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UPSC 2026 नोटिफिकेशन जारी: IAS-IFS अधिकारियों के लिए कड़े नियम

UPSC 2026

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने कल UPSC 2026 नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिसमें सिविल सेवाओं में पहले से कार्यरत उम्मीदवारों के लिए पात्रता और प्रयासों पर बेहद स्पष्ट और विस्तृत दिशा-निर्देश पेश किए गए हैं। संशोधित नियमों के तहत यह साफ कर दिया गया है कि जो उम्मीदवार पिछली परीक्षाओं के माध्यम से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) या भारतीय विदेश सेवा (IFS) में नियुक्त हो चुके हैं और वर्तमान में सेवारत हैं, वे CSE 2026 में बैठने के पात्र नहीं होंगे।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा पास करने के बाद लेकिन मुख्य परीक्षा से पहले IAS या IFS में नियुक्त होता है, तो उसे मुख्य परीक्षा लिखने से रोक दिया जाएगा। यहाँ तक कि मुख्य परीक्षा के बाद और परिणाम से पहले नियुक्ति होने पर भी उसे CSE 2026 के माध्यम से किसी भी सेवा आवंटन के लिए विचार नहीं किया जाएगा। 24 मई को होने वाली प्रारंभिक परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया upsc.gov.in पर शुरू हो चुकी है, जो 24 फरवरी तक खुली रहेगी।

IPS अधिकारियों के लिए प्रयासों पर सख्त पाबंदियां

संशोधित नियमों में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। UPSC 2026 नोटिफिकेशन के अनुसार, जो उम्मीदवार पिछली परीक्षाओं के माध्यम से पहले ही IPS में नियुक्त हो चुके हैं, उन्हें इस परीक्षा के परिणामों के आधार पर फिर से IPS कैडर चुनने या आवंटित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

हालांकि, IPS अधिकारी अपनी रैंक सुधारने के लिए परीक्षा दे सकते हैं, लेकिन वे दोबारा उसी सेवा को प्राप्त नहीं कर सकेंगे। कोचिंग विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम सेवा आवंटन को सुव्यवस्थित करने और “रिक्ति जमाखोरी” को रोकने के लिए उठाया गया है, जिससे नए उम्मीदवारों को सेवा में शामिल होने का अधिक मौका मिल सके।

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दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए सेंटर आवंटन में क्रांतिकारी सुधार

बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्तियों (PwBD) को समर्थन देने के लिए UPSC ने परीक्षा केंद्र आवंटन फ्रेमवर्क में बड़ा बदलाव किया है। नए सिस्टम के तहत, PwBD उम्मीदवारों के लिए परीक्षा केंद्र की क्षमता पर कोई सीमा नहीं होगी। यूपीएससी के चेयरमैन अजय कुमार ने बताया कि दिल्ली, पटना और लखनऊ जैसे केंद्र जल्दी भर जाने के कारण PwBD उम्मीदवारों को होने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

अब PwBD उम्मीदवारों के पास अपना पसंदीदा केंद्र चुनने का विकल्प हमेशा बना रहेगा, भले ही वह केंद्र सामान्य उम्मीदवारों के लिए अपनी क्षमता पूरी कर चुका हो। आयोग इसके लिए आवश्यकतानुसार अतिरिक्त क्षमता सृजित करेगा।

एप्लीकेशन पोर्टल का रीडिज़ाइन और 12 प्रमुख तकनीकी बदलाव

इस साल आयोग ने आवेदन प्रक्रिया से लेकर चयन तक 12 प्रमुख नियमों में संशोधन किया है। ऑनलाइन आवेदन पोर्टल को अब चार चरणों में विभाजित किया गया है: खाता बनाना, यूनिवर्सल रजिस्ट्रेशन नंबर (URN) जेनरेट करना, कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म (CAF) भरना और परीक्षा-विशिष्ट मॉड्यूल को पूरा करना।

उम्मीदवारों के लिए एक स्थायी पहचान के रूप में URN अनिवार्य कर दिया गया है, जिसे पूरे करियर में केवल एक बार अपडेट किया जा सकता है। इसके अलावा, अब आवेदन जमा होने के बाद सुधार करने या उसे वापस लेने का कोई मौका नहीं दिया जाएगा।

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लाइव फोटो और फेस ऑथेंटिकेशन से सुरक्षित होगी परीक्षा

परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और धोखाधड़ी रोकने के लिए UPSC 2026 नोटिफिकेशन में लाइव फोटो कैप्चर करना अनिवार्य कर दिया गया है। उम्मीदवारों को आवेदन के दौरान वेबकैम से फोटो लेनी होगी, जो अपलोड की गई पासपोर्ट फोटो से मेल खानी चाहिए।

इसके अतिरिक्त, परीक्षा केंद्रों पर डिजिटल फेस ऑथेंटिकेशन और पहचान दस्तावेजों का वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे तलाशी और प्रमाणीकरण के लिए परीक्षा स्थल पर पर्याप्त समय पहले पहुंचें। पहचान के सुचारू सत्यापन के लिए आधार कार्ड को प्राथमिकता देने की सिफारिश की गई है।

OBC और EWS सर्टिफिकेट के लिए सख्त समय-सीमा

आयोग ने रिजर्व श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के नियमों को और कड़ा किया है। OBC (नॉन-क्रीमी लेयर) सर्टिफिकेट पिछले तीन वित्तीय वर्षों (2022-23 से 2024-25) की आय के आधार पर होना चाहिए और इसे 1 अप्रैल, 2025 के बाद जारी किया जाना अनिवार्य है।

इसी तरह, EWS सर्टिफिकेट भी 1 अप्रैल, 2025 को या उसके बाद का होना चाहिए। ये सभी दस्तावेज आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि (24 फरवरी) से पहले के होने चाहिए। इसके अलावा, उम्मीदवारों को एक सादे कागज पर काली स्याही से तीन बार हस्ताक्षर करके अपलोड करने का निर्देश दिया गया है।

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प्रश्न पत्र पर आपत्ति और ‘एक बार का मौका’ नियम

UPSC ने प्रश्न पत्र पर आपत्ति दर्ज कराने की समय-सीमा को सात दिनों से घटाकर पांच दिन कर दिया है। उम्मीदवारों को प्रारंभिक परीक्षा के बाद केवल 5 दिनों का समय दिया जाएगा। वहीं, सेवा में पहले से कार्यरत उम्मीदवारों के लिए “एक बार की छूट” (One-time waiver) का नियम लाया गया है।

जो उम्मीदवार CSE 2025 या उससे पहले किसी सेवा में चुने जा चुके हैं, वे इस्तीफा दिए बिना अपने शेष प्रयासों का उपयोग CSE 2026 या 2027 में कर सकते हैं। हालांकि, CSE 2028 या उसके बाद की परीक्षाओं में बैठने के लिए उन्हें अपनी आवंटित सेवा से इस्तीफा देना अनिवार्य होगा।

लोकतंत्रिकरण और नए उम्मीदवारों के लिए बढ़ते अवसर

विशेषज्ञों और कोचिंग संस्थानों ने UPSC 2026 नोटिफिकेशन के इन बदलावों की सराहना की है। उनका मानना है कि मणिपुर या नागालैंड जैसे कैडर मिलने के बाद होम कैडर के लिए दोबारा परीक्षा लिखने वाले अधिकारियों पर लगाम लगने से सिस्टम का लोकतंत्रीकरण होगा।

प्रशिक्षण पर खर्च किए जाने वाले भारी संसाधनों की बर्बादी रोकने के लिए यह कदम आवश्यक था। 933 रिक्तियों के साथ, जिनमें 33 पद PwBD उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं, यह नोटिफिकेशन एक पारदर्शी और सुलभ परीक्षा प्रक्रिया का वादा करता है। उम्मीदवारों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रीलिम्स परिणाम के 10 दिनों के भीतर और मेन्स परिणाम के 15 दिनों के भीतर पोर्टल पर लॉगिन करें, अन्यथा उनकी उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है।

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