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4 लेन से 2 लेन वाले फ्लाईओवर पर आदित्य ठाकरे का तंज

4 लेन 2 लेन

मुंबई से सटे मीरा-भायंदर इलाके में एक नवनिर्मित फ्लाईओवर को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस छिड़ गई है। विवाद का मुख्य केंद्र फ्लाईओवर का वह हिस्सा है जहाँ यह 4 लेन से 2 लेन में अचानक तब्दील हो जाता है।

इस अजीबोगरीब बनावट का एक वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी दलों और स्थानीय नागरिकों ने इंजीनियरिंग पर सवाल उठाए हैं। शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने इस मामले में मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) को आड़े हाथों लिया है।

ठाकरे ने मंगलवार, 27 जनवरी को MMRDA की सफाई का मज़ाक उड़ाते हुए इसे “इंजीनियरिंग का मास्टरपीस” करार दिया। उन्होंने व्यंग्य कसते हुए यहाँ तक कह दिया कि लोगों को इस टीम का मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए, बल्कि अगले साल दूसरे देशों को यह अनोखा डिजाइन सिखाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) साइन किया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप और जनता का गुस्सा इस पूरे विवाद की शुरुआत ‘जेम्स ऑफ मीरा भायंदर’ (@GemsOfMBMC) नाम के एक सोशल मीडिया हैंडल द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो से हुई। इस क्लिप में दिखाया गया कि कैसे यह आलीशान दिखने वाला फ्लाईओवर अचानक संकरा हो जाता है।

वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया और इस पर करीब दस लाख व्यूज आ गए। स्थानीय निवासियों और नेटिज़न्स ने इसे ‘खतरनाक’ और ‘टैक्सपेयर्स के पैसे की बर्बादी’ बताया।

एक यूजर ने इसे ‘स्वर्ग का दरवाजा’ कहा, तो दूसरे ने सवाल किया कि क्या यह स्मार्ट प्लानिंग है या बनने के बाद की गई कोई गलती? लोगों का मानना है कि उद्घाटन के तुरंत बाद यह एक ‘एक्सीडेंटल जोन’ बन जाएगा और इसे बंद करना पड़ेगा।

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आदित्य ठाकरे का तीखा हमला और राजनीतिक तंज आदित्य ठाकरे ने इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने X पर लिखा कि इस तरह की डिजाइन की कमियां सड़कों पर अराजकता और ट्रैफिक जाम पैदा करेंगी। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार को घेरते हुए पूछा कि MMRDA के इंचार्ज मंत्री कौन हैं?

गौरतलब है कि MMRDA के चेयरमैन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे हैं। ठाकरे ने मज़ाक में कहा कि भविष्य में इस डिजाइन को विदेशों में पढ़ाने के लिए सरकार को समझौता करना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस टीम ने इसे बनाया है, उनकी ‘महानता’ पर उंगली नहीं उठानी चाहिए, क्योंकि यह तो दुनिया के लिए एक उदाहरण है।

MMRDA की विस्तृत सफाई: ‘अचानक पतला नहीं हुआ है पुल’ आलोचनाओं के घेरे में आने के बाद MMRDA ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अपना बचाव किया। अथॉरिटी ने स्पष्ट किया कि 4 लेन से 2 लेन का बदलाव कोई स्ट्रक्चरल डिफेक्ट या डिजाइन की कमी नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित फीचर है।

MMRDA के अनुसार, फ्लाईओवर को उपलब्ध सड़क की चौड़ाई और भविष्य की नेटवर्क कनेक्टिविटी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। विभाग ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया कि ढांचा “अचानक संकरा” हो जाता है। उनके मुताबिक, मौजूदा अलाइनमेंट मीरा-भायंदर क्षेत्र के लिए बनाई गई चरणबद्ध (Phased) कनेक्टिविटी योजना का हिस्सा है।

इंजीनियरिंग लॉजिक: भायंदर ईस्ट और वेस्ट की कनेक्टिविटी MMRDA ने इंजीनियरिंग के पीछे का तर्क समझाते हुए कहा कि फ्लाईओवर को भायंदर ईस्ट के लिए दो लेन और भायंदर वेस्ट के लिए दो और लेन के प्रावधान के साथ बनाया गया है।

क्योंकि अलाइनमेंट में भायंदर ईस्ट वाला हिस्सा पहले आता है, इसलिए वर्तमान में 4-लेन वाला हिस्सा 2 लेन में बदल जाता है। बाकी की दो बाहरी लेन भविष्य में वेस्टर्न रेलवे लाइन के ऊपर से भायंदर वेस्ट की ओर जाने वाले एक्सटेंशन का हिस्सा होंगी।

विभाग ने जोर देकर कहा कि यह डिजाइन इलाके के सबसे व्यस्त जंक्शनों को आसानी से पार करने में मदद करने के लिए बनाया गया है।

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गोल्डन नेस्ट सर्कल और राइट-ऑफ-वे की चुनौतियां फ्लाईओवर का निर्माण गोल्डन नेस्ट सर्कल के पास किया गया है, जो इस क्षेत्र का सबसे व्यस्त जंक्शन है जहाँ पाँच मुख्य सड़कें मिलती हैं। यहाँ फ्लाईओवर को 2+2 लेन के कॉन्फ़िगरेशन में बनाया गया है और यह मेट्रो कॉरिडोर के साथ एकीकृत है।

हालांकि, जंक्शन के आगे भायंदर ईस्ट की तरफ डेवलपमेंट प्लान (DP) के अनुसार उपलब्ध सड़क की जगह (Right-of-Way) कम हो जाती है। इसी कारण रेलवे फाटक रोड की ओर बिना किसी रुकावट के ट्रैफिक फ्लो सुनिश्चित करने के लिए 1+1 लेन का रैंप बनाया गया है। MMRDA ने कहा कि जमीन की कमी को देखते हुए यही सबसे व्यावहारिक समाधान था।

भविष्य की योजनाएं और सुरक्षा के कड़े इंतजाम भले ही वर्तमान में 4 लेन से 2 लेन का ढांचा विवादों में हो, लेकिन MMRDA ने भविष्य में इसे चौड़ा करने का आश्वासन दिया है। विभाग ने कहा कि दोनों कैरिजवे के बाहरी हिस्सों को पूरब-पश्चिम ट्रैफिक की निरंतरता के लिए एक-एक लेन और बढ़ाने का प्रस्ताव है, जो अभी प्लानिंग स्टेज पर है।

इसके अलावा, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुल पर रंबल स्ट्रिप्स, डेलिनेटर, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव टैग, डायरेक्शनल बोर्ड और एंटी-क्रैश बैरियर लगाए गए हैं। उद्घाटन से पहले किसी भी अन्य सुरक्षा उपाय के लिए ट्रैफिक पुलिस से मार्गदर्शन भी मांगा जा रहा है।

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कांग्रेस का हमला: ‘महाराष्ट्र का इंजीनियरिंग चमत्कार’ विवाद में कांग्रेस पार्टी ने भी कूदते हुए देवेंद्र फडणवीस सरकार और मौजूदा प्रशासन पर निशाना साधा। कांग्रेस ने इस प्रोजेक्ट का एरियल व्यू शेयर करते हुए इसे “महाराष्ट्र का इंजीनियरिंग चमत्कार” बताया।

पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारों के तहत जनता की सुरक्षा की अनदेखी कर ऐसे जानलेवा निर्माण किए जा रहे हैं। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि चाहे लोग दुर्घटनाओं में जान गंवाएं, सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उनकी कोई जवाबदेही नहीं है।

इस प्रकार, मीरा-भायंदर का यह 4 लेन से 2 लेन वाला फ्लाईओवर अब केवल इंफ्रास्ट्रक्चर का मुद्दा न रहकर एक बड़ा राजनीतिक संग्राम बन चुका है।

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