‘स्वदेशी आंदोलन 2.0’: जीएसटी सुधारों से मिलेगी भारतीय समृद्धि को गति
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ‘हर घर और दुकान को स्वदेशी आंदोलन 2.0 का प्रतीक’ बनाने का आह्वान किया है, ताकि भारत को आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास के रास्ते पर ले जाया जा सके। रविवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी सुधारों से लागत में कमी आएगी और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) को सशक्त बनाया जाएगा। उन्होंने इन सुधारों को ‘बचत उत्सव’ बताया और कहा कि यह विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए स्वदेशी को अपनाने का सही समय है।
‘स्वदेशी आंदोलन 2.0’ का आह्वान: गर्व से भारत में निर्मित उत्पाद चुनें
रविवार शाम को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर स्वदेशी उत्पादों पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि आज अनजाने में ही बहुत सी विदेशी चीज़ें हमारे जीवन का हिस्सा बन गई हैं। बहुत से लोग यह भी नहीं जानते कि कंघी जैसे साधारण उत्पाद भारत में बनते हैं या विदेश में। उन्होंने लोगों से अधिक जागरूक होने और सोच-समझकर खरीदारी करने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने कहा, “हमें पता ही नहीं चलता कि हमारी जेब में विदेशी कंघे हैं या देसी। हमें इनसे भी छुटकारा पाना होगा। हमें भारत में बनी चीज़ें खरीदनी होंगी; ऐसी चीज़ें जिनमें हमारे देश के युवाओं की मेहनत हो, ऐसी चीज़ें जिनमें हमारे देश के बेटे-बेटियों का पसीना हो।”
उन्होंने स्वदेशी को स्वतंत्रता आंदोलन के ‘स्वदेशी मंत्र’ से जोड़ते हुए कहा कि जिस तरह उस मंत्र ने देश की आज़ादी को बल दिया, उसी तरह स्वदेशी आंदोलन 2.0 देश की समृद्धि को भी बल देगा।
जीएसटी ‘बचत उत्सव’: आम जनता को दोहरा लाभ
प्रधानमंत्री मोदी ने जीएसटी सुधारों को ‘नागरिक देवो भव’ के मंत्र के अनुरूप बताया। उन्होंने कहा कि अगर आयकर छूट और जीएसटी दरों में कटौती को मिला दिया जाए, तो एक साल में लोगों को 2.5 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा की बचत होगी। उन्होंने कहा, “इसीलिए मैं कहता हूँ, ‘यह बचत उत्सव है’।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार सोमवार, 22 सितंबर से लागू होंगे, जो नवरात्रि के पहले दिन होगा। उन्होंने इसे नागरिकों के लिए “दोहरा लाभ” बताया, क्योंकि हाल ही में 12 लाख रुपये तक की आय पर आयकर छूट भी दी गई है।
उन्होंने दावा किया कि ये सुधार ग़रीबों, मध्यम वर्ग, युवाओं, महिलाओं, व्यापारियों, किसानों और दुकानदारों सहित सभी को लाभ पहुँचाएँगे।
एमएसएमई और उद्योगों के लिए बड़ी राहत
पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने में एमएसएमई की भूमिका पर विशेष ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों में कमी और नियमों के सरलीकरण से हमारे एमएसएमई, लघु उद्योगों और कुटीर उद्योगों को बहुत लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि कम कर लगने से उनकी बिक्री बढ़ेगी और उन्हें दोहरा लाभ भी मिलेगा।
उन्होंने कहा, “विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए हमें आत्मनिर्भरता के रास्ते पर चलना होगा और भारत को आत्मनिर्भर बनाने की एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी हमारे एमएसएमई पर भी है।
देश के लोगों को जो चाहिए, जो हम अपने देश में बना सकते हैं, हमें यहीं देश में बनाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि यह कदम घरेलू अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देगा और अधिक निवेशकों को आकर्षित करेगा।
ट्रंप के व्यापार युद्ध के ख़िलाफ़ भारत का प्रतिरोध
लेख में यह भी बताया गया कि प्रधानमंत्री मोदी का यह आह्वान अमेरिका के साथ चल रहे व्यापार युद्ध और एच-1बी वीज़ा पर प्रतिबंधात्मक शुल्क जैसे मुद्दों के बीच आया है। यह स्वदेशी आंदोलन 2.0 का उद्घोष था, जो एक तरह से बाहरी दबावों के ख़िलाफ़ भारत के प्रतिरोध का प्रतीक है।
पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज के छात्र विनायक दामोदर सावरकर द्वारा 1905 में विदेशी कपड़ों की होलिका दहन का उदाहरण देते हुए, लेख में कहा गया कि ठीक 120 साल बाद, प्रधानमंत्री मोदी उसी भावना को पुनर्जीवित कर रहे हैं।
हालाँकि मोदी ने सीधे तौर पर अमेरिका या ट्रंप का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका यह संदेश स्पष्ट था कि भारत अब अपनी आर्थिक संप्रभुता की रक्षा के लिए तैयार है।
नया जीएसटी ढाँचा और क्या होगा सस्ता
जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में स्वीकृत, नया जीएसटी ढाँचा 22 सितंबर से लागू होगा। इसमें चार दरों की बजाय दो मुख्य स्लैब (5% और 18%) होंगे। विलासिता और हानिकारक वस्तुओं के लिए 40% का एक विशेष स्लैब निर्धारित किया गया है, जबकि तंबाकू पर 28% और उपकर जारी रहेगा।
इस नए ढाँचे से कई वस्तुएँ सस्ती होंगी, जिनमें रोज़मर्रा की चीज़ें जैसे घी, मक्खन, पनीर, नमकीन, सूखे मेवे, जैम, केचप, कॉफ़ी और आइसक्रीम शामिल हैं। इसके अलावा, टीवी, एयर कंडीशनर और वॉशिंग मशीन जैसे उपकरण भी सस्ते होंगे। दवाइयाँ, बुनियादी इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहन भी इस सूची में शामिल हैं। कपड़ा और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों को भी धागे और फ़ाइबर पर जीएसटी घटाकर 5% किए जाने से काफ़ी फ़ायदा होगा।
निष्कर्ष: ‘जीएसटी उत्सव’ और ‘स्वदेशी आंदोलन 2.0’ एक साथ
रविवार को राष्ट्र के नाम अपने 19 मिनट के संबोधन में, प्रधानमंत्री मोदी ने जीएसटी सुधारों के गुणों पर ज़ोर दिया और कहा कि यह त्योहारी सीज़न सभी की खुशियों को बढ़ाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि “अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार भारत की विकास गाथा को गति देंगे, व्यापार करने में आसानी बढ़ाएँगे और अधिक निवेशकों को आकर्षित करेंगे।”
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट था कि आर्थिक वृद्धि और आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशी आंदोलन 2.0 ज़रूरी है और यह जीएसटी सुधारों के साथ मिलकर भारत को एक नई दिशा देगा।



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