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मनसा देवी मंदिर भगदड़ में छह की मौत,बिजली अफवाह बनी वजह !

मनसा देवी मंदिर भगदड़

श्रावण मास के मौके पर उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर में भगदड़ से छह श्रद्धालुओं की जान चली गई। घटना रविवार सुबह उस वक्त हुई जब मंदिर में भारी भीड़ जमा थी। शुरुआती जांच के अनुसार, बिजली का झटका लगने की अफवाह फैलने के कारण श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई और भगदड़ मच गई।

मुख्य बिंदु :

  1. हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में भगदड़ मचने से छह श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि हुई।
  2. बिजली का झटका लगने की अफवाह फैलते ही श्रद्धालुओं में भगदड़ और अफरा-तफरी मच गई।
  3. मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने बचाव कार्य तेज करने के लिए प्रशासन को तुरंत निर्देश जारी किए।
  4. घायल श्रद्धालुओं को अस्पताल भेजा गया, 35 से अधिक की हालत गंभीर बताई जा रही है।
  5. श्रावण मास में मंदिर में भारी भीड़ उमड़ती है, पहले भी ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं।

घटना स्थल और स्थिति की जानकारी

  • यह हादसा मंदिर मार्ग की सीढ़ियों पर हुआ।
  • मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि एकदम से भगदड़ मची और लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे।
  • घायलों को हरिद्वार जिला अस्पताल और ऋषिकेश एम्स भेजा गया है।

गढ़वाल मंडल आयुक्त विनय शंकर पांडे ने कहा, “घटना की विस्तृत रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराई जाएगी। जांच प्रारंभ हो चुकी है।”

अफवाह बनी भगदड़ की वजह?

हरिद्वार के एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोभाल ने मीडिया को बताया:

“सीढ़ियों के पास किसी को बिजली का झटका लगने की अफवाह फैली, जिससे अचानक भगदड़ मच गई। 35 लोग घायल हुए, जिनमें से 6 की मौत हो चुकी है।”

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ट्वीट करते हुए कहा:

“हरिद्वार में हुई मनसा देवी मंदिर भगदड़ की घटना अत्यंत दुखद है। मैं मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूँ। प्रशासन से राहत कार्य की निगरानी जारी है।”

मुख्यमंत्री ने एसडीआरएफ, स्थानीय पुलिस, और प्रशासन को मौके पर तत्काल राहत कार्य चलाने का निर्देश दिया।

सावन मास और तीर्थों की भीड़

  • श्रावण मास के चलते उत्तर भारत के प्रमुख शिव स्थलों में अत्यधिक भीड़ उमड़ती है।
  • हरिद्वार में कांवड़ यात्रा और गंगाजल लेने के लिए लाखों श्रद्धालु आते हैं।
  • ऐसे में व्यवस्था की चूक से अक्सर इस तरह की घटनाएँ हो जाती हैं।

मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

  • 500 फीट ऊँचाई पर स्थित यह मंदिर पंच-तीर्थों में से एक है।
  • माँ मनसा देवी को “सर्पों की देवी” के रूप में पूजा जाता है।
  • यह मंदिर सिद्धपीठों में भी गिना जाता है, जहाँ मनोकामना पूरी होने की मान्यता है।

चश्मदीदों की ज़ुबानी

घायलों में शामिल एक महिला श्रद्धालु ने बताया:

“हम ऊपर की ओर बढ़ रहे थे कि तभी अचानक लोगों ने दौड़ना शुरू कर दिया। मैं गिर पड़ी, मेरा हाथ टूट गया।”

बार-बार दोहराई जाने वाली चूक?

देश में भीड़ प्रबंधन को लेकर यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले 2013 में रतनगढ़ मंदिर, मध्य प्रदेश में ऐसी ही भगदड़ में 115 लोग मारे गए थे।

हरिद्वार प्रशासन और उत्तराखंड सरकार को आगामी सावन में भीड़ नियंत्रण और अफवाहों से निपटने के लिए ठोस योजना बनानी होगी।

बचाव कार्य जारी, सवाल बाकी

इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर मनसा देवी मंदिर भगदड़ जैसे हादसों की पुनरावृत्ति को रोका नहीं जा सका है। प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया के बावजूद, भीड़ नियंत्रण में लापरवाही और अफवाहों पर अंकुश न लगाना गंभीर चिंता का विषय है।

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