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रक्षा मंत्रालय का मेगा सौदा: सेना को मिलेंगी 4.25 लाख कार्बाइन

रक्षा मंत्रालय का मेगा सौदा

रक्षा मंत्रालय का मेगा सौदा रक्षा मंत्रालय ने आज मंगलवार को नई दिल्ली में भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने क्लोज क्वार्टर बैटल (CQB) कार्बाइन और हेवी वेट टॉरपीडो की खरीद के लिए कुल 4,666 करोड़ रुपये के रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए।

नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक में आयोजित इस महत्वपूर्ण अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। यह अनुबंध न केवल सेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक छलांग है, बल्कि रक्षा मंत्रालय का मेगा सौदा भारत की सुरक्षा तैयारियों को अभेद्य बनाने की सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

4.25 लाख से अधिक स्वदेशी कार्बाइन की होगी आपूर्ति

अनुबंधों के विस्तृत विवरण के अनुसार, पहले और सबसे बड़े समझौते के तहत मंत्रालय 2,770 करोड़ रुपये की कुल लागत से एक्सेसरीज़ के साथ 4.25 लाख से ज्यादा CQB कार्बाइन खरीदेगा। यह विशाल सौदा भारत फोर्ज लिमिटेड और PLR सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ संयुक्त रूप से किया गया है।

इन आधुनिक कार्बाइन को भारतीय सेना और भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा। इस खरीद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ये नई कार्बाइन वर्तमान में सेना में सेवा दे रहे पुराने और आउटडेटेड सिस्टम की जगह लेंगी, जिससे हमारे सैनिकों को युद्ध के मैदान में श्रेष्ठता प्राप्त होगी।

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भारत फोर्ज और DRDO का स्वदेशी पराक्रम

इसी सौदे के एक हिस्से के रूप में, भारतीय रक्षा मंत्रालय ने भारत फोर्ज (BFL) को विशेष रूप से 255,128 CQB कार्बाइन (5.56 x 45 mm) की सप्लाई के लिए 1,661.9 करोड़ रुपये का पृथक कॉन्ट्रैक्ट दिया है। 30 दिसंबर, 2025 को हस्ताक्षरित इस अनुबंध की शर्तों के अनुसार, कंपनी को अगले पांच वर्षों के भीतर इस पूरे ऑर्डर की डिलीवरी सुनिश्चित करनी होगी।

उल्लेखनीय है कि ये 5.56 x 45 mm CQB कार्बाइन पूरी तरह से स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित (IDDM) कॉम्पैक्ट हथियार हैं। इन्हें आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ARDE), DRDO और भारत फोर्ज, पुणे ने मिलकर तैयार किया है, जो ‘मेक इन इंडिया’ की सफलता का प्रमाण है।

क्लोज क्वार्टर बैटल में मिलेगी विश्व स्तरीय मारक क्षमता

CQB कार्बाइन को आधुनिक इन्फैंट्री युद्ध के एक अनिवार्य अंग के रूप में देखा जाता है। इन्हें विशेष रूप से कॉम्पैक्ट संरचना और उच्च दर से फायरिंग (High Rate of Fire) के लिए डिजाइन किया गया है, जो बेहद करीबी मुकाबले या सीमित जगहों पर त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम हैं।

रक्षा मंत्रालय का मेगा सौदा भारतीय सेना और नौसेना को ऐसी अत्याधुनिक तकनीक से लैस करेगा जो पुरानी प्रणालियों को पूरी तरह बदल देगी।

आत्मनिर्भर भारत विजन के तहत इन हथियारों का शामिल होना एक मील का पत्थर है, क्योंकि यह न केवल सेना की मारक क्षमता बढ़ाता है बल्कि सीमित और चुनौतीपूर्ण शहरी युद्ध स्थितियों में सैनिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है।

इटली की कंपनी के साथ हेवी वेट टॉरपीडो का अनुबंध

जल के भीतर नौसेना की शक्ति को दोगुना करने के लिए एक अलग और महत्वपूर्ण समझौता किया गया है। मंत्रालय ने प्रोजेक्ट-75 के तहत भारतीय नौसेना की कलवरी-क्लास पनडुब्बियों के लिए 48 हेवी वेट टॉरपीडो की खरीद और उनके एकीकरण (Integration) के लिए इटली की प्रसिद्ध कंपनी WASS सबमरीन सिस्टम्स S.R.L. के साथ लगभग 1,896 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है।

रक्षा मंत्रालय का मेगा सौदा यह सुनिश्चित करेगा कि हमारी पनडुब्बियां आधुनिक पानी के नीचे के युद्ध (Under-water warfare) के लिए पूरी तरह तैयार हों। ये टॉरपीडो उन्नत तकनीकी विशेषताओं और महत्वपूर्ण परिचालन क्षमताओं से लैस हैं।

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कलवरी क्लास पनडुब्बियों की बढ़ेगी युद्धक मारक क्षमता

टॉरपीडो की इस खरीद का मुख्य उद्देश्य भारतीय नौसेना की छह कलवरी-क्लास पनडुब्बियों (P-75) की आक्रामक क्षमताओं को बढ़ाना है। मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन टॉरपीडो और संबंधित उपकरणों की डिलीवरी अप्रैल 2028 से शुरू हो जाएगी और 2030 की शुरुआत तक इस पूरी प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा।

यह सौदा भारतीय नौसेना की उन परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के प्रति सरकार की गंभीरता को प्रकट करता है, जिनमें विशेष तकनीक और उन्नत मारक क्षमता वाले हथियारों की तत्काल आवश्यकता थी।

MSMEs और घरेलू रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मिलेगा बढ़ावा

यह पूरा प्रोजेक्ट केवल हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका आर्थिक प्रभाव भी व्यापक होगा। आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत, भारत फोर्ज (BFL) और उसकी सहायक कंपनी कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स (KSSL) भारतीय सशस्त्र बलों को ‘मेड इन इंडिया’ उपकरणों से लैस करने के लिए समर्पित हैं।

इस रक्षा मंत्रालय का मेगा सौदा के माध्यम से घरेलू रक्षा मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को जबरदस्त मजबूती मिलेगी। इससे न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और कच्चे माल की सप्लाई के जरिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को भी बड़े स्तर पर आर्थिक लाभ होगा।

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आधुनिकीकरण की दिशा में निरंतर बढ़ते सरकार के कदम

रक्षा मंत्रालय ने प्रेस सूचना ब्यूरो के माध्यम से साझा किया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के हिस्से के रूप में कुल ₹1.82 लाख करोड़ के पूंजी अधिग्रहण कॉन्ट्रैक्ट साइन किए गए हैं। यह डेटा रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता और सेना की मजबूती के प्रति सरकार के दीर्घकालिक निवेश को रेखांकित करता है।

सरकार और निजी क्षेत्र के बीच यह मजबूत सहयोग न केवल रक्षा क्षेत्र में औद्योगिक विकास लाएगा, बल्कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत को एक वैश्विक डिफेंस हब के रूप में भी स्थापित करेगा।

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