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पम्बा अयप्पा संगमम: सबरीमाला तैयारी और सियासी घमासान

पम्बा अयप्पा संगमम

केरल के पथानामथिट्टा जिले में, पम्बा नदी के तट पर, पम्बा अयप्पा संगमम के लिए तैयारियां अपने चरम पर हैं, जिसने राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे।

संगमम स्थल पर तीन जर्मन शैली के टेंट बनाए गए हैं, जिनमें मुख्य आयोजन स्थल शामिल है। मंच 2,400 वर्ग फुट में फैला है और इसकी ऊंचाई चार फीट है। इस आयोजन में 3,000 प्रतिनिधियों के बैठने की व्यवस्था की गई है, जबकि मीडिया और ग्रीन रूम पास में ही बनाए गए हैं।

श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए, आयोजकों ने अस्थायी ढाँचे भी तैयार किए हैं, जिन्हें शिखर सम्मेलन के बाद हटा दिया जाएगा।

पर्यावरण संतुलन और श्रद्धालुओं की सुविधा का संतुलन

आयोजकों ने इस बात पर जोर दिया है कि पम्बा अयप्पा संगमम स्थल को पारिस्थितिकी तंत्र को बिना नुकसान पहुँचाए विकसित किया गया है। मणप्पुरम में, 43,000 वर्ग फुट का एक विशाल आयोजन क्षेत्र तैयार किया गया है। इसके अलावा, पहाड़ी की चोटी पर दो और पंडाल बनाए गए हैं, जहाँ भोजन और चर्चाओं का आयोजन होगा।

त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने अपनी प्लेटिनम जयंती के अवसर पर एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई है। यह आयोजन तीर्थयात्रा, परंपरा और पर्यावरण के बीच एक संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

तीन सत्रों में होगा विचार-विमर्श: मास्टर प्लान से भीड़ प्रबंधन तक

शिखर सम्मेलन में तीन समानांतर सत्रों का आयोजन होगा, जो सबरीमाला के तीर्थयात्रियों के हितों और भविष्य की योजनाओं पर केंद्रित होंगे। पहले सत्र में सबरीमाला के लिए एक दीर्घकालिक मास्टर प्लान की समीक्षा की जाएगी, जबकि दूसरे सत्र में आध्यात्मिक पर्यटन सर्किट में सबरीमाला को शामिल करने पर चर्चा होगी।

तीसरे सत्र में पुलिस, डॉक्टर और तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर भीड़ प्रबंधन की चुनौतियों और समाधान पर विचार-विमर्श करेंगे। ये तीनों सत्र सबरीमाला के विकास और धार्मिक अनुभव को बेहतर बनाने पर केंद्रित हैं।

मालाबार देवस्वोम बोर्ड के आदेश पर उच्च न्यायालय की रोक

इस बीच, केरल उच्च न्यायालय ने मालाबार देवस्वोम बोर्ड (MDB) के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें मंदिर के धन से अधिकारियों के खर्च उठाने की अनुमति दी गई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि मंदिर की संपत्ति एक ट्रस्ट की संपत्ति है, जिसका उपयोग केवल भक्तों के कल्याण के लिए होना चाहिए।

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब कई मंदिर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और कर्मचारियों के वेतन में देरी हो रही है। इस आदेश को अवैध और भक्तों के अधिकारों का उल्लंघन करार दिया गया है। पम्बा अयप्पा संगमम के लिए चल रही तैयारियों के बीच न्यायिक हस्तक्षेप ने इस मुद्दे पर विवाद को और गहरा कर दिया है।

शिखर सम्मेलन के पोस्टरों से भगवान अयप्पा की छवि गायब, विपक्ष का हमला

आयोजन से जुड़े एक और बड़े विवाद ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। विपक्ष ने प्रचार पोस्टरों से भगवान अयप्पा की छवि गायब होने पर सरकार पर तीखा हमला बोला है। पोस्टरों में सिर्फ मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों की तस्वीरें प्रमुखता से दिखाई गई हैं।

भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर ने इसे ‘राजनीतिक दिखावा’ बताया, जबकि कांग्रेस नेता वीडी सतीसन ने कटाक्ष करते हुए कहा, “पम्बा अयप्पा संगमम में अयप्पा ही नहीं हैं।” विरोधियों ने इस सम्मेलन को ‘श्रद्धा का राजनीतिकरण’ करार दिया है।

सोने की मूर्तियों का कथित वजन विवाद और अयप्पा संगमम का संबंध

सबरीमाला मंदिर से जुड़ी 4 किलो सोने की मूर्तियों की कथित चोरी को लेकर सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार इस मुद्दे को दबाने के लिए इस संगमम का आयोजन कर रही है। वीडी सतीसन ने सीधे तौर पर सवाल किया, “सोना कहाँ गया और क्यों छिपाया गया?”

उन्होंने कहा कि लोगों का विश्वास जीतने से पहले सरकार को इस मामले में जवाब देना चाहिए। इस विवाद ने पम्बा अयप्पा संगमम के मंच को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।

केसी वेणुगोपाल का मुख्यमंत्री पर हमला: पाखंड या परंपरा का संरक्षण?

राज्यसभा सदस्य केसी वेणुगोपाल ने मुख्यमंत्री पर सबरीमाला की परंपराओं को तोड़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने सीएम को ‘आस्था का झूठा रक्षक’ बताते हुए कहा कि सबरीमाला में कोई वास्तविक विकास नहीं हुआ, बल्कि सिर्फ प्रचार हुआ है।

वेणुगोपाल ने सरकार पर श्रद्धालुओं की भावनाओं से खेलने का आरोप लगाते हुए पूछा कि क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट में दाखिल विवादित हलफनामे को वापस लेगी?

सरकार का जवाब: विपक्ष की हताशा का प्रतीक है विरोध

देवस्वोम मंत्री वासवन ने इन सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि विपक्ष हर मोर्चे पर विफल होने के बाद अब इस आयोजन को रोकने की साजिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में भी असफलता मिली है।

उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा में आरएसएस की गैरमौजूदगी भी एक मुद्दा है। सरकार ने यह भी बताया कि विदेशी प्रतिनिधियों की भागीदारी के साथ सभी तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। सरकार का कहना है कि यह आयोजन धार्मिक सद्भाव और श्रद्धा का प्रतीक है।

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