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नेक्स्टजेन जीएसटी सुधारों : जीवन सुगमता, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

नेक्स्टजेन जीएसटी सुधारों

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में घोषित नेक्स्टजेन जीएसटी सुधारों को एक नागरिक-केंद्रित पहल बताया है, जो देश में जीवन सुगमता, स्वास्थ्य सेवा और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी। ये सुधार भारत की दशक भर की आर्थिक सुधारों की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जिसमें कॉर्पोरेट कर में कटौती और व्यक्तिगत आयकर सरलीकरण जैसे उपाय शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से कर संरचनाएं सरल होंगी और एक अधिक न्यायसंगत तथा विकासोन्मुखी प्रणाली स्थापित होगी, जो भारत के मजबूत राजकोषीय अनुशासन को और सुदृढ़ करेगी।

जीवन सुगमता और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का नया अध्याय: नेक्स्टजेन जीएसटी सुधार

प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, नेक्स्टजेन जीएसटी सुधारों का मुख्य उद्देश्य आम आदमी के जीवन को आसान बनाना है। इन सुधारों के तहत, आवश्यक खाद्य पदार्थों, खाना पकाने की आवश्यक वस्तुओं और प्रोटीन युक्त उत्पादों पर जीएसटी दरों में कमी की गई है। इससे परिवारों की क्रय शक्ति बढ़ेगी और पोषण तक उनकी पहुँच सुनिश्चित होगी। प्रधानमंत्री ने इन सुधारों को आयुष्मान भारत और पोषण अभियान जैसी सरकारी योजनाओं से जोड़ते हुए कहा कि यह ‘स्वस्थ भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इसके अलावा, इन सुधारों में जीवन और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर महत्वपूर्ण कर राहत दी गई है, जो सरकार के ‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। नेक्स्टजेन जीएसटी सुधारों के तहत 33 जीवन रक्षक दवाओं पर शून्य कर लगाया गया है, जिससे दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की लागत कम होगी और जन औषधि केंद्रों तथा आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएँ अधिक सुलभ बनेंगी।

मध्यम वर्ग और एमएसएमई को सशक्त बनाना

प्रधानमंत्री ने भारत के मेहनती मध्यम वर्ग के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि जीएसटी सुधारों से टेलीविजन, एयर कंडीशनर और अन्य घरेलू उत्पाद अधिक किफायती हो जाएंगे, जिससे करोड़ों परिवारों की आकांक्षाओं को समर्थन मिलेगा।

ये सुधार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और विनिर्माण क्षेत्र के लिए भी बहुत लाभदायक माने जा रहे हैं। सरल कर स्लैब (5% और 18%), डिजिटल अनुपालन और तर्कसंगत दरों से लागत में कमी आएगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि ये सुधार ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को बढ़ावा देंगे और निर्यात को भी गति देंगे, जिससे समग्र रूप से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

राज्यों की चिंताएँ और आर्थिक विशेषज्ञों की राय

जहाँ एक ओर केंद्र सरकार जीएसटी सुधारों के सकारात्मक प्रभावों पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर कई राज्य राजस्व के नुकसान को लेकर चिंतित हैं। दो प्रमुख कर स्लैब (12% और 28%) को खत्म करने से ₹48,000 करोड़ के राजस्व नुकसान का अनुमान है। हिमाचल प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, पंजाब, पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे राज्यों ने केंद्र से राजस्व घाटे की भरपाई के लिए एक तंत्र स्थापित करने का आग्रह किया है।

केरल के वित्त मंत्री के.एन. बालगोपाल ने बताया कि उनके राज्य को सालाना ₹8,000-10,000 करोड़ का नुकसान हो सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार को उम्मीद है कि उपभोक्ता मांग में वृद्धि से कर राजस्व में बढ़ोतरी होगी।

स्टैंडर्ड चार्टर्ड ग्लोबल रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी में कटौती से भारत की जीडीपी में 0.1-0.16% की वृद्धि हो सकती है और मुद्रास्फीति में 40-60 आधार अंकों की कमी आ सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन सुधारों से व्यापार करने में आसानी होगी, जिससे मध्यम अवधि की विकास संभावनाओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

ऑटोमोबाइल, क्लीन एनर्जी और लॉजिस्टिक्स पर प्रभाव

जीएसटी सुधारों से ऑटोमोबाइल, स्वच्छ ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। यात्री बसों, वाणिज्यिक मालवाहक वाहनों और सीमेंट पर जीएसटी को 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है, जिससे इन क्षेत्रों की लागत में कमी आएगी और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इन सुधारों को “हरित भारत के लिए जीएसटी सुधार” बताते हुए कहा कि यह भारत की स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन की यात्रा को मजबूत करेगा। सौर पैनलों, पवन टर्बाइनों और अपशिष्ट उपचार सेवाओं पर कर में कटौती से देश के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

हालाँकि, इलेक्ट्रिक वाहनों पर 5% कर बरकरार है, जबकि कई पेट्रोल-डीजल कारों पर जीएसटी 28% से घटकर 18% हो गया है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कर लाभ का अंतर कम हो जाएगा, जिससे इनकी बिक्री प्रभावित हो सकती है। इसी तरह, 350 सीसी से अधिक क्षमता वाली मोटरसाइकिलों पर 40% की उच्च दर उच्च श्रेणी के वाहनों की बिक्री को प्रभावित कर सकती है।

कुल मिलाकर, ये नेक्स्टजेन जीएसटी सुधार एक व्यापक, नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करते हैं जो भारत के आर्थिक विकास, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण को मजबूत करता है।

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