पूरी तरह तैयार कर देगा।

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