रूसी तेल पर भारत का स्टैंड: नाटो की चेतावनी को ‘दोहरा मापदंड’ बताया
नई दिल्ली: यूक्रेन शांति वार्ता के बीच रूसी तेल पर भारत का स्टैंड और व्यापार पर भारत ने उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) प्रमुख के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘दोहरे मापदंडों’ के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी।
नाटो प्रमुख की चेतावनी और भारत की प्रतिक्रिया
- नाटो प्रमुख मार्क रूट ने वाशिंगटन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत, चीन और ब्राजील से मॉस्को के साथ आर्थिक संबंधों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।
- उन्होंने चेताया कि रूस द्वारा शांति वार्ता में शामिल न होने पर उन्हें ‘100 प्रतिशत द्वितीयक प्रतिबंधों’ का सामना करना पड़ सकता है।
- रूट ने इन देशों से व्लादिमीर पुतिन को फोन कर शांति वार्ता के लिए गंभीर होने को कहा था, अन्यथा ‘व्यापक प्रभाव’ पड़ने की बात कही।
विदेश मंत्रालय की यह टिप्पणी रूट के उस बयान के बाद आई है। उन्होंने रूसी तेल व्यापार जारी रखने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाने की चेतावनी दी थी। जायसवाल ने कहा, “हमने इस विषय पर रिपोर्ट देखी हैं।” उन्होंने आगे कहा, “हम घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं।”
मुख्य बिंदु :
- भारत ने नाटो प्रमुख की रूसी तेल चेतावनी को दोहरे मापदंड कहकर खारिज किया।
- रणधीर जायसवाल ने ऊर्जा सुरक्षा को भारत की सर्वोपरि प्राथमिकता बताते हुए कड़ा संदेश दिया।
- ट्रम्प ने 50 दिन का अल्टीमेटम देकर द्वितीयक प्रतिबंधों की चेतावनी दी है।
- भारत ने साफ कहा, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों का सम्मान करते हैं, पर दबाव में नहीं आएंगे।
- रूसी कच्चे तेल पर शुल्क बढ़ा तो भारतीय रिफाइंड उत्पाद प्रतिस्पर्धी नहीं रह पाएंगे।
- हरदीप पुरी ने कहा, भारत 40 देशों से तेल लेता है, रूसी तेल स्थिरता में सहायक।
- भारत के अनुसार, अगर रूस से व्यापार न होता, तो तेल कीमतें $130 बैरल तक पहुंचतीं।
ऊर्जा सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता
- विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दोहराया कि लोगों की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करना भारत की सर्वोपरि प्राथमिकता है।
- भारत बाजार में उपलब्ध विकल्पों और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों से निर्देशित होता है।
जायसवाल ने इस मामले में किसी भी दोहरे मानदंड के प्रति विशेष रूप से आगाह किया। उन्होंने कहा कि भारत इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं झुकेगा।
ट्रम्प की घोषणा और संभावित प्रतिबंध
- यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा यूक्रेन को नई सैन्य सहायता की घोषणा के बाद आया है।
- ट्रम्प ने रूस को गंभीर शांति वार्ता शुरू करने या पूर्ण द्वितीयक प्रतिबंधों का सामना करने के लिए 50 दिनों का अल्टीमेटम दिया।
ये दंड उन देशों पर लगाए जाएंगे जो व्यापार जारी रख रहे हैं। ट्रम्प ने भले ही किसी देश का नाम नहीं लिया हो। लेकिन ब्राजील, चीन और भारत ने रूसी तेल खरीदना जारी रखा है। अमेरिकी सीनेटर ऐसे कानून पर जोर दे रहे हैं। ये कानून मॉस्को के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाएंगे। रूसी तेल पर भारत का स्टैंड और वैश्विक व्यापार के बीच यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
भारत का दृढ़ रुख: राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
- भारत वर्तमान में रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े आयातकों में से एक है, जिसकी कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल है।
- जुलाई 2025 तक, भारत के कुल तेल आयात में रूसी कच्चे तेल का योगदान 42% है।
- रूसी मूल के तेल पर अतिरिक्त शुल्क भारतीय रिफाइंड निर्यात को अप्रतिस्पर्धी बना सकते हैं।
एक सूत्र ने कहा, “हम वहीं से खरीदते हैं जहां हमें सबसे अच्छा सौदा मिलता है।” उन्होंने आगे कहा, “हम अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का पालन करते हैं।” पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी संभावित परिणाम के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि भारत आज 40 देशों से तेल प्राप्त करता है, जो 2007 में 27 देशों से अधिक था। रूसी तेल पर भारत का स्टैंड और ऊर्जा व्यावहारिकता के बीच भारत का रुख स्पष्ट है।
ऊर्जा विविधीकरण और वैश्विक मूल्य स्थिरता में भारत का योगदान
- केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है भारत की ऊर्जा विविधीकरण रणनीति सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण रही है।
- मास्को से तेल खरीद के भारत के फैसले का पुरज़ोर बचाव किया गया है।
- इस खरीद ने वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने में भूमिका निभाई।
उनका मानना है कि अगर रूस के साथ भारत का व्यापार नहीं होता, तो तेल की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती थीं। यह दर्शाता है कि भारत ने सिर्फ अपनी ज़रूरतों को पूरा नहीं किया, बल्कि वैश्विक बाज़ार में भी स्थिरता लाने में मदद की।
प्रतिबंधों पर भारत का रुख: व्यावहारिकता और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
- केंद्रीय मंत्री पुरी ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों का पूरी तरह सम्मान करता है।
- रूसी कच्चे तेल पर हमेशा से एक मूल्य सीमा रही है।
- भारत ऊर्जा व्यावहारिकता पर ध्यान केंद्रित करता है, दबाव पर नहीं।
उनके अनुसार, राष्ट्रीय हित ही उसके व्यापारिक निर्णयों का मार्गदर्शन करेगा। यह दृढ़ता से दर्शाता है कि रूसी तेल पर भारत का स्टैंड उसकी अपनी नीति पर कायम रहेगा, चाहे नाटो की चेतावनी कुछ भी हो।
भारत, रूस और वैश्विक ऊर्जा व्यापार पर प्रमुख तथ्य
| क्रम | बिंदु | विवरण |
|---|---|---|
| 1️⃣ | भारत में रूसी तेल की हिस्सेदारी | जुलाई 2025 तक कुल तेल आयात का 42% |
| 2️⃣ | भारत में तेल आपूर्ति करने वाले देश | 2007 में 27 देश, 2025 में 40 देश |
| 3️⃣ | रूसी तेल की कीमत | $60 प्रति बैरल (औसतन) |
| 4️⃣ | संभावित अमेरिकी प्रतिबंध | द्वितीयक प्रतिबंध; 500% तक टैरिफ प्रस्तावित |
| 5️⃣ | यदि रूस से व्यापार बंद होता | तेल की कीमतें $130/बैरल तक बढ़ सकती थीं (पुरी का बयान) |



Post Comment