वंतारा जांच पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, एसआईटी गठित
वंतारा जांच सुप्रीम कोर्ट गुजरात के जामनगर में स्थित वंतारा, रिलायंस इंडस्ट्रीज की वन्यजीव परियोजना, अब सर्वोच्च न्यायालय की जांच के दायरे में आ गई है। अदालत ने पशुओं के अवैध अधिग्रहण और वन्यजीव संरक्षण कानूनों के उल्लंघन के आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। यह कदम दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान उठाया गया।
गुजरात के जामनगर में स्थित वंतारा, रिलायंस इंडस्ट्रीज की वन्यजीव परियोजना, अब वंतारा जांच सुप्रीम कोर्ट आदेश के तहत जांच के घेरे में आ गई है।
याचिकाओं और आरोपों की पृष्ठभूमि
दोनों जनहित याचिकाओं में वंतारा पर आरोप लगाया गया था कि उसने भारत और विदेशों से अवैध रूप से हाथियों और अन्य जानवरों का अधिग्रहण किया। याचिकाओं में यह भी कहा गया कि वन्यजीव संरक्षण कानूनों और अंतर्राष्ट्रीय संधियों का पालन नहीं किया गया। मीडिया रिपोर्टों और गैर-सरकारी संगठनों की शिकायतों ने इस विवाद को और गहरा कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और निर्देश
25 अगस्त 2025 को, न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने इस मामले में एसआईटी गठित करने का आदेश दिया। पीठ ने यह स्पष्ट किया कि अदालत ने किसी भी आरोप पर अभी राय व्यक्त नहीं की है। अदालत ने कहा कि आरोपों का पर्याप्त सबूत नहीं मिला है, लेकिन स्वतंत्र जांच आवश्यक है ताकि अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल न उठे।
एसआईटी की जांच और अदालत के निर्देशों ने यह स्पष्ट किया है कि वंतारा जांच सुप्रीम कोर्ट आदेश केवल निष्पक्ष तथ्यों को सामने लाने के लिए है।
एसआईटी का नेतृत्व सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्ती चेलमेश्वर कर रहे हैं। इसमें तीन और सदस्य शामिल किए गए हैं:
- न्यायमूर्ति राघवेंद्र चौहान (पूर्व मुख्य न्यायाधीश, उत्तराखंड एवं तेलंगाना हाईकोर्ट)
- हेमंत नागराले (पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त)
- अनीश गुप्ता (अतिरिक्त आयुक्त, सीमा शुल्क)
टीम को 12 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
जांच का दायरा और मुख्य प्रश्न
एसआईटी को जिन प्रमुख बिंदुओं की जांच करनी है, उनमें शामिल हैं:
- भारत और विदेशों से जानवरों का अधिग्रहण
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का अनुपालन
- सीआईटीईएस और आयात-निर्यात कानूनों का पालन
- पशु चिकित्सा देखभाल और कल्याण के मानक
- वित्तीय अनियमितताएँ और कार्बन क्रेडिट का दुरुपयोग
वंतारा की प्रतिक्रिया और बयान
अनंत अंबानी वंतारा, इस परियोजना के प्रमुख, ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वंतारा कानून और पारदर्शिता के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने एसआईटी को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन देते हुए कहा कि उनका लक्ष्य केवल पशुओं का बचाव, पुनर्वास और देखभाल है।
विवाद की जड़ और हालिया घटनाएँ
यह विवाद तब और तेज हुआ जब महाराष्ट्र के कोल्हापुर में महादेवी नामक 36 वर्षीय हथिनी को वंतारा में स्थानांतरित किया गया। स्थानीय स्तर पर इस पर विरोध हुआ, क्योंकि माना गया कि यह स्थानांतरण पशु कल्याण मानकों के अनुरूप नहीं था। हथिनी, जिसे माधुरी के नाम से भी जाना जाता है, को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत जुलाई में वंतारा लाया गया था।
वंतारा की विशेषता और महत्व
वंतारा को दुनिया का सबसे बड़ा हाथी अस्पताल माना जाता है। यह लगभग 998 एकड़ में फैले हाथी कल्याण ट्रस्ट का संचालन करता है। यहां 2,000 प्रजातियों के लगभग 1.5 लाख जानवर रहते हैं। मार्च 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस परियोजना का दौरा किया था और इसे पारिस्थितिक संतुलन और वन्यजीव संरक्षण के लिए सराहनीय कदम बताया था।
कानूनी और राजनीतिक विश्लेषण
इस मामले ने पर्यावरणीय और कानूनी बहस को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वंतारा ने अंतर्राष्ट्रीय कानूनों या वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन किया है, तो यह गंभीर अपराध होगा। वहीं राजनीतिक वर्ग में भी इस पर प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। विपक्षी दलों ने कहा कि सरकार को अंबानी परिवार की परियोजनाओं पर विशेष रियायतें नहीं देनी चाहिए। वहीं सत्ताधारी दल का कहना है कि जांच का स्वागत करना चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आए।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, का उद्देश्य जानवरों और उनकी प्रजातियों की रक्षा करना था। अतीत में कई निजी चिड़ियाघरों और पशु संरक्षण केंद्रों पर कानून उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं। वंतारा का मामला इसी ऐतिहासिक संदर्भ में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
वंतारा जांच सुप्रीम कोर्ट आदेश न केवल वन्यजीव संरक्षण कानूनों की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि बड़े कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट्स भी न्यायिक निगरानी से बाहर नहीं हैं। अब सबकी निगाहें एसआईटी की रिपोर्ट और 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी होंगी।
अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि वंतारा जांच सुप्रीम कोर्ट आदेश के बाद एसआईटी की रिपोर्ट क्या निष्कर्ष सामने लाती है।



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