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पीएम मोदी मणिपुर दौरा में शांति की आस: से पहले अहम घटनाक्रम

पीएम मोदी मणिपुर दौरा

पीएम मोदी मणिपुर दौरा से पहले, राज्य में एक बड़ा और सकारात्मक घटनाक्रम सामने आया है। दशकों से जातीय संघर्ष से जूझ रहे मणिपुर में शांति स्थापित करने के प्रयासों को तब नई गति मिली, जब कुकी-ज़ो परिषद (KZc) ने यात्रियों और आवश्यक वस्तुओं की सुगम आवाजाही के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग 2 को फिर से खोलने पर सहमति व्यक्त की। यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों और केजेडसी के एक प्रतिनिधिमंडल के बीच कई महत्वपूर्ण विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। इस सहमति के साथ, कुकी-ज़ो परिषद ने अपने उग्रवादी शिविरों को स्थानांतरित करने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए केंद्र द्वारा तैनात सुरक्षा बलों के साथ सहयोग करने का भी संकल्प लिया है।

कुकी-ज़ो समूहों के साथ ऐतिहासिक समझौता

केंद्र और मणिपुर सरकारों ने कुकी-ज़ो समूहों के साथ एक संशोधित त्रिपक्षीय ऑपरेशन निलंबन (एसओओ) समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते में दीर्घकालिक शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में कई अहम कदम शामिल हैं, जिसमें मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी जताई गई है। संशोधित समझौते के तहत, निर्धारित शिविरों की संख्या कम की जाएगी और हथियारों को नज़दीकी सीआरपीएफ या बीएसएफ शिविरों में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके अलावा, सुरक्षा बलों द्वारा कैडरों का कठोर भौतिक सत्यापन किया जाएगा, ताकि किसी भी विदेशी नागरिक की पहचान करके उसे सूची से हटाया जा सके।

नए नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए एक संयुक्त निगरानी समूह का गठन किया जाएगा। गृह मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि किसी भी उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा और ज़रूरत पड़ने पर एसओओ समझौते की समीक्षा भी की जा सकती है। कुकी-ज़ो परिषद ने इस नए समझौते के तहत अपने उग्रवादी शिविरों को स्थानांतरित करने और शांति बनाए रखने में सहयोग करने का फैसला किया है, जो शांति बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मणिपुर का जातीय संघर्ष: एक संक्षिप्त अवलोकन

मणिपुर में अशांति पहली बार मई 2023 में भड़की थी और तब से इस क्षेत्र में गंभीर अस्थिरता बनी हुई है। इस संघर्ष की जड़ राज्य के दो सबसे बड़े जातीय समूहों – बहुसंख्यक मैतेई और अल्पसंख्यक कुकी समुदायों – के बीच भूमि और प्रभाव को लेकर दशकों पुराने संघर्ष में निहित है। तनाव तब और बढ़ गया जब कुकी समुदाय ने मैतेई समुदाय को आधिकारिक आदिवासी का दर्जा दिए जाने की मांग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कुकी लोगों का तर्क था कि यह दर्जा मैतेई समुदाय की पहले से ही प्रभावी स्थिति को और मज़बूत करेगा और उन्हें कुकी-बहुल इलाकों में ज़मीन खरीदने या बसने का मौका भी मिल सकता है।

इस हिंसा में अब तक 60 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है। राज्य में वर्तमान में राष्ट्रपति शासन लागू है, जो 9 फरवरी को तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफ़े के बाद 13 फरवरी, 2025 तक लागू रहेगा।

प्रधानमंत्री मोदी के दौरे की योजना

उपरोक्त घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मणिपुर यात्रा से ठीक पहले हुआ है, जो मई 2023 से हिंसा का दंश झेल रहा है। जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी सबसे पहले मिज़ोरम जाएँगे, जहाँ वे 51.38 किलोमीटर लंबी नई बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन का उद्घाटन करेंगे। मिज़ोरम में तैयारियों के बीच, इंफाल के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री के दौरे के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। हालांकि, मणिपुर में शांति स्थापित करने के लिए पीएम मोदी मणिपुर दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जीएसटी सुधार और राजनीतिक समाधान की आवश्यकता

इस बीच, एक अलग घटनाक्रम में, जीएसटी सुधारों को लेकर भी चर्चा हुई है। अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए जीएसटी को तर्कसंगत बनाया गया है, लेकिन नए नियम और तकनीकी बातें भी सामने आई हैं, जैसे मोटरबाइकों की इंजन क्षमता, कार का प्रकार और होटल के किराए की मूल्य सीमा। सरकार को मांग बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए एक और साहसिक कदम की आवश्यकता है।

मणिपुर के संदर्भ में, दो साल के गतिरोध के बाद, एसओओ समझौते का विस्तार और राष्ट्रीय राजमार्ग का उद्घाटन सकारात्मक कदम हैं। पीएम मोदी मणिपुर दौरा भी मायने रखता है, लेकिन केवल इन्हीं कदमों से जातीय ज़ख्म नहीं भर सकते। मणिपुर को एक स्थायी राजनीतिक समाधान की ज़रूरत है, जिसके लिए पहले एक लोकप्रिय सरकार की स्थापना ज़रूरी है।

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