ज़ोहरान ममदानी का पत्र और राहुल गांधी पर बीजेपी का बड़ा हमला
ज़ोहरान ममदानी का पत्र सामने आने के बाद देश की सियासत में एक नया उबाल आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस पत्र और अमेरिकी सांसदों की सक्रियता को आधार बनाकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर “भारत विरोधी लॉबी” के साथ मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने शुक्रवार को राहुल गांधी और अमेरिकी सांसद जेनिस शाकोव्स्की के बीच 2024 में हुई एक मुलाकात की ओर इशारा किया।
शाकोव्स्की उन आठ अमेरिकी सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने इस हफ्ते भारत सरकार को पत्र लिखकर 2020 के दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद को रिहा करने की मांग की है। भाजपा ने इसे राहुल गांधी के “भारत विरोधी” रुख के पुख्ता सबूत के तौर पर पेश किया है। प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी की शाकोव्स्की और इल्हान उमर के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए कहा कि जब भी विदेश में भारत के खिलाफ कोई नैरेटिव गढ़ा जाता है, तो उसके पीछे राहुल गांधी का नाम बार-बार सामने आता है।
राहुल गांधी की विदेश यात्रा और विवादों का अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन
भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी की 2024 की अमेरिका यात्रा, सांसदों से उनकी मुलाकात और उसके बाद अमेरिकी संसद में पेश किए गए बिलों के बीच एक गहरा संबंध होने का दावा किया है। भंडारी के अनुसार, गांधी ने शाकोव्स्की और इल्हान उमर से मुलाकात की थी, जिन्हें सत्ताधारी पार्टी अक्सर “भारत विरोधी” करार देती है। इस मुलाकात के बाद जनवरी 2025 में ‘कॉम्बैटिंग इंटरनेशनल इस्लामोफोबिया एक्ट’ पेश किया गया। भाजपा का आरोप है कि जो लोग भारत को कमजोर करना चाहते हैं, उसकी चुनी हुई सरकार को बदनाम करना चाहते हैं और आतंकवाद विरोधी कानूनों को कमजोर करना चाहते हैं, वे राहुल गांधी के इर्द-गिर्द इकट्ठा हो जाते हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल कांग्रेस या राहुल गांधी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ज़ोहरान ममदानी का पत्र और अमेरिकी हस्तक्षेप ने इस बहस को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ला खड़ा किया है।
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इस्लामोफोबिया एक्ट और भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव
भाजपा ने जिस ‘कॉम्बैटिंग इंटरनेशनल इस्लामोफोबिया एक्ट’ का जिक्र किया है, उसे जनवरी 2025 में जेन शाकोव्स्की द्वारा फिर से पेश किया गया था। इस बिल का उद्देश्य इस्लामोफोबिया की निगरानी और उससे निपटने के लिए एक विशेष कार्यालय बनाना था। इस बिल में प्रावधान था कि अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी जाने वाली मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी सालाना रिपोर्टों में इस्लामोफोबिया और सरकार द्वारा नियंत्रित मीडिया में मुस्लिम विरोधी प्रचार की जानकारी शामिल की जाए। भाजपा का दावा है कि इस बिल में स्पष्ट रूप से भारत का नाम लिया गया है और “मुस्लिम समुदायों पर कार्रवाई” का आरोप लगाया गया है। पार्टी का तर्क है कि 2024 में राहुल से मुलाकात, 2025 में यह बिल और अब 2026 की शुरुआत में उमर खालिद के लिए समर्थन, यह सब एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
अमेरिकी सांसदों का भारतीय राजदूत को पत्र और उमर खालिद का मामला
30 दिसंबर को अमेरिकी सांसद जेन शाकोव्स्की ने भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को एक पत्र लिखा, जिसमें उमर खालिद को जमानत देने और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया। इस पत्र पर कुल आठ सांसदों ने हस्ताक्षर किए, जिनमें जिम मैकगवर्न, जेमी रास्किन, क्रिस वैन होलेन, पीटर वेल्च, प्रमिला जयपाल, रशीदा तलैब और लॉयड डॉगेट शामिल हैं। इन सांसदों ने चिंता जताई कि खालिद पांच साल से बिना ट्रायल के जेल में हैं। जिम मैकगवर्न ने एक्स (X) पर लिखा कि वह इस महीने की शुरुआत में खालिद के माता-पिता से मिले थे। पत्र में यह भी दावा किया गया कि खालिद के खिलाफ सबूत संदिग्ध हैं और मानवाधिकार समूहों की जांच में उन्हें आतंकवादी गतिविधि से जोड़ने वाला कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है।
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न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी का भावुक संदेश और विवाद
विवाद तब और बढ़ गया जब न्यूयॉर्क के नवनिर्वाचित मेयर ज़ोहरान ममदानी का पत्र सार्वजनिक हुआ। यह एक बिना तारीख वाला हाथ से लिखा नोट था, जो खालिद की पार्टनर बानोज्योत्सना लाहिड़ी ने साझा किया। ममदानी ने लिखा, “प्रिय उमर, मैं अक्सर कड़वाहट पर तुम्हारे शब्दों और इसे खुद पर हावी न होने देने के महत्व के बारे में सोचता हूं। तुम्हारे माता-पिता से मिलकर अच्छा लगा। हम सब तुम्हारे बारे में सोच रहे हैं।” यह नोट दिसंबर 2025 में उमर खालिद के माता-पिता की अमेरिका यात्रा के दौरान उन्हें सौंपा गया था। ममदानी ने मेयर पद की शपथ लेने के बाद इस एकजुटता को सार्वजनिक किया, जिसे भारत में विश्व हिंदू परिषद (VHP) और भाजपा ने संप्रभुता में हस्तक्षेप करार दिया है।
विश्व हिंदू परिषद का कड़ा विरोध और ‘कुरान के अपमान’ का आरोप
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ज़ोहरान ममदानी का पत्र लिखने के कदम को “भारत को बांटने की बात करने वाले अपराधियों” का बचाव बताया। बंसल ने आरोप लगाया कि ममदानी ने कुरान पर शपथ ली है, लेकिन ऐसे लोगों का साथ देकर वे इसका अपमान कर रहे हैं। VHP ने उन अमेरिकी सांसदों की भी आलोचना की जो भारत में तो हस्तक्षेप करते हैं, लेकिन बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों और अमेरिका में मंदिरों पर होने वाले हमलों पर चुप्पी साध लेते हैं। बंसल ने ममदानी को “आत्म-मंथन” करने की सलाह दी और कहा कि उन्हें एकजुटता दिखाने से पहले तथ्यों की पुष्टि करनी चाहिए थी।
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उमर खालिद पर लगे गंभीर आरोप और कानूनी स्थिति
उमर खालिद को सितंबर 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर सख्त आतंकवाद विरोधी कानून ‘गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम’ (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है। जांच एजेंसियों का दावा है कि खालिद उस बड़ी साजिश का हिस्सा थे जिसने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध के नाम पर हिंसा भड़काई, जिसमें 53 लोग मारे गए थे। फिलहाल खालिद की जमानत का मामला सुप्रीम कोर्ट में है, जहां जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजानिया की बेंच ने दलीलें पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। सांसदों के पत्र में मांग की गई है कि भारत, अंतरराष्ट्रीय नागरिक और राजनीतिक अधिकारों के समझौते का पालन करते हुए निष्पक्ष और समय पर सुनवाई सुनिश्चित करे।
वैश्विक एकजुटता बनाम आंतरिक हस्तक्षेप की बहस
खालिद की पार्टनर बानोज्योत्सना लाहिड़ी ने ममदानी और अमेरिकी सांसदों के समर्थन का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि “एकजुटता कोई सीमा नहीं जानती” और जब घर में आवाजें दबा दी जाती हैं, तो दुनिया भर से समर्थन मिलना स्वाभाविक है। उन्होंने इसकी तुलना फिलिस्तीन और क्वीर अधिकारों के लिए होने वाले वैश्विक संघर्षों से की। हालांकि, भाजपा नेता प्रदीप भंडारी का कहना है कि यह केवल मानवाधिकार का मामला नहीं है, बल्कि भारत के आतंकवाद विरोधी कानूनों को कमजोर करने का एक अंतरराष्ट्रीय प्रयास है। उन्होंने दोहराया कि जो भी तत्व भारत की चुनी हुई सरकार को बदनाम करना चाहते हैं, वे राहुल गांधी के माध्यम से अपना एजेंडा चला रहे हैं।
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