यमन में भारतीय नर्स की फांसी रुकी: नई उम्मीद, बड़ी मानवीय जीत
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने यमन में भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी टलने की खबर पर गहरी राहत व्यक्त की है। उन्होंने इस स्थगन को “सुकून देने वाला और आशा देने वाला” बताया है, जो वास्तव में एक बड़ी मानवीय जीत है। यह उपलब्धि भारत के ग्रैंड मुफ्ती, कंठपुरम अबूबकर मुसलियार, और एक्शन काउंसिल के अथक प्रयासों का परिणाम है, जिन्होंने इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाई।
- केरल की नर्स निमिषा प्रिया की फांसी अस्थायी रूप से रोक दी गई।
- मुख्यमंत्री विजयन ने इसे सुकून देने वाला और आशाप्रद कदम बताया।
- भारत के ग्रैंड मुफ्ती ने हस्तक्षेप कर स्थगन को संभव बनाया।
इस फैसले से निमिषा को अपनी सज़ा कम करवाने के लिए महत्वपूर्ण अतिरिक्त समय मिल गया है। यह “सामूहिक मानवीय प्रयासों” का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
मुख्य बिंदु :
- मुख्यमंत्री विजयन ने फांसी स्थगन को सुकून देने वाला और आशा जगाने वाला कदम बताया।
- भारत के ग्रैंड मुफ्ती ने पीड़ित परिवार को ‘ब्लड मनी’ स्वीकार करने के लिए राज़ी किया।
- मुसलियार की मध्यस्थता से यमन में फांसी की तारीख को अस्थायी रूप से टाला गया।
- कांग्रेस विधायक चांडी ओमन ने फंडिंग में समन्वय किया, पीएमओ को भी दी जानकारी।
- निमिषा ने आरोप लगाया कि महदी ने उनका पासपोर्ट ज़ब्त कर उन्हें यातनाएं दीं।
- 2020 में सुनाई गई मौत की सज़ा की अंतिम अपील 2023 में खारिज कर दी गई थी।
- फांसी टलने से मानवीय प्रयासों को बल मिला, न्याय की संभावनाएं फिर से जगीं।
ग्रैंड मुफ्ती का हस्तक्षेप और ‘रक्त-धन’ की भूमिका
भारत के ग्रैंड मुफ्ती कंठपुरम एपी अबूबकर मुसलियार ने इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने पीड़ित, तलाल अब्दो महदी के परिवार से बात की और उन्हें ‘रक्त-धन’ (ब्लड मनी) स्वीकार करने के लिए मना लिया। इस्लाम के कानून के तहत, यदि पीड़ित परिवार सहमत हो तो हत्या के दोषी को माफी मिल सकती है। मुसलियार ने यमन के विद्वानों से संपर्क साधा और उन्हें मानवीयता के महत्व पर जोर दिया।
- मुफ्ती ने यमन के विद्वानों से संपर्क साधा और मानवीयता पर जोर दिया।
- उनकी मध्यस्थता से फांसी की तारीख को स्थगित करने का निर्णय हुआ।
- यह निर्णय निमिषा प्रिया के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण है।
मुसलियार ने कांग्रेस विधायक चांडी ओमन के प्रयासों की सराहना की है, जिन्होंने वित्तीय योगदान में समन्वय किया। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को भी इस पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया है।
निमिषा प्रिया का मामला: एक संक्षिप्त पृष्ठभूमि
केरल के पलक्कड़ जिले की निवासी निमिषा प्रिया 2011 में यमन गई थीं। उन्होंने अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए तलाल अब्दो महदी के साथ मिलकर एक क्लिनिक शुरू किया था। 2014 में उनके पति और बेटी भारत वापस आ गए थे। निमिषा का आरोप है कि महदी ने उन्हें प्रताड़ित किया और उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया।
- निमिषा का आरोप था कि महदी ने उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया।
- महदी ने उनका पासपोर्ट भी जबरन जब्त कर लिया था।
- पासपोर्ट पाने के प्रयास में महदी को दी दवा जानलेवा साबित हुई।
उन्हें 2020 में मौत की सजा सुनाई गई थी, और उनकी अंतिम अपील 2023 में खारिज हो गई थी। निमिषा को 16 जुलाई को यमन में भारतीय नर्स फांसी दी जानी थी।
नई उम्मीद और मानवीय प्रयासों का असर
सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार ने बताया कि वह “कुछ खास” नहीं कर सकती थी, पर निजी स्तर पर प्रयास जारी थे। यमन में भारतीय नर्स फांसी टली है, जिससे इस जटिल मामले में अब आशा की नई किरण जगी है। निमिषा वर्तमान में यमन की राजधानी सना में हूती प्रशासन द्वारा नियंत्रित जेल में बंद है।
- कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ग्रैंड मुफ्ती के हस्तक्षेप की प्रशंसा की।
- उन्होंने कहा कि यह मानवता के महत्व को दर्शाता है।
- फांसी टलने से निमिषा की रिहाई के प्रयासों को बल मिला है।
यह प्रकरण दिखाता है कि मानवीयता और भाईचारा किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं।



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