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बच्चों की सुरक्षा और संघ: चरित्र निर्माण या यौन शोषण का अड्डा?

बच्चों की सुरक्षा संघ

बच्चों की सुरक्षा और संघ केरल के आईटी सेक्टर को झकझोर देने वाली आनंदु अजी की त्रासदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के उस गहरे दाग को उजागर कर दिया है, जो ‘राष्ट्र सेवा’ के नाम पर बच्चों के बचपन को कुचलने का आरोप लगाता है। यह घटना उस संगठन की सड़ांध को दर्शाती है, जिसे देश में ‘सांस्कृतिक विरासत’ का दर्जा देने की बात की जाती है।

कोट्टायम के थंपलाकड़ निवासी 26 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर आनंदु अजी का शव 9 अक्टूबर 2025 को तिरुवनंतपुरम के थंपानूर में एक लॉज के कमरे में फंदे से लटका मिला। यह केवल एक अस्वाभाविक मौत नहीं थी, बल्कि एक मरते हुए व्यक्ति की वह दारूण चीख थी, जिसने अपने इंस्टाग्राम पर एक शेड्यूल्ड पोस्ट के माध्यम से वर्षों से चली आ रही यौन हिंसा का खुलासा किया।

आनंदु ने अपने अंतिम पोस्ट में स्पष्ट लिखा था: मैं रेप का शिकार हूं। चार साल की उम्र से ही एक व्यक्ति ने मुझे लगातार शोषित किया, और आरएसएस के कई सदस्यों ने मेरा बलात्कार किया।” यह सुसाइड नोट नहीं, बल्कि बचपन से चली आ रही पीड़ा का एक घोषणापत्र था।

आनंदु ने दावा किया कि आरएसएस के आईटीसी (ITC) और ओटीसी (OTC) जैसे कैंपों में आज भी बच्चों को डंडों से पीटा जाता है और यौन शोषण जारी है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद, पुलिस ने भले ही केवल अस्वाभाविक मौत का केस दर्ज किया हो, लेकिन सीपीआई(एम) और डीवाईएफआई (DYFI) ने इसे यौन अपराध के रूप में गहन जांच की मांग की है।

डीवाईएफआई के वाइस चेयरमैन वी.के. सनोज ने इसे आरएसएस के “क्रूर चेहरे” का प्रमाण बताया है। यह त्रासदी हमें सोचने पर मजबूर करती है कि बच्चों की सुरक्षा और संघ के दावों में कितनी सच्चाई है।

‘राष्ट्रभक्ति’ का बहाना और शोषण का जहर

आनंदु अजी की डायरी और सोशल मीडिया पोस्ट्स ने आरएसएस के ‘चरित्र निर्माण’ के दावे को चकनाचूर कर दिया है। उन्होंने संगठन के सदस्यों के लिए चेतावनी जारी करते हुए लिखा: “आरएसएस के सदस्यों ने मेरा बलात्कार किया। उन्हें दोस्त मत बनाना, भले ही वे परिवार के हो। वे असली अपमान करने वाले हैं।”

बचपन से शाखाओं में भेजे गए बच्चों के साथ ‘डिसिप्लिन’ के नाम पर छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न और पिटाई की जाती है, और विरोध करने वाले पर ‘गद्दार’ का ठप्पा लगा दिया जाता है।

आनंदु ने खुलासा किया कि उनके पड़ोसी, एन.एम. नामक एक आरएसएस-भाजपा कार्यकर्ता, ने चार साल की उम्र से ही उनका शोषण शुरू कर दिया था, जिसके कारण उन्हें ओसीडी (OCD) और डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक समस्याएं हुईं।

उनके पिता की दुर्घटना में मौत के बाद भी घर पर शाखाएं आयोजित होती रहीं, जिसने परिवार को तोड़ने का माध्यम बनने का काम किया। यह कोई एकाकी घटना नहीं, बल्कि एक डरावना पैटर्न है, जहां संगठन की गोपनीयता और सत्ता का दुरुपयोग पीड़ितों को चुप रहने पर मजबूर करता है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के 2021 के आंकड़े बताते हैं कि भारत में बच्चों के खिलाफ अपराध 53,874 मामलों तक पहुंच चुके हैं। 2023 की राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) के मामलों में 250-300% की वृद्धि हुई है, और ऐसे संगठनों की भूमिका इसमें संदिग्ध है।

सवाल यह है कि क्या मोदी सरकार, जो आरएसएस को ‘सांस्कृतिक विरासत’ का दर्जा देने पर उतारू है, इस ‘चरित्र’ की जांच का साहस जुटाएगी, या फिर इसे हमेशा की तरह ‘वामपंथी साजिश’ बताकर दबा देगी? बीजेपी को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या ‘हिंदुत्व’ के नाम पर बच्चों का बलिदान करना राष्ट्र निर्माण है?

एक काला पैटर्न: आरएसएस से जुड़े अन्य गंभीर मामले

आनंदु अजी का मामला अकेला नहीं है। आरएसएस की शाखाओं और इससे जुड़े संस्थानों से जुड़े काले अध्यायों की एक लंबी फेहरिस्त संगठन की नैतिक दिवालियापन को नंगा करती है। इन घटनाओं का पैटर्न खौफनाक है: ज्यादातर आरोपी स्थानीय नेता, शिक्षक या ‘गुरुजी’ होते हैं, जो संगठन की छत्रछाया में छिपे रहते हैं।

केरल (2019): पठानपुरम में आरएसएस का मुख्य शिक्षक रतिश (22 वर्षीय), जो भाजपा नेता एम.टी. रमेश का करीबी था, एक नाबालिग लड़की का बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार हुआ। जांच में आरएसएस कैंपों में होने वाली ‘ट्रेनिंग’ का जिक्र आया।

उत्तर प्रदेश (2024): कौशांबी में आरएसएस द्वारा चलाए जाने वाले सरस्वती शिशु मंदिर के प्रिंसिपल डी.के. मिश्रा पर एक नाबालिग लड़की से यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। मीडिया की चुप्पी के बावजूद, पीड़िता के परिवार ने शाखाओं में ‘अकेलेपन’ का हवाला दिया।

अन्य मामले: 2020 में एक आरएसएस कार्यकर्ता ने एक नाबालिग बच्ची का तीन दिनों तक बलात्कार किया। 2023 में आरएसएस के सदस्य सतीश मिश्रा ने अपनी ही बेटी का बलात्कार किया। 2024 में उत्तर प्रदेश के अमेठी में एक ब्राह्मण परिवार की नाबालिग बेटी के साथ 10 लोगों ने गैंगरेप किया और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया, जहां पीड़िता के परिवार ने भाजपा-आरएसएस के स्थानीय दबाव का आरोप लगाया।

ये सभी मामले साबित करते हैं कि आरएसएस की ‘शिक्षा’ व्यवस्था में बच्चों की सुरक्षा का सिर्फ नारा है। 2015 के एक अध्ययन के अनुसार, भारत में 53% बच्चे यौन शोषण के शिकार होते हैं, और 94% मामलों में अपराधी परिचित होते हैं, जैसे शाखा के ‘सेवक’। एक 2023 की स्टडी में पाया गया कि शाखाओं में 36% लड़के और 35% लड़कियां यौन शोषण का सामना करते हैं। यह एक सिस्टमेटिक यौन हिंसा है, जहां पीड़ितों को ‘फर्जी केस’ का डर दिखाकर चुप करा दिया जाता है।

न्याय की मांग: चुप्पी नहीं, तीव्र विरोध मुक्ति है

आनंदु ने अपने अंतिम नोट में स्पष्ट लिखा था कि शाखाओं में ‘विष’ भरा है, जो परिवारों को तोड़ता है और पीड़ितों को आजीवन मानसिक जख्म दे देता है। यौन हिंसा से उपजा यह मानसिक बोझ, जिसने उन्हें ओसीडी और एंग्जायटी दी, उन्हें काम पर फोकस नहीं करने देता था।

2022 के एक सर्वे में 81% मेडिकल स्टूडेंट्स ने चाइल्ड एब्यूज केस देखे, जिनमें 58% यौन शोषण के थे। अभिभावकों को अब सोचना होगा: क्या RSS शाखा में बच्चों को भेजना राष्ट्र सेवा है या बच्चे का बलिदान?

केरल पुलिस को आनंदु के पोस्ट को ‘मृत्युकालिक कथन’ (Dying Declaration) मानकर जांच करनी चाहिए। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर #RSSChildAbuse ट्रेंड कर रहा है, जहां हजारों यूजर्स आनंदु की चेतावनी साझा कर रहे हैं: “आरएसएस से दूर रहो, वे असली दुश्मन हैं।”

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की प्रवक्ता प्रियंका भारती (@priyanka2bharti) ने भी इसे “राष्ट्र के लिए खतरा” बताया है। एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि 2019 में बच्चों पर अपराध 4.5% बढ़े, और आरएसएस जैसे संगठन इसमें अपना भारी योगदान देते हैं, जहां ‘राष्ट्रभक्ति’ का बहाना शोषण को ढकता है। यह एक गंभीर विषय है, जिसपर बच्चों की सुरक्षा और संघ का रवैया पारदर्शी होना चाहिए।

सरकार को तुरंत आरएसएस शाखाओं पर निगरानी लगानी चाहिए और पीड़ितों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट और काउंसलिंग सुनिश्चित करनी चाहिए। पीओसीएसओ (POCSO) एक्ट 2012 के तहत डॉक्टरों को रिपोर्टिंग अनिवार्य है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह भी विफल हो रहा है।

बच्चों की सुरक्षा और संघ की विचारधारा का टकराव अब एक राष्ट्रीय संकट बन चुका है। आनंदु की आखिरी चेतावनी—”आरएसएस से दूर रहो, वे असली दुश्मन हैं” हर माता-पिता के कानों में गूंजनी चाहिए। 2020 के एक अध्ययन में पाया गया कि भारत में हर 15 मिनट में एक बच्चा यौन शोषण का शिकार होता है, और 50% मामलों में अपराधी परिवार या संगठन से जुड़े होते हैं। आनंदु की कहानी एक सबक है: चुप्पी यौन हिंसा को बढ़ावा देती है, जबकि सच्चाई के पक्ष में तीव्र विरोध मुक्ति लाती है।

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