इंदौर त्रासदी: दूषित जल से मौत, परिवार ने सरकार को लौटाया मुआवजा
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां दूषित जल से मौत का तांडव देखने को मिल रहा है। भारत का सबसे स्वच्छ शहर माने जाने वाले इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में जहरीला पानी पीने से कम से कम 10 लोगों की जान चली गई है। इस त्रासदी का सबसे दर्दनाक चेहरा 6 महीने का अव्यान साहू बना, जिसका जन्म उसके माता-पिता के 10 साल के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद हुआ था। अव्यान की मौत पैकेट वाले दूध में नल का पानी मिलाकर पिलाने के बाद हुई, जिसमें सीवर का पानी मिला हुआ था। परिवार ने बताया कि बच्चे को 29 दिसंबर को मृत घोषित कर दिया गया था। इस घटना ने प्रशासन की लापरवाही और ‘स्वच्छ शहर’ के दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
10 साल की दुआओं के बाद मिला था, पल भर में छिन गया
अव्यान साहू की कहानी किसी को भी रुला सकती है। उसकी दादी कृष्णा साहू ने नम आंखों से बताया कि उनका पोता सालों के मेडिकल इलाज, मन्नतों और हुसैन टेकरी दरगाह में प्रार्थनाओं के बाद पैदा हुआ था। वह पूरी तरह स्वस्थ था और उसका वजन भी बढ़ रहा था। चूंकि उसकी मां को दूध नहीं आ रहा था, इसलिए बच्चे को पैकेट वाला दूध और मिल्क पाउडर दिया जा रहा था। इस दूध को नगर निगम के नल के पानी से पतला किया जाता था। यही पानी बच्चे के लिए काल साबित हुआ। उसे गंभीर उल्टी और दस्त होने लगे। परिवार ने पहले घर पर ही इलाज की कोशिश की, लेकिन हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कृष्णा साहू ने कहा, “हमने कभी नहीं सोचा था कि वह इतनी जल्दी हमसे छीन लिया जाएगा।”
इसे भी पढ़े :- नए FASTag नियम 2026: NHAI ने हटाई गाड़ियों के लिए KYV अनिवार्यता
परिवार ने ठुकराया सरकारी मुआवजा: ‘पैसा बच्चे से बड़ा नहीं’
राज्य सरकार ने इस त्रासदी में जान गंवाने वालों के परिवारों के लिए 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की है। लेकिन अव्यान के परिवार ने इस मुआवजे को लेने से साफ इनकार कर दिया है। दादी कृष्णा साहू ने पीटीआई को बताया, “हमने सरकार से कोई पैसा नहीं लिया है। हमारा बच्चा चला गया। क्या मुआवजा उसे वापस लाएगा? पैसा बच्चे से बड़ा नहीं हो सकता।”
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि यह आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की बस्ती है, इसलिए सरकार ने इलाज का खर्च उठाने और मुआवजे का ऐलान किया है। लेकिन साहू परिवार का दुख पैसों से नहीं भरा जा सकता। यह घटना बताती है कि दूषित जल से मौत का दर्द किसी सरकारी चेक से कम नहीं हो सकता।
भागीरथपुरा में मातम और डर का माहौल
भागीरथपुरा का मराठी मोहल्ला, जहां साहू परिवार रहता है, अब मातम और डर के साये में है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि पिछले कुछ दिनों में इलाके में उल्टी और दस्त के प्रकोप से 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 6 महीने का बच्चा भी शामिल है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने आधिकारिक तौर पर केवल चार मौतों की पुष्टि की है, जबकि इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने 10 मौतों की जानकारी होने की बात कही है। पड़ोसी अनीता सेन ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा, “मेरे घर में बहुत छोटे बच्चे हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रदूषित पानी की वजह से कोई मां अपना बच्चा न खोए।” पिछले नौ दिनों में 1,400 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं और अस्पतालों में मरीजों की कतार लगी है।
इसे भी पढ़े :- कंबोडिया ऑर्गन ट्रैफिकिंग कनेक्शन: इंटरनेशनल रैकेट का भंडाफोड़
जांच में खुलासा: सीवर लीकेज ने बनाया पानी को जहर
शुरुआती जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, प्रयोगशाला परीक्षणों में इंदौर में सप्लाई किए गए पीने के पानी में सीवर बैक्टीरिया पाए गए। भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पीने के पानी की पाइपलाइन में लीकेज मिला है। यह लीकेज ठीक उस जगह पर है जहां एक शौचालय बनाया गया था। इसी लीकेज के कारण सीवेज का पानी पीने के पानी की लाइन में मिल गया और लोगों के घरों तक पहुंच गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “सीवर लीकेज से ऐसी घटनाएं होती हैं, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।” लेकिन सवाल यह है कि शिकायतें मिलने के बाद भी प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?
सीएम मोहन यादव की सख्ती: अधिकारियों पर गिरी गाज
दूषित जल से मौत के बढ़ते मामलों के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इंदौर नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं। शहर के एक अतिरिक्त आयुक्त (Additional Commissioner) का तत्काल ट्रांसफर कर दिया गया है और उन्हें इंदौर से हटाने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, प्रभारी अधीक्षक इंजीनियर से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस ले लिया गया है। प्रशासन ने एक जोनल अधिकारी और एक सहायक इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, और एक प्रभारी सब-इंजीनियर की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। सीएम ने कहा कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के बाद अब राज्य के अन्य हिस्सों के लिए भी सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
इसे भी पढ़े :- नितिन कसलीवाल लंदन संपत्ति: ₹1400 करोड़ के बैंक फ्रॉड में ED की कार्रवाई
राहुल गांधी और विपक्ष का तीखा हमला
इस त्रासदी पर राजनीति भी गर्मा गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश को “कुशासन का केंद्र” बताते हुए बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोगों को पानी नहीं बल्कि “जहर” बांटा जा रहा था। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन ‘कुंभकर्ण’ की नींद क्यों सोता रहा? उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी निशाना साधा और कहा कि जब भी गरीबों की जान जाती है, पीएम चुप रहते हैं। राहुल ने कहा, “ये ‘मुफ्तखोरी’ वाले सवाल नहीं हैं, साफ पानी जीवन का अधिकार है।” बीजेपी की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने भी अपनी ही सरकार को घेरा है। उन्होंने इसे “पाप” बताते हुए सरकार से कड़ा प्रायश्चित करने और दोषियों को अधिकतम सजा देने की मांग की है।
स्वच्छ शहर के दावे पर सवाल और भविष्य की चिंता
इंदौर, जिसे लगातार भारत के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब मिलता रहा है, में दूषित जल से मौत की इन घटनाओं ने उसकी छवि को धूमिल कर दिया है। उमा भारती ने सही कहा कि जिस शहर को स्वच्छता का पुरस्कार मिला है, वहां इतनी गंदगी और जहरीला पानी होना शर्मनाक है। फिलहाल अस्पतालों में 32 मरीजों का इलाज चल रहा है, जिनमें से कई की हालत गंभीर है। यह घटना एक चेतावनी है कि केवल बाहरी सफाई काफी नहीं है, बल्कि बुनियादी ढांचे और पाइपलाइन सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है। अव्यान जैसे मासूमों की जान की कीमत किसी भी लापरवाही से ज्यादा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस त्रासदी से क्या सबक लेता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
इसे भी पढ़े :- तंबाकू पर नया टैक्स: पान मसाला और सिगरेट पर अब भारी मार



Post Comment