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पटना हाईकोर्ट कांग्रेस निर्देश: पीएम और मां का एआई वीडियो हटाने का आदेश

पटना हाईकोर्ट कांग्रेस निर्देश

पटना हाईकोर्ट कांग्रेस निर्देश बिहार कांग्रेस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां का एक AI-जनरेटेड वीडियो अपने सोशल मीडिया हैंडल से हटाने का निर्देश दिया है। यह फैसला अधिवक्ता विवेकानंद सिंह और अन्य द्वारा दायर एक याचिका पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पीबी बजंथरी और न्यायमूर्ति आलोक कुमार सिन्हा की पीठ ने दिया।

याचिका में इस वीडियो को “अपमानजनक प्रकाशन” बताते हुए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत राजनीतिक दलों पर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन बताया गया था।

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एन. सिंह ने पीटीआई को बताया कि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि वीडियो अगली सुनवाई तक हटा लिया जाएगा।

इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख आदेश पत्र में उल्लेखित की जाएगी, जिसे हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।

याचिका में कौन-कौन शामिल?

याचिका में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को भी प्रतिवादी बनाया गया है। चुनाव आयोग के वकील सिद्धार्थ प्रसाद ने बताया कि अदालत ने फेसबुक, ट्विटर और गूगल को भी नोटिस जारी कर अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

पीठ ने मेटा प्लेटफॉर्म्स, गूगल इंडिया (यूट्यूब) और एक्स (ट्विटर) इंडिया, जो प्रतिवादी संख्या 6 से 8 हैं, को यह भी निर्देश दिया कि वे इस वीडियो क्लिपिंग को आगे प्रसारित न करें ताकि “आगे किसी भी तरह के नुकसान से बचा जा सके”।

क्या था इस वीडियो में?

बिहार कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधने के लिए अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें हिंदी में लिखा था, “साहब के सपनों में आई माँ। देखिए रोचक संवाद।” इस वीडियो में पीएम मोदी अपनी मां हीराबेन मोदी के बारे में सपना देखते हुए दिखाई दे रहे थे, जहां उनकी मां उनकी राजनीति की आलोचना करती दिख रही थीं।

याचिकाकर्ता विवेकानंद सिंह ने तर्क दिया कि यह वीडियो “घृणित, शर्मनाक, अरुचिकर और अपमानजनक” था क्योंकि यह प्रधानमंत्री की दिवंगत मां की गरिमा का उल्लंघन करता है। उन्होंने यह भी प्रस्तुत किया कि वीडियो राहुल गांधी की जानकारी में पोस्ट किया गया था।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार ने दलील दी कि यह वीडियो पितृ पक्ष के पवित्र काल के दौरान जारी किया गया था, जब प्रधानमंत्री अपनी दिवंगत माँ के लिए अनुष्ठान कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वीडियो में प्रधानमंत्री की माँ उन्हें नोटबंदी जैसी नीतियों के लिए फटकार लगा रही थीं, जबकि नोटबंदी को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है। उन्होंने दलील दी, “प्रधानमंत्री पर सबसे बुरा आरोप लगाया गया है।”

भाजपा और कांग्रेस की प्रतिक्रिया

इस वीडियो के सामने आने के बाद भाजपा और उसके सहयोगियों ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जिसके बाद देश भर में विरोध प्रदर्शन भी हुए। भाजपा दिल्ली चुनाव प्रकोष्ठ के संयोजक संकेत गुप्ता ने 13 सितंबर को दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में बिहार कांग्रेस इकाई के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस वीडियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां की छवि को “धूमिल” किया है और “कानून, नैतिकता और महिलाओं की गरिमा का घोर उल्लंघन किया है”।

वहीं, कांग्रेस ने बचाव करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री या उनकी मां का कोई अनादर नहीं किया गया। कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा, “उन्हें क्या आपत्ति है?

सिर्फ़ इसलिए कि एक माँ अपने बेटे को कुछ सही करने की शिक्षा दे रही है। इसमें अनादर कहाँ है, न तो उस माँ का, जिसका हम बहुत सम्मान करते हैं, और न ही बेटे का।”

कोर्ट का फैसला और मौलिक अधिकार

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पीबी बजंथरी और न्यायमूर्ति आलोक कुमार सिन्हा की पीठ ने निजता और सम्मान के अधिकार को व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हिस्सा बताते हुए मध्यस्थों को वीडियो का प्रसार रोकने का निर्देश दिया। पीठ ने केएस पुट्टस्वामी, नालसा फाउंडेशन और सुब्रमण्यम स्वामी जैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यह वीडियो व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।

पटना हाईकोर्ट कांग्रेस निर्देश का यह फैसला एआई-जनरेटेड सामग्री के दुरुपयोग पर एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल कायम करता है। पटना हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि भले ही यह एक राजनीतिक व्यंग्य हो, लेकिन यह व्यक्तिगत सम्मान और निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकता, खासकर जब यह किसी दिवंगत व्यक्ति से संबंधित हो। इस मामले में पटना हाईकोर्ट कांग्रेस निर्देश एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है, जो भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक दिशा तय करेगा।

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