ईसीआई द्वारा वोटों की चोरी: LOP राहुल गांधी का गभीर आरोप!
ईसीआई द्वारा वोटों की चोरी का बड़ा आरोप
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईसीआई द्वारा वोटों की चोरी हुई है। गांधी ने चुनाव आयोग पर भाजपा से सांठगांठ का इल्ज़ाम लगाया। यह आरोप 2024 लोकसभा चुनावों को लेकर हैं।
उनका दावा है कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में धांधली हुई। गांधी के मुताबिक यहां 1,00,000 से अधिक वोट चुराए गए। इसी वजह से भाजपा ने बेंगलुरु सेंट्रल सीट जीती।
चुनाव आयोग ने तुरंत इन आरोपों को खारिज कर दिया। ईसीआई ने गांधी को चुनौती दी है। उनसे कहा गया है कि वे अपने दावे शपथपूर्वक पेश करें। साथ ही आयोग ने चेतावनी भी जारी की।
अगर दावे सही नहीं हैं तो गांधी को बेतुके आरोप लगाने बंद करने चाहिए। ईसीआई ने कहा कि ऐसे आरोपों से जनता गुमराह होती है।
चुनाव प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गांधी ने विस्तार से बताया। उन्होंने कहा भाजपा को छोड़कर हर पार्टी को एंटी-इनकम्बेंसी का सामना करना पड़ता है। उनके मुताबिक इसकी वजह यह है कि चुनाव पूर्व नियोजित होते हैं।
गांधी ने कहा कि एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल के नतीजे अक्सर गलत होते हैं। वास्तविक चुनाव परिणाम उनसे बहुत अलग निकलते हैं। उन्होंने पुलवामा और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया।
महादेवपुरा में ईसीआई द्वारा वोटों की चोरी के तरीके
राहुल गांधी ने बेंगलुरु सेंट्रल सीट का उदाहरण दिया। कांग्रेस ने यहां सात में से छह विधानसभा खंड जीते। लेकिन महादेवपुरा खंड में उसे भारी हार मिली। यहां कांग्रेस 1,14,000 से अधिक वोटों से पिछड़ गई। गांधी का आरोप है कि यहां 1,00,250 वोट पांच तरीकों से चुराए गए। इनमें शामिल हैं:
11,965 डुप्लीकेट मतदाता।
40,009 नकली या अमान्य पते वाले मतदाता।
10,452 एक ही पते पर रजिस्टर्ड बल्क वोटर।
4,132 अमान्य फोटो वाले मतदाता।
33,692 मतदाताओं ने फॉर्म 6 का दुरुपयोग किया।
गांधी ने इसे ईसीआई द्वारा वोटों की चोरी का सबूत बताया। उन्होंने कहा यह सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र का मामला है। पूरे देश में इसी तरह की धांधली का पैटर्न दिखता है। उनका दावा है ईसीआई द्वारा वोटों की चोरी बड़े पैमाने पर हो रही है।
गांधी ने कहा सीसीटीवी फुटेज और मतदाता सूची अब अपराध के सबूत हैं। उन्होंने आरोप लगाया चुनाव आयोग इन सबूतों को नष्ट करने में लगा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले भी गांधी ने ईसीआई पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कांग्रेस के पास ऐसे सबूत हैं जो एटम बम की तरह फटेंगे।
ये सबूत दिखाएंगे कि चुनाव आयोग भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए कैसे काम कर रहा है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ दस्तावेज भी दिखाए।
वोटों की चोरी के कई उदहारण पेश किये
गांधी ने गुरकिरत सिंह डांग का उदाहरण पेश किया। इस व्यक्ति का नाम एक ही निर्वाचन क्षेत्र के चार अलग-अलग बूथों पर दर्ज था। गांधी ने कहा ऐसे हजारों उदाहरण मौजूद हैं। उन्होंने आदित्य श्रीवास्तव का भी जिक्र किया।
यह व्यक्ति कर्नाटक, लखनऊ, कानपुर और महाराष्ट्र में वोट डालता दिखाया गया। गांधी के अनुसार ऐसे 11,000 मतदाता हैं जिन्होंने कई बार वोट डाला।
कुछ और चौंकाने वाले उदाहरण भी सामने आए। कई मतदाताओं का घर नंबर ‘शून्य’ दर्ज किया गया था। कई जगह पिता का नाम बेतरतीब अक्षरों में लिखा गया था। एक और मामला 70 वर्षीय शकुं रानी का था।
उन्होंने सितंबर 2023 और अक्टूबर 2013 में दो बार पंजीकरण कराया था। दोनों बार थोड़े अलग फोटोग्राफ का इस्तेमाल किया गया। दावा है कि उन्होंने दोनों बार वोट भी डाला।
गांधी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा ईसीआई का काम भारत के लोकतंत्र को बचाना है। लेकिन उनका मानना है कि आयोग इसके विपरीत काम कर रहा है। गांधी ने बताया एक क्षेत्र की मतदाता सूची की जांच में ही छह महीने से ज्यादा लग गए।
कारण यह था कि सूचियां मशीन से पढ़े जाने लायक फॉर्मेट में नहीं थीं। उन्होंने ईसीआई से मशीन-रीडेबल सूचियां और मतदान केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज मुहैया कराने की मांग की।
ईसीआई का जवाब और गहराता विवाद
इस बीच चुनाव आयोग ने गांधी के दावों को ‘गुमराह करने वाला’ करार दिया। ईसीआई ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर बयान जारी किया। आयोग ने गांधी से शपथपत्र पर हस्ताक्षर करने को कहा। ऐसा करने पर ही उनके दावों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा सकेगी।
ईसीआई ने गांधी को आज शाम तक का समय दिया। उन्हें कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को घोषणा जमा करनी होगी।
आयोग ने दो टूक शब्दों में कहा। अगर गांधी अपने आरोपों पर यकीन नहीं रखते तो उन्हें बेबुनियाद बयान देना बंद करना चाहिए। ईसीआई ने कहा ऐसी बातें देश के नागरिकों को भ्रमित करती हैं। गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही ईसीआई के बयान पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि वे एक राजनेता हैं। जनता के सामने कही गई उनकी बात ही उनकी शपथ है। गांधी ने जोर देकर कहा कि वे जो आंकड़े दिखा रहे हैं, वे ईसीआई के ही हैं। यह कांग्रेस पार्टी का डेटा नहीं है। उन्होंने एक दिलचस्प बात कही। चुनाव आयोग ने अभी तक उनकी जानकारी को गलत नहीं ठहराया है।
गांधी ने पूछा कि आयोग यह क्यों नहीं कहता कि वोटर लिस्ट गलत नहीं है? उनका आरोप है कि ईसीआई सच्चाई जानता है। आयोग को पता है कि कांग्रेस को भी इसकी जानकारी है।
ईसीआई द्वारा वोटों की चोरी: व्यापक चिंता और संभावित समाधान
यह विवाद भारतीय चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। ईसीआई द्वारा वोटों की चोरी के आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं। मतदाता सूचियों में अनियमितताएं लोकतंत्र की नींव को कमजोर करती हैं।
डुप्लीकेट वोटिंग और फर्जी पंजीकरण जैसी समस्याएं नई नहीं हैं। लेकिन इनकी व्यापकता और पैमाने पर चिंता जताई जा रही है।
मतदाता सूची प्रबंधन एक जटिल कार्य है। भारत जैसे विशाल देश में यह चुनौती और बड़ी हो जाती है। बढ़ती आबादी और पलायन इस समस्या को बढ़ाते हैं। फिर भी तकनीकी समाधानों का उपयोग कर इन चुनौतियों से निपटा जा सकता है।
बायोमेट्रिक डेटा और आधार लिंकेज जैसे उपाय मददगार हो सकते हैं। मशीन-रीडेबल डेटा फॉर्मेट अपनाना भी जरूरी है। इससे सूचियों की जांच और साफ-सफाई आसान होगी।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए जा सकते हैं। मतदाता सूचियों का नियमित ऑडिट होना चाहिए। स्वतंत्र विशेषज्ञों की निगरानी भी फायदेमंद हो सकती है। सीसीटीवी फुटेज का उचित रखरखाव और सार्वजनिक पहुंच भी जरूरी है।
इससे मतदान प्रक्रिया में विश्वास बढ़ेगा। चुनाव आयोग को सभी राजनीतिक दलों के साथ खुलकर बातचीत करनी चाहिए। आपसी विश्वास बढ़ाने की जरूरत है।
ईसीआई द्वारा वोटों की चोरी के गंभीर आरोपों की जांच होनी चाहिए। एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। जनता का चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा बहाल करना जरूरी है। भारतीय लोकतंत्र की मजबूती इसी पर निर्भर करती है।
चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करना सबकी साझा जिम्मेदारी है। सभी हितधारकों को मिलकर काम करना होगा। तभी भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हो सकेगी।



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