राजेंद्र चोल जयंती: जल प्रबंधन और विरासत विकास का संगम
राजेंद्र चोल जयंती इस वर्ष तमिलनाडु में बड़े उत्साह के साथ मनाई जा रही है। भारतीय किसान संघ के राज्य सचिव एन. वीरसेकरन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राजेंद्र चोल प्रथम के जन्म नक्षत्र, आदि तिरुवथिरई को ‘विश्व जल प्रबंधन दिवस’ घोषित करने का आग्रह किया है। यह पहल चोल वंश की उत्कृष्ट जल प्रबंधन विरासत को सम्मान देने के उद्देश्य से की गई है, जिसमें राजेंद्र चोल का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
चोलों की जल प्रबंधन विरासत
चोल राजवंश के दौरान निर्मित परस्पर जुड़े तालाब, झीलें और नहरें एक स्थायी जल ग्रिड का निर्माण करती हैं। यह प्रणाली आज भी कावेरी डेल्टा में कृषि को सहायता प्रदान कर रही है। श्री वीरसेकरन ने जल संरक्षण में योगदान देने वाले किसानों और संस्थानों के लिए पुरस्कार स्थापित करने का भी आग्रह किया।
- चोलों ने जल प्रबंधन की स्थायी प्रणालियाँ विकसित कीं।
- उनकी जल संरचनाएँ आज भी कृषि में सहायक हैं।
- जल संरक्षण हेतु पुरस्कार स्थापित करने की माँग की गई।
जल संसाधनों के कुशल उपयोग का यह उदाहरण वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। प्रधानमंत्री चोल सम्राट के जयंती समारोह में शामिल होंगे।
प्रधानमंत्री का तमिलनाडु दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजेंद्र चोल जयंती मनाने और आदि थिरुवथिरई महोत्सव में शामिल होने के लिए तमिलनाडु में होंगे। यह महोत्सव 23 जुलाई से 27 जुलाई तक अरियालुर जिले के गंगईकोंडा चोलपुरम में आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री 27 जुलाई को गंगईकोंडा चोलपुरम का दौरा करेंगे और एक स्मारक सिक्का जारी करेंगे। यह सिक्का राजेंद्र चोल की गंगा विजय के 1,000 वर्ष पूरे होने का भी स्मरण कराएगा। यह तमिल संस्कृति और विरासत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।
- पीएम मोदी राजेंद्र चोल जयंती समारोह में हिस्सा लेंगे।
- वह गंगईकोंडा चोलपुरम में स्मारक सिक्का जारी करेंगे।
- यह दौरा दक्षिण-पूर्व एशिया अभियान की 1,000वीं वर्षगांठ मनाएगा।
राजनीतिक महत्व और सांस्कृतिक सम्मान
यह उत्सव राज्य में सत्तारूढ़ द्रमुक और विपक्षी भाजपा के बीच राजनीतिक वर्चस्व का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अरियालुर जिले में चोलगंगम तालाब को सुशोभित करने का कार्य शुरू किया है। इस परियोजना के लिए ₹12 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिससे 1,374 एकड़ कृषि योग्य भूमि को लाभ होगा।
- द्रमुक और भाजपा के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा दिख रही है।
- मुख्यमंत्री स्टालिन ने चोलगंगम तालाब के विकास की घोषणा की।
- यह विकास कार्य कृषि भूमि को लाभ पहुँचाएगा।
चोलगंगम जलाशय लगभग 1,000 साल पहले गंगईकोंडा चोलपुरम के पास बनाया गया था। अन्नामलाई के अनुसार, सम्राट राजेंद्र चोल गंगा विजय के बाद गंगा जल लाए थे।
राजेंद्र चोल: एक दूरदर्शी शासक
राजेंद्र चोल प्रथम (1014-1044 ई.) भारतीय इतिहास के सबसे शक्तिशाली और दूरदर्शी शासकों में से एक थे। उनके नेतृत्व में चोल साम्राज्य ने दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाया। उन्होंने गंगईकोंडा चोलपुरम को शाही राजधानी के रूप में स्थापित किया।
- राजेंद्र चोल प्रथम एक शक्तिशाली और दूरदर्शी शासक थे।
- उन्होंने दक्षिण-पूर्व एशिया तक साम्राज्य का विस्तार किया।
- गंगईकोंडा चोलपुरम उनकी शाही राजधानी थी।
यहां निर्मित मंदिर शैव भक्ति, वास्तुकला और प्रशासनिक कौशल का प्रतीक रहा। आज यह मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
अधिनमों का स्वागत और राष्ट्रीय सम्मान
प्रधानमंत्री मोदी 27 जुलाई को तमिल शैव मठों के प्रमुखों (अधीनम) के साथ शामिल होंगे। यह आयोजन भाजपा के तमिलनाडु में विभिन्न समुदायों को खुश करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने काशी तमिल संगमम और सौराष्ट्र तमिल संगमम जैसे आयोजनों से तमिल विरासत को सम्मानित किया है। नए संसद भवन में चोल के सेंगोल की स्थापना भी इसी दिशा में एक कदम था। यह राजेंद्र चोल जयंती एक सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व रखती है।
- पीएम मोदी अधिनमों से मुलाकात करेंगे।
- यह कदम विभिन्न समुदायों को आकर्षित करने का प्रयास है।
- तमिल विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है।
विकास परियोजनाओं का अनावरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 और 27 जुलाई को तमिलनाडु के दो दिवसीय दौरे पर ₹4800 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। वह तूतीकोरिन हवाई अड्डे पर ₹450 करोड़ की लागत से निर्मित नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे। यह टर्मिनल 17,340 वर्ग मीटर में फैला है और GRIHA-4 स्थिरता रेटिंग प्राप्त करने का लक्ष्य रखता है।
- पीएम ₹4800 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का अनावरण करेंगे।
- तूतीकोरिन हवाई अड्डे पर नया टर्मिनल भवन खुलेगा।
- GRIHA-4 रेटिंग पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देगी।
यह परियोजना क्षेत्र में पर्यटन और वाणिज्य को बढ़ावा देगी।
बुनियादी ढाँचा उन्नयन
रेल और सड़क क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उन्नयन होंगे। राष्ट्रीय राजमार्ग-36 के 50 किलोमीटर लंबे सेठियाथोप-चोलापुरम खंड का 4-लेनीकरण ₹2,350 करोड़ से अधिक की लागत से होगा। NH-138 पर 5.16 किलोमीटर लंबे हिस्से को 6 लेन का बनाया जाएगा, जिससे तूतीकोरिन बंदरगाह को कनेक्टिविटी मिलेगी। प्रधानमंत्री वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह पर नॉर्थ कार्गो बर्थ-III का भी उद्घाटन करेंगे, जिसकी क्षमता 6.96 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है।
- प्रमुख राजमार्गों का 4-लेनीकरण और 6-लेनीकरण होगा।
- तूतीकोरिन बंदरगाह की कनेक्टिविटी में सुधार होगा।
- इन परियोजनाओं से यात्रा समय और रसद लागत कम होगी।
ऊर्जा और संपर्क में सुधार
रेलवे में मदुरै-बोदिनायक्कनूर खंड का विद्युतीकरण और नागरकोइल टाउन-कन्याकुमारी खंड का दोहरीकरण होगा। प्रधानमंत्री कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की इकाई 3 और 4 के लिए अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली (आईएसटीएस) की आधारशिला भी रखेंगे। यह ₹550 करोड़ की परियोजना राष्ट्रीय ग्रिड को मजबूत करेगी।
- रेलवे विद्युतीकरण और दोहरीकरण से संपर्क बढ़ेगा।
- परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए पारेषण प्रणाली बनेगी।
- यह परियोजना विश्वसनीय स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।
यह परियोजना तमिलनाडु और अन्य राज्यों को विश्वसनीय स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।



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