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WHO ग्लोबल समिट 2025 :पारंपरिक चिकित्सा से बदलेगी दुनिया

WHO ग्लोबल समिट 2025

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित WHO ग्लोबल समिट 2025 का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ, जो स्वास्थ्य और कल्याण के वैश्विक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। पिछले तीन दिनों के दौरान, दुनिया भर के विशेषज्ञों, स्वास्थ्य मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने पारंपरिक चिकित्सा को लेकर सार्थक और गहन चर्चाओं में भाग लिया।

यह शिखर सम्मेलन न केवल पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि इस क्षेत्र में एक मजबूत वैश्विक मंच बनने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से आयोजित इस समिट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य की स्वास्थ्य सेवा में प्राचीन पद्धतियों की भूमिका अपरिहार्य होने वाली है।

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WHO ग्लोबल समिट 2025 भारत भूमिका

इस शिखर सम्मेलन के दौरान, भारत के जामनगर में स्थित WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन की स्थापना और उसकी प्रगति पर विशेष प्रकाश डाला गया। उल्लेखनीय है कि इस केंद्र की जिम्मेदारी 2022 में पहले शिखर सम्मेलन के दौरान सौंपी गई थी, जो भारत की क्षमताओं और उसके प्राचीन ज्ञान पर वैश्विक समुदाय के गहरे विश्वास का प्रतीक है।

WHO ग्लोबल समिट 2025 की अपार सफलता इस केंद्र के बढ़ते प्रभाव, अंतरराष्ट्रीय मान्यता और पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा में लाने के भारत के प्रयासों का जीता-जागत प्रमाण है। यह केंद्र अब वैश्विक स्तर पर अनुसंधान और नवाचार का धुरी बन चुका है।

पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक प्रथाओं का अद्भुत संगम

शिखर सम्मेलन के मंच पर पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों का एक रोमांचक संगम देखने को मिला। चिकित्सा विज्ञान और समग्र स्वास्थ्य के भविष्य को पूरी तरह बदलने के उद्देश्य से कई नई और दूरगामी पहल शुरू की गईं। विभिन्न देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों ने व्यापक संवादों के माध्यम से संयुक्त अनुसंधान प्रयासों को गति देने, नियामक ढांचों को सरल बनाने और ज्ञान साझा करने के नए रास्ते खोलने पर सहमति व्यक्त की।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग पारंपरिक चिकित्सा की सुरक्षा, विश्वसनीयता और वैश्विक स्वीकृति को बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे दुनिया को बेहतर स्वास्थ्य समाधान मिल सकेंगे।

तकनीक और परंपरा के बीच हुए महत्वपूर्ण वैश्विक समझौते

समिट के दौरान हुए प्रमुख समझौते भविष्य की मजबूत साझेदारी की नींव रखते हैं। चर्चाओं का मुख्य केंद्र अनुसंधान को सुदृढ़ करना, पारंपरिक चिकित्सा में डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा देना और विश्व स्तर पर विश्वसनीय नियामक ढांचा तैयार करना रहा।

प्रदर्शनियों के माध्यम से यह दिखाया गया कि कैसे डिजिटल स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) उपकरणों के जरिए परंपरा और आधुनिकता के बीच नवीन सहयोग स्थापित किया जा सकता है। WHO ग्लोबल समिट 2025 ने यह प्रदर्शित किया है कि तकनीक के समावेश से वैश्विक स्वास्थ्य समाधानों की क्षमता को कई गुना बढ़ाया जा सकता है।

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WHO ग्लोबल समिट 2025 अंतरराष्ट्रीय सहयोग

योग, जो पारंपरिक चिकित्सा का एक अभिन्न और अनिवार्य अंग है, उसकी महत्ता पर इस शिखर सम्मेलन में विशेष बल दिया गया। भारत के नेतृत्व में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किए जाने और 175 से अधिक देशों द्वारा इसके समर्थन को योग की वैश्विक जीत के रूप में याद किया गया।

समिट के दौरान उन व्यक्तियों को विशेष प्रशंसा पुरस्कारों से नवाजा गया जिन्होंने योग को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने और इसके वैज्ञानिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। योग अब केवल व्यायाम नहीं, बल्कि वैश्विक कल्याण का एक सशक्त माध्यम बन चुका है जिसे पूरी दुनिया ने स्वीकार किया है।

स्वास्थ्य सेवा में वैश्विक साझेदारी और क्षेत्रीय कार्यालय का विस्तार

शिखर सम्मेलन की एक बड़ी उपलब्धि दिल्ली में WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन रही, जिसका उद्देश्य अनुसंधान और नियामक ढांचे को और अधिक सशक्त बनाना है। भारत वर्तमान में उपचार की पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक स्तर पर कई साझेदारियां कर रहा है।

इसमें BIMSTEC देशों के लिए ‘उत्कृष्टता केंद्र’ स्थापित करना और विज्ञान एवं पारंपरिक प्रथाओं को एकीकृत करने के लिए जापान के साथ किया गया विशेष सहयोग शामिल है। ये प्रयास दर्शाते हैं कि भारत केवल अपने लिए ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक समावेशी स्वास्थ्य ढांचा तैयार करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

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WHO ग्लोबल समिट 2025 अंतरराष्ट्रीय सहयोग

इस शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय, “संतुलन बहाल करना: स्वास्थ्य और कल्याण का विज्ञान और अभ्यास,” ने स्वास्थ्य के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। चर्चाओं में विशेष रूप से आयुर्वेद के सिद्धांतों को रेखांकित किया गया, जो शरीर और मन के संतुलन पर आधारित हैं।

विशेषज्ञों ने इस बात पर चिंता जताई कि आधुनिक समय की अधिकांश स्वास्थ्य समस्याएँ जीवनशैली में असंतुलन के कारण उत्पन्न हो रही हैं। अतः, WHO ग्लोबल समिट 2025 में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि आधुनिक बीमारियों से लड़ने के लिए हमें प्राकृतिक संतुलन बहाल करने की दिशा में तुरंत और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

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भविष्य की राह: अश्वगंधा डाक टिकट और एकीकृत कैंसर देखभाल

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने समापन समारोह की झलकियाँ साझा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी और पारंपरिक चिकित्सा की प्रासंगिकता पर बल दिया। उन्होंने अश्वगंधा पर एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया और WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस के साथ सार्थक चर्चा की।

समिट में साक्ष्य-आधारित पद्धतियों और अश्वगंधा जैसी ऐतिहासिक जड़ी-बूटियों की वैश्विक क्षमता को प्रमुखता से बताया गया। आयुष मंत्रालय और WHO के बीच ‘इंटीग्रेटिव कैंसर देखभाल’ को मजबूत करने के लिए हुए संयुक्त प्रयास इस समिट की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक हैं। यह स्पष्ट है कि विज्ञान और परंपरा अब एक-दूसरे के पूरक बनकर दुनिया को स्वस्थ बनाएंगे।

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