मेघालय कोयला खदान विस्फोट: अवैध खनन में 23 की मौत
मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स में गुरुवार को हुआ भीषण हादसा अब एक बड़े मानवीय संकट में तब्दील हो चुका है। यहाँ एक अवैध रैट-होल कोयला खदान में कोयला निकालने के दौरान हुए डायनामाइट विस्फोट में अब तक कम से कम 23 मजदूरों की मौत हो गई है।
यह धमाका उस वक्त हुआ जब खदान के भीतर चट्टानों को तोड़ने के लिए डायनामाइट का इस्तेमाल किया जा रहा था। राज्य सरकार ने इस हृदयविदारक घटना की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं और मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन के खिलाफ अब कोई समझौता नहीं होगा। इस बीच, मेघालय पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए अवैध खदान के दो मालिकों को गिरफ्तार कर लिया है, जो स्थानीय निवासी बताए जा रहे हैं।
बचाव अभियान और मौत के बढ़ते आंकड़े
विस्फोट स्थल पर स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और SRT की टीमें गुरुवार से ही लगातार तलाशी और बचाव अभियान में जुटी हुई हैं। शुक्रवार को बचाव दल ने खदान के भीतर से चार और शव बरामद किए, जिससे मौके पर मरने वालों की संख्या 19 हो गई।
हालांकि, त्रासदी यहीं नहीं रुकी। गुरुवार को बरामद किए गए 18 शवों के बाद, अस्पताल में इलाज करा रहे घायलों में से भी एक मजदूर ने दम तोड़ दिया। इस प्रकार, मेघालय कोयला खदान विस्फोट में कुल मृतकों का आधिकारिक आंकड़ा अब 23 तक पहुँच गया है। राहत कार्यों के दौरान अभी भी कई अन्य मजदूरों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।
इसे भी पढ़ें: मेघालय हनीमून मर्डर कैसे 3 बार बचकर भी नहीं बच पाया राजा रघुवंशी ?
अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग
धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि जो लोग बच गए, वे भी बुरी तरह झुलस चुके हैं। नॉर्थ ईस्टर्न इंदिरा घाटी रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज (NEIGRIHMS) में कुल नौ पीड़ितों को भर्ती कराया गया था। इनमें से 35 वर्षीय नॉर बहादुर, जो 80 प्रतिशत से अधिक जल चुके थे, ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, दो अन्य घायल—राजू तमांग और जमील अहमद—की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। वे 75 से 80 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं और वर्तमान में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं।
अन्य घायल मजदूरों को वार्ड में शिफ्ट किया गया है, लेकिन वे अभी भी खतरे से पूरी तरह बाहर नहीं हैं। अस्पताल में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और परिजनों ने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया है।
पुलिसिया कार्रवाई और दो मालिकों की गिरफ्तारी
इस अवैध खनन कांड के बाद मेघालय पुलिस एक्शन मोड में है। पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने पुष्टि की है कि गिरफ्तार किए गए दोनों मालिक स्थानीय निवासी हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, इस मामले में और भी गिरफ्तारियां संभव हैं।
पुलिस महानिदेशक (DGP) आई. नोंगरांग ने 6 फरवरी, 2026 को जानकारी दी कि इस घटना के सिलसिले में एक और संदिग्ध की पहचान की गई है।
मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद पुलिस प्रशासन अब उन सभी कड़ियों को जोड़ रहा है जो इस अवैध धंधे के पीछे सक्रिय थीं। मेघालय कोयला खदान विस्फोट की इस घटना ने एक बार फिर कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसे भी पढ़ें: मेघालय हत्याकांड: एक खौफनाक साजिश का खुलासा
मुख्यमंत्री कोनराड संगमा का सख्त रुख
राज्य के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “जब जान की सुरक्षा की बात आती है तो कोई समझौता नहीं होगा।” उन्होंने पुलिस को दोषियों की जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री के आदेश पर कैबिनेट मंत्री लखमेन रिम्बुई और वाइलाडमिकी शिला घटनास्थल की ओर रवाना हो चुके हैं ताकि राहत और कानून-व्यवस्था की स्थिति का जायजा लिया जा सके। सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को 3 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की भी घोषणा की है।
असम सरकार ने बढ़ाया मदद का हाथ
इस हादसे में जान गंवाने वाले कई मजदूर पड़ोसी राज्य असम के थे। असम के मुख्यमंत्री ने पुष्टि की है कि मृतक मजदूरों में से तीन बराक घाटी के कटीगोरा के रहने वाले थे। असम सरकार ने अपने राज्य के मृतक मजदूरों के परिवारों के लिए 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि असम के मुख्य सचिव मेघालय के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि पीड़ितों की पहचान सुनिश्चित की जा सके। उत्तरी करीमगंज के विधायक ने भी पीड़ित परिवार के दो सगे भाइयों—निकुंज वैष्णव और कृष्ण वैष्णव—के घर जाकर संवेदना व्यक्त की और उन्हें सरकारी मदद का भरोसा दिलाया।
मेघालय में खनन त्रासदियों का काला इतिहास
यह कोई पहली बार नहीं है जब राज्य में इस तरह का हादसा हुआ है। मेघालय कोयला खदान विस्फोट ने साल 2018 की उस पुरानी याद को ताजा कर दिया है जब 15 खनिक 370 फीट गहरी खदान में फंस गए थे। उस समय भारतीय नौसेना सहित कई बड़ी एजेंसियों ने दो महीने तक रेस्क्यू चलाया था, लेकिन केवल दो शव ही मिल पाए थे।
रैट-होल माइनिंग, जो कि बेहद संकरी और असुरक्षित होती है, मजदूरों के लिए मौत का जाल साबित हो रही है। बावजूद इसके, अधिक दिहाड़ी (लगभग 2,000 रुपये प्रतिदिन) के लालच में असम और अन्य क्षेत्रों के गरीब मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर इन खदानों में उतरते हैं।
इसे भी पढ़ें: साजिश का पर्दाफाश: राजस्थान में पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर की पति की हत्या
अवैध खनन और शासन पर उठते गंभीर सवाल
भले ही हर हादसे के बाद जांच के आदेश दिए जाते हैं और चेतावनी जारी की जाती है, लेकिन हकीकत यह है कि मेघालय में अवैध खनन का कारोबार लगातार फल-फूल रहा है। 6 फरवरी, 2026 को हुआ यह विस्फोट कानून और शासन की विफलता का प्रतीक है।
चट्टानों को तोड़ने के लिए डायनामाइट का बेधड़क इस्तेमाल और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने 23 घरों के चिराग बुझा दिए हैं।
मेघालय कोयला खदान विस्फोट जैसी घटनाएं तब तक नहीं रुकेंगी जब तक कि अवैध खनन के सिंडिकेट को पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया जाता। फिलहाल, पूरा इलाका शोक में डूबा है और सबकी निगाहें बचाव दल पर टिकी हैं कि काश कोई और जिंदगी सुरक्षित बाहर आ सके।
इसे भी पढ़ें: गुवाहाटी हाई कोर्ट स्थानांतरण विवाद: CJI ने रखी आधुनिक परिसर की नींव



Post Comment