43 लाख की घड़ी: सिद्धारमैया पर बीजेपी का ‘नकली समाजवादी’ तंज
कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर ‘घड़ी’ ने भूचाल ला दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की कलाई पर बंधी लग्जरी घड़ियों ने विपक्ष को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। बीजेपी ने सिद्धारमैया की 43 लाख की घड़ी को लेकर तीखा हमला बोला है और उन्हें “नकली समाजवादी” करार दिया है।
बुधवार को बीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की ब्रेकफास्ट मीटिंग की तस्वीरें शेयर कीं। इन तस्वीरों में दोनों नेता एक जैसी दिखने वाली लग्जरी घड़ियां पहने नजर आ रहे थे। बीजेपी का दावा है कि सिद्धारमैया ने जो घड़ी पहनी है, वह ‘सैंटोस डी कार्टियर’ (Santos de Cartier) मॉडल की है, जिसकी कीमत 43 लाख रुपये से ज्यादा है। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा, “मिस्टर सिद्धारमैया, समाजवाद की आपकी परिभाषा बहुत ज्यादा कीमत वाली लगती है। जब कर्नाटक के लोग सूखे और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर से जूझ रहे हैं, तब हमारे ‘सिंपल सोशलिस्ट’ सीएम सैंटोस डी कार्टियर की शान दिखा रहे हैं।”
सैंटोस डी कार्टियर: क्या है इस घड़ी की खासियत?
सिद्धारमैया की कलाई पर देखी गई 43 लाख की घड़ी कोई आम घड़ी नहीं है। यह कार्टियर के सैंटोस कलेक्शन का सबसे महंगा और प्रीमियम मॉडल है। यह पूरी तरह से 18 कैरेट रोज गोल्ड (गुलाबी सोने) से बनी है। इसके केस और ब्रेसलेट में खुले स्क्रू लगे हैं, जो इसके क्लासिक इंडस्ट्रियल लुक को दर्शाते हैं। इस घड़ी में कार्टियर का खास ‘कैलिबर 1847 MC’ ऑटोमैटिक मूवमेंट लगा है, जो इसे बेहद सटीक बनाता है।
इसे भी पढ़े :- इंडिगो फ्लाइट कैंसिल: दिल्ली एयरपोर्ट पर आधी रात तक उड़ानें ठप !
घड़ी का डायल सिल्वर रंग का है, जिस पर बोल्ड रोमन नंबर लिखे हैं। इसकी सुइयां नीले रंग की तलवार के आकार की हैं और क्राउन पर नीला कैबोकॉन लगा है, जो कार्टियर की पहचान है। इसकी मोटाई लगभग 9 मिमी है और यह 100 मीटर तक वॉटर रेसिस्टेंट है। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने दावा किया कि इस घड़ी की सटीक कीमत 39,80,093.63 रुपये है और इसे “राहुल गांधी स्टाइल” का स्विस-लग्जरी एडिशन सोशल जस्टिस बताया।
हब्लोट विवाद की यादें ताजा
इस नए विवाद ने 2016 के कुख्यात हब्लोट (Hublot) घड़ी विवाद की यादें ताजा कर दी हैं। उस समय भी सिद्धारमैया एक महंगी हब्लोट घड़ी पहनने को लेकर विवादों में घिरे थे। तब विपक्ष ने आरोप लगाया था कि हीरे जड़ी उस घड़ी की कीमत 50 से 70 लाख रुपये के बीच है। उस वक्त बीजेपी ने जांच की मांग की थी और मामला विधानसभा तक पहुंच गया था।
शुरुआत में आरोपों को खारिज करने के बाद, सिद्धारमैया ने सफाई दी थी कि वह घड़ी उनके एक एनआरआई दोस्त डॉ. गिरीश चंद्र वर्मा ने गिफ्ट की थी। भारी दबाव के बाद उन्होंने वह घड़ी राज्य के खजाने को दान कर दी थी और इसे सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया था। अब बीजेपी ने उस पुराने विवाद को याद दिलाते हुए पूछा, “तब 70 लाख की हब्लोट थी, आज 43 लाख की घड़ी (कार्टियर) है! कलाई पर घड़ी बदल गई है, लेकिन खर्चीली सोच नहीं बदली।”
डीके शिवकुमार की सफाई: ‘मेरी मेहनत की कमाई है’
इस विवाद में उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी लपेटे में आ गए हैं। बीजेपी ने उनकी घड़ी पर भी सवाल उठाए। शिवकुमार ने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने यह घड़ी सात साल पहले ऑस्ट्रेलिया में खरीदी थी। उन्होंने कहा, “मैंने यह घड़ी ऑस्ट्रेलिया में खरीदी थी और इसके लिए अपने क्रेडिट कार्ड से 24 लाख रुपये दिए थे। प्लीज मेरा ट्रांजेक्शन चेक करें, यह मेरी मेहनत की कमाई है।”
इसे भी पढ़े :- प्रज्वल रेवन्ना को कर्नाटक HC से झटका: रेप केस में उम्रकैद की सजा बरकरार
शिवकुमार ने सिद्धारमैया का बचाव करते हुए कहा, “मुझे सिद्धारमैया की घड़ी के बारे में नहीं पता। उन्हें घड़ी रखने का पूरा हक है। हो सकता है उनके बेटे या पत्नी ने दी हो। उनमें घड़ी खरीदने की कैपेसिटी है। उस घड़ी में क्या है?” उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता को घड़ियों का शौक था और उनके पास सात घड़ियां थीं, जो अब उनके और उनके भाई के पास हैं।
चुनावी हलफनामे पर सवाल
बीजेपी ने डीके शिवकुमार के चुनावी हलफनामे (Affidavit) को भी मुद्दा बनाया है। बीजेपी का कहना है कि हलफनामे में केवल दो घड़ियों का जिक्र है – एक 9 लाख रुपये की रोलेक्स और लगभग 24 लाख रुपये की हब्लोट। लेकिन मंगलवार को उन्होंने जो कार्टियर पहनी थी, उसका जिक्र हलफनामे में नहीं है।
इस पर शिवकुमार ने पलटवार करते हुए कहा, “वे (बीजेपी) मेरे एफिडेविट के बारे में क्या जानते हैं? मैं ट्रांसपेरेंट रहा हूं। मैंने अपनी रोलेक्स और कार्टियर घड़ियों के बारे में बताया है।” उन्होंने विपक्ष के नेता चलवादी नारायणस्वामी के उस बयान का मजाक भी उड़ाया जिसमें उन्होंने पूछा था कि क्या घड़ी चोरी की है।
कांग्रेस का पलटवार: ‘पहले अपने नेता से सवाल करें’
कांग्रेस विधायक रिजवान अरशद ने बीजेपी के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी मुख्यमंत्री को “चुन-चुनकर टारगेट” कर रही है। अरशद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महंगे शौक का जिक्र करते हुए कहा, “पार्टी प्रधानमंत्री के लग्जरी एक्सेसरीज पर सवाल उठाने से बचती है, जिसमें कार्टियर सनग्लासेस, महंगी घड़ियां, हाई-एंड सूट और लाखों के पेन शामिल हैं।”
इसे भी पढ़े :- कर्नाटक CM पद की रेस ? DK शिवकुमार बोले- “मुझे कोई जल्दी नहीं है”।
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को ‘चौकीदार’ और ‘फकीर’ बताया जाता है, लेकिन उनके महंगे शौक पर कोई बात नहीं करता। अरशद ने कहा, “अगर आप हमसे सवाल करते हैं, तो पहले अपने नेता से सवाल करें।”
‘समाजवादी’ नहीं, ‘मजावादी’
विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवादी नारायणस्वामी ने सिद्धारमैया पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “मजावादी” कहा। उनका मतलब था कि सिद्धारमैया खुद को समाजवादी कहते हैं लेकिन असल में वह ऐशो-आराम की जिंदगी जीने वाले ‘मजावादी’ हैं।
एडीआर (ADR) की रिपोर्ट के मुताबिक, सिद्धारमैया भारत के तीसरे सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं, जिनकी घोषित संपत्ति 51 करोड़ रुपये है। वहीं, डीके शिवकुमार देश के दूसरे सबसे अमीर विधायक हैं, जिनकी संपत्ति 1,413 करोड़ रुपये है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार भ्रष्टाचार का एटीएम बन गई है और बिहार चुनाव के लिए पैसे भेजे जा रहे हैं।
लग्जरी लाइफस्टाइल और राजनीतिक छवि
यह विवाद सिर्फ एक 43 लाख की घड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नेताओं की कथनी और करनी के अंतर को उजागर करता है। सिद्धारमैया ने हमेशा अपनी एक साधारण और समाजवादी छवि पेश करने की कोशिश की है, लेकिन उनकी महंगी घड़ियां, लैंड क्रूजर और मर्सिडीज गाड़ियां अक्सर विपक्ष के निशाने पर रही हैं।
बीजेपी का कहना है कि जब राज्य के किसान सूखे से परेशान हैं, तब सीएम का इतना महंगा शौक रखना असंवेदनशीलता को दर्शाता है। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि यह निजी पसंद का मामला है और बीजेपी इसे बेवजह तूल दे रही है। अब देखना यह है कि क्या 2016 की तरह इस बार भी सिद्धारमैया को अपनी घड़ी उतारकर सरकारी खजाने में जमा करनी पड़ेगी या वह इस विवाद को शांत कर पाएंगे।
इसे भी पढ़े :- कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया का दो टूक संदेश: बिना बुलाए दिल्ली नहीं जाएंगे



Post Comment