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राहुल गांधी का समर्थन: बुजुर्ग दुकानदार के रक्षक दीपक पर FIR

राहुल गांधी का समर्थन

राहुल गांधी का समर्थन इस वक्त उत्तराखंड के उस जांबाज युवक के साथ है, जिसने नफरत की भीड़ के सामने झुकने से इनकार कर दिया। उत्तराखंड के कोटद्वार में एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

जिम मालिक दीपक कुमार, जिन्होंने एक 70 वर्षीय बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद को भीड़ के उत्पीड़न से बचाने की कोशिश की, अब खुद कानूनी पचड़ों और धमकियों का सामना कर रहे हैं।

कोटद्वार पुलिस ने इस मामले में अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है, जो खुद को बजरंग दल का सदस्य बता रहे थे। घटना के एक वायरल वीडियो में दीपक कुमार को भीड़ का सामना करते हुए देखा जा सकता है, जहाँ वह निडर होकर पूछते हैं कि अगर दूसरे लोग अपनी दुकानों का नाम ‘बाबा’ रख सकते हैं, तो अहमद क्यों नहीं?

क्या था पूरा विवाद: ‘बाबा स्कूल ड्रेस’ के नाम पर हंगामा

यह पूरा विवाद 26 जनवरी को तब शुरू हुआ जब पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार में स्थित ‘बाबा स्कूल ड्रेस’ नामक दुकान पर दक्षिणपंथी संगठनों के सदस्य पहुंचे। दुकान के मालिक 70 वर्षीय वकील अहमद हैं।

भीड़ ने अहमद को अपनी दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटाने के लिए धमकाया और डांटा, उनका तर्क था कि ‘बाबा’ शब्द का इस्तेमाल केवल हिंदू धार्मिक पुरुषों के लिए होना चाहिए। इसी दौरान पास में जिम चलाने वाले दीपक कुमार वहां पहुंचे।

जब उन्होंने बुजुर्ग दुकानदार को धमकाते हुए सुना, तो उन्होंने बीच-बचाव किया। इलाके में जिम चलाने वाले कुमार को भीड़ ने दखल न देने की चेतावनी दी, लेकिन दीपक पीछे नहीं हटे।

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“मैं मोहम्मद दीपक हूँ”: सेक्युलर पहचान का वह वायरल बयान

जब भीड़ ने दीपक कुमार को घेर लिया और उनका नाम पूछा, तो उन्होंने एक ऐसा जवाब दिया जो अब सोशल मीडिया पर ‘सेक्युलर प्रतिरोध’ का प्रतीक बन गया है। दीपक ने कहा, “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।” बाद में एक इंस्टाग्राम वीडियो में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद यह बताना था कि सभी भारतीय समान हैं।

उन्होंने कहा, “मैं हिंदू नहीं हूं, मैं मुस्लिम नहीं हूं, मैं सिख नहीं हूं, और मैं ईसाई नहीं हूं। सबसे पहले, मैं एक इंसान हूं।” दीपक के इस साहस की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।

पुलिसिया कार्रवाई और दर्ज हुई तीन अलग-अलग FIR

इस मामले में पुलिस ने अब तक कुल तीन FIR दर्ज की हैं। पहली FIR एक पुलिस अधिकारी की शिकायत पर दर्ज की गई, जिसमें गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने और सरकारी काम में बाधा डालने की धाराएं लगाई गई हैं। दूसरी ओर, जिम मालिक दीपक कुमार और उनके साथी विजय रावत के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई है।

यह FIR विश्व हिंदू परिषद (VHP) के सदस्य गौरव कश्यप और बजरंग दल के कमल पाल की शिकायत पर दर्ज हुई है। उन पर दंगा करने, शांति भंग करने और जातिवादी गालियां देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

वहीं, दुकानदार वकील अहमद की शिकायत पर भी पुलिस ने कुछ नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। राहुल गांधी का समर्थन मिलने के बाद इस कानूनी कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं।

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नेशनल हाईवे जाम और दक्षिणपंथी संगठनों का विरोध प्रदर्शन

दीपक कुमार और विजय रावत द्वारा दुकानदार का बचाव करने से नाराज होकर दक्षिणपंथी संगठनों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे को ब्लॉक कर दिया, जिससे घंटों ट्रैफिक बाधित रहा।

पुलिस के मुताबिक, इनमें से ज्यादातर प्रदर्शनकारी देहरादून और हरिद्वार से आए थे। भीड़ ने दीपक कुमार के जिम के बाहर भी प्रदर्शन किया और उनके खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने इलाके में तनाव कम करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जवानों की तैनाती बढ़ा दी है और संवेदनशील इलाकों में गश्त तेज कर दी गई है।

“हमें और दीपक चाहिए”: राहुल गांधी का बड़ा बयान

इस पूरे घटनाक्रम पर लोकसभा में विपक्ष के नेता ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी का समर्थन जताते हुए उन्होंने एक्स (X) पर लिखा कि दीपक भारत के असली हीरो हैं जो संविधान और इंसानियत के लिए लड़ रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि संघ परिवार और भाजपा जानबूझकर समाज में जहर घोल रहे हैं ताकि देश बंटा रहे। गांधी ने दीपक की फोटो शेयर करते हुए उन्हें “शेर दिल योद्धा” बताया और कहा कि वह नफरत के बाजार में ‘मोहब्बत की दुकान’ की जीती-जागती निशानी हैं। उन्होंने उत्तराखंड सरकार पर असामाजिक तत्वों का साथ देने का आरोप भी लगाया।

लाइवस्ट्रीम में दीपक का खुलासा: “मेरी जान को खतरा है”

दीपक कुमार ने हाल ही में एक लाइवस्ट्रीम के जरिए अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर कॉल देकर भीड़ को उन्हें “सबक सिखाने” के लिए इकट्ठा किया गया था। दीपक ने दावा किया कि उन्होंने पुलिस को पहले ही खतरे के बारे में आगाह किया था, लेकिन अधिकारियों ने कुछ नहीं किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि भीड़ उनके जिम के बाहर 6-7 घंटे तक रही, उनके परिवार और मां-बहनों को गालियां दी गईं, लेकिन पुलिस ने उन्हें ही दो घंटे तक सेल में बंद रखा।

दीपक ने सवाल उठाया कि जो लोग खुलेआम दुकानदार को गाली दे रहे थे, वे खुले क्यों घूम रहे हैं? राहुल गांधी का समर्थन मिलने से उन्हें नैतिक बल जरूर मिला है, लेकिन वह अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

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प्रशासन का पक्ष और नागरिक समाज की चिंता

पौड़ी गढ़वाल के पुलिस सुपरिटेंडेंट सर्वेश पंवार ने कहा है कि सभी मामलों की जांच वीडियो फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। दूसरी ओर, सिविल राइट्स एक्टिविस्ट्स और आम लोगों ने दीपक कुमार पर केस दर्ज करने के फैसले की कड़ी आलोचना की है।

उनका कहना है कि प्रशासन का ध्यान नागरिकों को डराने-धमकाने से बचाने पर होना चाहिए न कि शांतिदूतों पर कार्रवाई करने पर। फिलहाल कोटद्वार में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है, और पुलिस ने लोगों से सोशल मीडिया पर अफवाह न फैलाने की अपील की है।

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