रॉयल वेडिंग बनाम सादगी: IAS-IPS की शादी ने पेश की मिसाल
रॉयल वेडिंग बनाम सादगी तेलंगाना से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। एक IAS ऑफिसर और एक लेडी IPS ऑफिसर ने अपनी शादी के लिए सिंपल लीगल रजिस्ट्रेशन चुनकर इंटरनेट पर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है।
एक ऐसे देश में जो अपनी बड़ी और भव्य शादियों के लिए जाना जाता है, वहां इन अधिकारियों द्वारा बड़े फंक्शन से दूर रहने के इस कदम ने सोशल मीडिया यूजर्स का दिल जीत लिया है। रॉयल वेडिंग बनाम सादगी के इस दौर में लोग सादगी की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
बिना किसी तामझाम के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में पूरी हुई रस्में
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पावर कपल ने चौटुप्पल सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में अपनी शादी की सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं। उन्होंने अपनी शादी के लिए एक बेहद सिंपल प्रोसेस को चुना, जिसमें न तो कोई पारंपरिक रीति-रिवाज थे, न ही कोई लग्जरी डेस्टिनेशन वेन्यू और न ही मेहमानों की कोई बड़ी भीड़।
इस मौके को पूरी तरह से मिनिमल रखने के उनके फैसले को आज के दौर की फिजूलखर्ची वाली शादियों के कल्चर के खिलाफ एक सख्त और सराहनीय कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
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कौन हैं सादगी से शादी करने वाले ये दो बड़े अधिकारी?
इस शादी की दुल्हन शेषाद्रिनी रेड्डी हैं, जो 2021 बैच की IPS ऑफिसर हैं। वह वर्तमान में कुथबुल्लापुर में डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) के पद पर तैनात हैं और मूल रूप से चौटुप्पल मंडल के लिंगारेड्डीगुडेम गांव की रहने वाली हैं।
वहीं दूल्हा श्रीकांत रेड्डी हैं, जो IAS ऑफिसर हैं। श्रीकांत आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले से ताल्लुक रखते हैं और फिलहाल अपनी एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रेनिंग ले रहे हैं। इन दोनों अधिकारियों ने अपने पदों की गरिमा को सादगी के साथ जोड़कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
न भव्य फोटोशूट, न बड़ी दावत: केवल कानूनी प्रक्रिया पर रहा फोकस
शादी के रजिस्ट्रेशन के दौरान किसी भी प्रकार का कोई पब्लिक सेलिब्रेशन या शानदार फोटोशूट नहीं देखा गया। कपल का पूरा फोकस सिर्फ और सिर्फ लीगल प्रोसीजर को पूरा करने पर रहा।
हालांकि, इस सादे समारोह में कुछ सीनियर अधिकारी और परिवार के बेहद करीबी लोग मौजूद थे, जिन्होंने जोड़े के इस फैसले का मौन समर्थन किया। रॉयल वेडिंग बनाम सादगी की तुलना करते हुए नेटिजन्स कह रहे हैं कि असली चमक संस्कारों और विचारों में होती है, न कि दिखावे में।
करोड़ों की वेडिंग इंडस्ट्री के बीच सादगी ने खींचा सबका ध्यान
एक तरफ जहां भारत की वेडिंग इंडस्ट्री अभी लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की है और अगले पांच सालों में इसके लगातार बढ़ने की उम्मीद है, वहीं इन अधिकारियों का यह कदम समाज को आईना दिखाने वाला है।
शादी को पूरी तरह से कानूनी और कम से कम खर्च में रखने के उनके फैसले की देशभर में प्रशंसा हो रही है। यह शादी इस बात की याद दिलाती है कि जीवन के बड़े फैसलों में दिखावे से ज्यादा कमिटमेंट और व्यक्तिगत वैल्यूज मायने रखती हैं।
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युवाओं के बीच चर्चा का विषय और “मिसाल बनकर लीड करना”
इस शादी ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर, खासकर युवा यूजर्स के बीच एक बड़ी चर्चा छेड़ दी है। लोगों ने पब्लिक सर्विस में सबसे ज्यादा डिमांड वाली पोस्ट पर होने के बावजूद इतनी सादगी चुनने के लिए अधिकारियों की सराहना की है।
सोशल मीडिया यूजर्स ने कपल की “मिसाल बनकर लीड करने” (Leading by Example) के लिए तारीफ की। यूजर्स का कहना है कि जब देश के सबसे बड़े एडमिनिस्ट्रेटिव पदों पर बैठे लोग अपनी पर्सनल लाइफ में फिजूलखर्ची को नकारते हैं, तो इसका असर पूरे समाज पर पड़ता है।
फिजूलखर्ची और कर्ज के बोझ तले दबी शादियों को दिया बड़ा संदेश
कई सोशल मीडिया यूजर्स ने टिप्पणी की है कि वर्तमान समय में शादियां अक्सर बहुत ज्यादा खर्च, सोशल प्रेशर और भारी कर्ज का कारण बनती हैं। ऐसे में इस कपल के फैसले ने एक सही समय पर और बेहद प्रभावशाली मैसेज दिया है।
यह कदम न केवल सादी शादियों को ‘नॉर्मल’ बनाने में मदद करता है, बल्कि परिवारों को भी इस बात के लिए प्रोत्साहित करता है कि वे दिखावे के बजाय असलियत और आपसी रिश्तों को प्राथमिकता दें। रॉयल वेडिंग बनाम सादगी के बीच यह चुनाव समाज की सोच बदलने वाला साबित हो सकता है।
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एक्सपर्ट्स की राय: समाज पर होगा गहरा और सकारात्मक असर
जानकारों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि सरकारी कर्मचारियों और प्रभावशाली अधिकारियों के ऐसे फैसलों का समाज पर व्यापक असर होता है।
इससे महंगी शादियों के कल्चर को चुनौती मिलती है और भविष्य में पैसे की समझदारी व वैल्यू-बेस्ड सेलिब्रेशन को बढ़ावा मिलेगा। एक छोटे और शांत रजिस्ट्रेशन के माध्यम से भी इस जोड़े ने जो संदेश दिया है, वह बहुत गहरा है: प्यार, कमिटमेंट और वैल्यूज हमेशा फिजूलखर्ची और सामाजिक दिखावे से कहीं ऊपर होते हैं।
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