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जन सुराज को झटका पीके चुनाव से हटे, 150 सीटों पर आरोप,

जन सुराज को झटका

जन सुराज को झटका बिहार विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बुधवार को यह घोषणा करके सभी को चौंका दिया कि वह आगामी चुनाव नहीं लड़ेंगे। किशोर, जो पहले अपने जन्मस्थान रोहतास जिले के करगहर या अपनी कर्मभूमि राघोपुर (वैशाली) से चुनाव लड़ने का संकेत दे चुके थे, ने अब इस फैसले को ‘बड़े दल के हित’ में लिया गया सामूहिक निर्णय बताया है।

यह फैसला उनकी पार्टी द्वारा राजद नेता तेजस्वी यादव के निर्वाचन क्षेत्र राघोपुर से एक कम चर्चित कार्यकर्ता चंचल सिंह को मैदान में उतारने के एक दिन बाद आया है।

किशोर ने स्पष्ट किया कि पार्टी ने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि उनके कंधों पर ‘बहुत सारी ज़िम्मेदारियाँ’ हैं। उनका मानना है कि यदि वह चुनाव लड़ते हैं तो इससे ‘2-4-5 दिन जो नुक्सान होगा, उससे जन सुराज के कई प्रत्याशियों को नुक्सान हो सकता है।’

उन्होंने आगे कहा, “इसलिए, व्यापक पार्टी हित में, मुझे पार्टी के संगठनात्मक कार्यों को आगे बढ़ाने और उम्मीदवारों के लिए प्रचार अभियान शुरू करने का काम सौंपा गया है।” पार्टी ने पहले ही करगहर सीट से रितेश रंजन पांडे को मैदान में उतार दिया था।

‘150 से कम सीटें हार’: प्रतिद्वंद्वियों की नज़र में यह ‘मुंगेरीलाल का हसीन सपना’

प्रशांत किशोर ने चुनाव न लड़ने के अपने फैसले पर पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए भावनात्मक आधार तैयार करने की कोशिश की, लेकिन उनके प्रतिद्वंद्वी दलों ने इस घोषणा का जमकर मज़ाक उड़ाया। विशेष रूप से, किशोर ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि उनकी पार्टी के लिए “150 से कम सीटें” जीतना हार माना जाएगा।

उनके इस अत्यधिक महत्वाकांक्षी दावे को केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने दिवास्वप्न करार देते हुए, एक लोकप्रिय टेलीविज़न सीरीज़ का ज़िक्र किया और इसे “मुंगेरीलाल के हसीन सपने” बताया। सिंह ने सीधे तौर पर हमला करते हुए कहा कि किशोर को एहसास हो गया था कि वह चुनाव नहीं जीत पाएँगे, और इसीलिए उन्होंने चुनाव न लड़ने की घोषणा की।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जन सुराज पार्टी राजद की ‘बी’ टीम है और यह केवल एक वोटकटवा (दूसरों के वोट काटने वाली पार्टी) बनकर रह जाएगी, जिसने पार्टी बनाने में किया गया अपना सारा ‘निवेश’ वसूल कर लिया है।

विपक्षी दलों ने बताया ‘हार की स्वीकृति’, ‘बुलबुला फूटा’

प्रशांत किशोर के इस कदम को विपक्षी दलों ने चुनाव से पहले ही जन सुराज को झटका लगना और अपनी हार स्वीकार कर लेना बताया है। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने तंज कसते हुए कहा कि किशोर ने “रणभूमि में जाने से पहले ही अपनी जन सुराज पार्टी की हार स्वीकार कर ली है।”

तिवारी ने कहा कि किशोर को एहसास हो गया है कि उन्हें और उनकी पार्टी को अपमानजनक हार का सामना करना पड़ेगा और उन्हें यह समझना चाहिए कि ‘राजनीति राजनीतिक दलों को सलाह देने जितना आसान नहीं है।’ उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘किशोर का टायर पंक्चर हो गया है।’

भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी इसी सुर में टिप्पणी करते हुए कहा, “चुनाव से पहले ही किशोर का बुलबुला फूट गया।” उन्होंने इसे किशोर द्वारा अपनी और उनकी पार्टी की हार स्वीकार करना बताया। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने इसे राजनीतिक वास्तविकताओं पर आधारित एक “व्यावसायिक निर्णय” बताया, जो सिर्फ़ ‘कमज़ोरी और आत्मविश्वास की कमी का संकेत’ है।

पूनावाला ने कहा कि शायद एनडीए के मज़बूत जनादेश के साथ सरकार बनाने की संभावना को देखते हुए, उन्होंने पीछे हटने का फ़ैसला किया है।

जद(यू) ने फैसले को बताया ‘अपमानजनक’, संगठनात्मक चुनौती से गुज़र रही जन सुराज

जद(यू) प्रवक्ता नीरज कुमार ने किशोर के इस कदम को उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए ‘अपमानजनक’ करार दिया। उन्होंने सवाल किया कि पहले लोगों के मुद्दों को समझने के लिए पदयात्राएँ करने के उनके दावे का क्या हुआ? उन्होंने कहा, “चुनावी लड़ाई से पहले ही वह भाग गए हैं। उनका यह फैसला उनके कार्यकर्ताओं के लिए बेहद शर्मनाक है।”

इस घोषणा से स्पष्ट है कि जन सुराज पार्टी संगठनात्मक चुनौती से गुज़र रही है। किशोर ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी या तो ‘शानदार जीत हासिल करेगी या बुरी तरह हारेगी’, और 10 से कम या 150 से ज़्यादा सीटें मिलने की उम्मीद है, बीच की कोई संभावना नहीं है।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि 150 से कम सीटें उनके लिए हार होगी। अगर पार्टी अच्छा प्रदर्शन नहीं करती है, तो इसका मतलब होगा कि लोगों ने उन पर पर्याप्त विश्वास नहीं दिखाया है, और उन्हें अपनी ‘सड़क और समाज की राजनीति’ जारी रखनी होगी।

फिलहाल, जन सुराज पार्टी ने 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा के लिए अब तक 116 उम्मीदवारों की घोषणा की है, जिसमें 51 उम्मीदवारों की पहली सूची के बाद 65 उम्मीदवारों की दूसरी सूची भी शामिल है। उम्मीदवारों के चयन में समाज के सभी वर्गों और विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों को प्रतिनिधित्व दिया गया है।

गौरतलब है कि चुनाव 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होंगे और मतगणना 14 नवंबर को होगी। जन सुराज को झटका लगना तय माना जा रहा है, क्योंकि उनका खुद का मैदान छोड़ना चुनावी माहौल को एक नया मोड़ देता है।

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