“ऑपरेशन सिंदूर: राजनाथ सिंह का नए भारत का संकल्प”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में ‘नए भारत का संकल्प‘ पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय सैनिकों ने आतंकवादियों को उनके धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि उनके कर्मों के आधार पर मारा है। जोधपुर में एक रक्षा एवं खेल अकादमी के उद्घाटन के दौरान उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के निर्णायक जवाब और उसके पीछे के सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के सिद्धांत में विश्वास करता है और जाति या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करता।
राजनाथ सिंह ने बताया कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में आतंकवादियों ने लोगों की पहचान उनके धर्म के आधार पर की और 26 निर्दोष लोगों की जान ले ली। इसके बाद, भारतीय सशस्त्र बलों ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओजेके (पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर) में “सटीक हमले” किए। इस ऑपरेशन में भारतीय वायु सेना ने छह पाकिस्तानी विमानों को मार गिराया, जिसमें पाँच लड़ाकू विमान और एक उच्च-मूल्य निगरानी प्लेटफ़ॉर्म शामिल था। इसके साथ ही, नौ आतंकवादी शिविरों को भी निशाना बनाया गया। भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने हमलों के पहले और बाद की तस्वीरें साझा करके भारत के हमलों के सबूत भी पेश किए।
नागरिकों का समर्थन और ऑपरेशन महादेव
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का एक और महत्वपूर्ण पहलू सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों का अटूट समर्थन था। राजनाथ सिंह ने कहा कि नागरिकों का यह सहयोग इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सरकार या सशस्त्र बलों की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं के उत्साह और दृढ़ संकल्प की भी प्रशंसा की, जिन्होंने इस ऑपरेशन के दौरान अपनी देशभक्ति का परिचय दिया। उन्होंने इस ऑपरेशन को ‘नए भारत के संकल्प‘ का प्रतीक बताया।
वहीं, संसद के मानसून सत्र के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने ऑपरेशन महादेव के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के पीड़ितों की हत्या में शामिल तीन आतंकवादियों – सुलेमान शाह, हमजा अफगान और जिब्रान भाई – को ऑपरेशन महादेव में मार गिराया गया है। शाह ने बताया कि दाचीगाम से बरामद हथियारों, एक एम9 कार्बाइन और दो एके 47 राइफलों की चंडीगढ़ सेंट्रल फोरेंसिक साइंसेज लेबोरेटरी (सीएफएसएल) में जांच की गई और पहलगाम हमले स्थल पर मिले खोखों का राइफलों की बैरल से मिलान किया गया, जिससे यह पुष्टि हुई कि इन राइफलों का इस्तेमाल पहलगाम हमले में किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि परवेज अहमद जोथर और बशीर अहमद जोथर सहित चार व्यक्तियों ने इन आतंकवादियों को हमले से एक दिन पहले शरण और भोजन दिया था, जिन्हें 22 जून को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गिरफ्तार कर लिया था।
बातचीत की भाषा और शिक्षा में बदलाव
राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों की आलोचना करते हुए कहा कि भारत ऐसे देशों के साथ बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि बातचीत केवल सभ्य और लोकतांत्रिक देशों के साथ ही संभव है, न कि उन देशों के साथ जो धार्मिक कट्टरता और भारत के प्रति घृणा से प्रेरित हैं। उन्होंने लोकसभा में कहा था, “आतंकवाद की भाषा भय, खून और नफरत है, बातचीत नहीं।” उन्होंने आगे कहा कि “बातचीत की आवाज़ गोलियों की बौछार में दबा दी जाती है।”
सिंह ने शिक्षा क्षेत्र में हो रहे बदलावों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा में जो अंतर अब देखा जा रहा है, वही भारत की असली ताकत है। उन्होंने कहा कि यही असली बदलाव है और यही भारत का भविष्य है। इसके अलावा, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने भी ऑपरेशन सिंदूर पर नए मॉड्यूल जारी किए हैं, और इसे “एक सैन्य सफलता, एक तकनीकी सफलता और एक राजनीतिक संदेश” के रूप में प्रस्तुत किया है, जो युवाओं को देश की सुरक्षा से संबंधित चुनौतियों से अवगत कराएगा।
यह ऑपरेशन वास्तव में ‘नए भारत के संकल्प’ का उदाहरण है, जो यह साबित करता है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में मानवता और न्याय के सिद्धांतों पर अडिग है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और जो लक्ष्य निर्धारित किया गया था, उसे सटीक निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि जहाँ आतंकवादियों ने “अपने धर्म के आधार पर” निर्दोष लोगों की हत्या की, वहीं भारतीय सेना ने “अपने कर्म के आधार पर” उन्हें शरण देने वालों को नष्ट कर दिया। यह भारत की दृढ़ता और ‘सभ्य और लोकतांत्रिक‘ राष्ट्र के रूप में उसकी पहचान का भी प्रमाण है।



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