मोहन भागवत बोले, समाज बदलाव से बनेगा भारत विश्वगुरु बनाने
नई दिल्ली में विज्ञान भवन में आरएसएस की शताब्दी वर्षगांठ पर आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला की शुरुआत करते हुए सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि संघ के भीतर हर चर्चा तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, धारणाओं पर नहीं। उन्होंने कहा कि समाज के गुणात्मक विकास और सभी वर्गों की भागीदारी से ही भारत विश्वगुरु बनाने का सपना पूरा हो सकता है।
स्वयंसेवकों के कार्य और जिम्मेदारी
भागवत ने कहा कि स्वयंसेवक विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं और वे संघ से मिले मूल्यों पर खड़े हैं। परंतु उनके कार्य स्वतंत्र होते हैं और संगठन उन पर सीधा नियंत्रण नहीं करता। उन्होंने गूढ़ रूप से कहा – “माल तो यहाँ से गया है, श्रेय उन्हें मिलता है लेकिन बदनामी संघ को झेलनी पड़ती है।” साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि स्वयंसेवकों का संघ से बंधन शाश्वत है और उनका संवाद निरंतर चलता रहता है।
भाजपा और संघ के रिश्तों पर टिप्पणी
भागवत का यह वक्तव्य उस समय आया है जब भाजपा और संघ के संबंधों पर राजनीतिक बहस जारी है।
भाजपा अध्यक्ष चुनाव को लेकर तनाव की सुगबुगाहट
लोकसभा चुनाव प्रचार से संघ की दूरी
जे.पी. नड्डा का विवादित बयान – “भाजपा अब स्वयं सक्षम है”
इन सब घटनाओं ने संघ-भाजपा के रिश्तों में खटास की चर्चाओं को जन्म दिया। हालांकि हरियाणा और महाराष्ट्र चुनावों में संघ ने भाजपा को समर्थन का आश्वासन दिया। भागवत ने इस पृष्ठभूमि में कहा – “मतभेद हों, पर द्वेष न हो। साथ लेकर चलना ही संगठन का मूल है।”
हिंदू की नई परिभाषा
भागवत ने इस अवसर पर “हिंदू” शब्द को केवल धर्म से नहीं, बल्कि भूगोल और संस्कृति से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक ही है। उन्होंने समझाया कि –
हिंदू शब्द बाहरी आक्रांताओं ने गढ़ा था।
असल पहचान भारत माता और पूर्वजों की परंपराओं से है।
हिंदू की पहचान संघर्ष नहीं, बल्कि सहअस्तित्व और सम्मान है।
भारत विश्वगुरु बनाने का लक्ष्य
स्वतंत्र भारत की 75 वर्ष की यात्रा पर विचार करते हुए भागवत ने कहा कि अभी देश ने अपनी वैश्विक पहचान पूरी तरह नहीं बनाई है। उन्होंने कहा कि भारत विश्वगुरु बनाने के लिए सबसे पहले सामाजिक बदलाव ज़रूरी है। उनके अनुसार –
केवल सरकार या राजनीतिक दल यह कार्य नहीं कर सकते।
समाज की सकारात्मक भागीदारी से ही यह संभव होगा।
यह जिम्मेदारी हर नागरिक की है।
आयोजन और आगे की दिशा
“संघ की यात्रा के 100 वर्ष: नए क्षितिज” विषयक इस व्याख्यान श्रृंखला में विभिन्न प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल होंगी। आरएसएस प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि इन संवादों से समाज के समक्ष खड़े अहम मुद्दों पर गहन चर्चा होगी।
आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने पर मोहन भागवत का यह संदेश संघ और देश दोनों के लिए भविष्य की दिशा तय करता है। उनका मूल संदेश यही है कि भारत विश्वगुरु बनाने का मार्ग समाजिक बदलाव, सांस्कृतिक एकता और तथ्य आधारित विमर्श से होकर जाता है।
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